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उरई : भूमि संरक्षण विभाग में फर्जी बिल वाउचरों से 15 लाख का घपला
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उरई (जालौन)। भूमि संरक्षण विभाग में चिकित्सा प्रतिपूर्ति के नाम पर घोटाला सामने आया है। इसमें विभाग के लोगों की भूमिका संदेह के घेरे में है, जिन्होंने रिटायर्ड कर्मचारियों के नाम पर फर्जी बिल तैयार कर लाखों रुपये अपने रिश्तेदारों के खातों में पहुंचा दिए। प्रारंभिक जांच में 15 लाख रुपये से अधिक के गबन की पुष्टि हो चुकी है। विभाग के तीन कर्मचारियों की संलिप्तता पाई गई है। अब विभागीय अभिलेख, बिल वाउचर, भुगतान विवरण और संबंधित कर्मियों के बयान दर्ज करने की तैयारी की जा रही है।
भूमि संरक्षण विभाग (राष्ट्रीय जलागम) कार्यालय में तैनात रहे पूर्व अधिकारियों व कर्मचारियों के नाम से यहां तैनात कर्मचारियों ने चिकित्सा प्रतिपूर्ति के फर्जी बिल बनाए। भुगतान राशि अपने रिश्तेदारों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी। कुछ सेवानिवृत्त कर्मियों को इसकी भनक लगी तो घोटाले की परतें खुलनी शुरू हुईं।
डीएम तक मामला पहुंचा तो गोपनीय जांच के आदेश दिए गए। जांच में पता चला कि पूर्व भूमि संरक्षण अधिकारी राजेंद्र प्रसाद त्रिपाठी के नाम पर भी चिकित्सा प्रतिपूर्ति का बिल बनाकर भुगतान कर लिया गया जबकि उन्होंने ऐसा कोई दावा किया ही नहीं था। इसी प्रकार सेवानिवृत्त कर्मचारी मैयादीन और शिवराम के नाम से भी फर्जी बिल तैयार कर भुगतान राशि निकाली गई। अब तक की जांच में करीब आठ लोगों के नाम पर 15 लाख रुपये के गबन की पुष्टि हो चुकी है। जांच आगे बढ़ने पर गड़बड़ी की राशि और नामों की संख्या दोनों बढ़ सकती हैं।
शिकायत प्राप्त हुई है कि भूमि संरक्षण विभाग में चिकित्सा प्रतिपूर्ति के नाम पर दूसरे व्यक्ति को भुगतान किया गया है। इस पर तीन सदस्यीय टीम गठित की गई है। जो तीन दिन के अंदर रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। -राजेश कुमार पांडेय, डीएम, जालौन
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भूमि संरक्षण विभाग (राष्ट्रीय जलागम) कार्यालय में तैनात रहे पूर्व अधिकारियों व कर्मचारियों के नाम से यहां तैनात कर्मचारियों ने चिकित्सा प्रतिपूर्ति के फर्जी बिल बनाए। भुगतान राशि अपने रिश्तेदारों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी। कुछ सेवानिवृत्त कर्मियों को इसकी भनक लगी तो घोटाले की परतें खुलनी शुरू हुईं।
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डीएम तक मामला पहुंचा तो गोपनीय जांच के आदेश दिए गए। जांच में पता चला कि पूर्व भूमि संरक्षण अधिकारी राजेंद्र प्रसाद त्रिपाठी के नाम पर भी चिकित्सा प्रतिपूर्ति का बिल बनाकर भुगतान कर लिया गया जबकि उन्होंने ऐसा कोई दावा किया ही नहीं था। इसी प्रकार सेवानिवृत्त कर्मचारी मैयादीन और शिवराम के नाम से भी फर्जी बिल तैयार कर भुगतान राशि निकाली गई। अब तक की जांच में करीब आठ लोगों के नाम पर 15 लाख रुपये के गबन की पुष्टि हो चुकी है। जांच आगे बढ़ने पर गड़बड़ी की राशि और नामों की संख्या दोनों बढ़ सकती हैं।
शिकायत प्राप्त हुई है कि भूमि संरक्षण विभाग में चिकित्सा प्रतिपूर्ति के नाम पर दूसरे व्यक्ति को भुगतान किया गया है। इस पर तीन सदस्यीय टीम गठित की गई है। जो तीन दिन के अंदर रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। -राजेश कुमार पांडेय, डीएम, जालौन
