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Jalaun News: जलभराव नहीं बनेगी बाधा... बाबई-दमरास मार्ग पर बनेगा पुल
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फोटो 35 इसी मार्ग पर बनेगा लघु सेतु
- फोटो : 1
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उरई। बाबई से दमरास मार्ग पर सात मीटर लंबा सेतु (पुल) और पहुंच मार्ग बनाने का रास्ता साफा हो गया है। शासन से पांच करोड़ रुपये के बजट को स्वीकृति मिल गई है। अब लोगों को उरई आने-जाने के लिए सात किमी का नियामतपुर का चक्कर नहीं काटना होगा। पीडब्ल्यूडी इसका निर्माण कराएगा। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया भी जल्द शुरू होने वाली है।
इस पुल के बनने से क्षेत्र के जहटॉली, मल्थुआ, छानी, धामनी, गहपुरा, मिसुरपुरा, अटरा, जमालपुर, सेंगेपुर, खड्गुई सहित 20 गांवों को फायदा होगा। इन गांवों के ग्रामीणों को अभी तक खासतौर पर बरसात के मौसम में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। मार्ग पर पानी भर जाने के कारण आवागमन पूरी तरह बाधित हो जाता है। उरई आने-जाने के लिए सात किलोमीटर का चक्कर काटकर नियामतपुर होकर गुजरते हैं।
ग्रामीणों के अनुसार इस समस्या के चलते किसानों, छात्रों और मरीजों को सबसे ज्यादा दिक्कत उठानी पड़ती है। किसानों को अपनी उपज मंडी तक पहुंचाने में देरी होती है। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है। वहीं, स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राओं की पढ़ाई भी प्रभावित होती है। आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल ले जाना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
इस मार्ग से प्रतिदिन करीब 10 हजार की आबादी का आवागमन होता है। ऐसे में लघु सेतु का निर्माण क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा। पुल बनने के बाद न केवल आवागमन सुगम होगा, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास को भी नई गति मिलेगी। व्यापारिक गतिविधियां बढ़ेंगी और ग्रामीणों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।
ग्रामीणों ने बताया कि इस पुल की मांग लंबे समय से की जा रही थी। कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को अवगत कराया गया। इसके बाद अब जाकर इस परियोजना को मंजूरी मिली है।
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता महेंद्र सिंह ने बताया कि परियोजना के लिए बजट स्वीकृत हो चुका है। जल्द ही टेंडर प्रक्रिया पूरी कर निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।
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इस पुल के बनने से क्षेत्र के जहटॉली, मल्थुआ, छानी, धामनी, गहपुरा, मिसुरपुरा, अटरा, जमालपुर, सेंगेपुर, खड्गुई सहित 20 गांवों को फायदा होगा। इन गांवों के ग्रामीणों को अभी तक खासतौर पर बरसात के मौसम में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। मार्ग पर पानी भर जाने के कारण आवागमन पूरी तरह बाधित हो जाता है। उरई आने-जाने के लिए सात किलोमीटर का चक्कर काटकर नियामतपुर होकर गुजरते हैं।
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ग्रामीणों के अनुसार इस समस्या के चलते किसानों, छात्रों और मरीजों को सबसे ज्यादा दिक्कत उठानी पड़ती है। किसानों को अपनी उपज मंडी तक पहुंचाने में देरी होती है। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है। वहीं, स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राओं की पढ़ाई भी प्रभावित होती है। आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल ले जाना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
इस मार्ग से प्रतिदिन करीब 10 हजार की आबादी का आवागमन होता है। ऐसे में लघु सेतु का निर्माण क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा। पुल बनने के बाद न केवल आवागमन सुगम होगा, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास को भी नई गति मिलेगी। व्यापारिक गतिविधियां बढ़ेंगी और ग्रामीणों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।
ग्रामीणों ने बताया कि इस पुल की मांग लंबे समय से की जा रही थी। कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को अवगत कराया गया। इसके बाद अब जाकर इस परियोजना को मंजूरी मिली है।
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता महेंद्र सिंह ने बताया कि परियोजना के लिए बजट स्वीकृत हो चुका है। जल्द ही टेंडर प्रक्रिया पूरी कर निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।