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सोंगर गांव की अनोखी परंपरा : 3 पीढ़ियों से 'गांव की बेटी, गांव की ही बहू', अब तक हो चुके 150 से अधिक निकाह
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अनोखा गांव-ग्राम प्रधान इश्तियक अहमद
- फोटो : सांकेतिक
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खेतासराय। आज के बदलते दौर में जहां रिश्ते-नाते गांव, जिले और प्रदेश की सीमाओं को लांघकर देश-विदेश तक तय हो रहे हैं, वहीं जौनपुर जिले का सोंगर गांव अपनी एक अनूठी परंपरा को आज भी संजोए हुए है। इस गांव में तीन से चार पीढ़ियों से अधिकांश निकाह गांव के भीतर ही होते आ रहे हैं। गांव की बेटी ही गांव की बहू बनती है। ग्रामीणों के अनुसार, अब तक डेढ़ सौ से अधिक जोड़े गांव में ही विवाह बंधन में बंध चुके हैं। इतना ही नहीं, मौजूदा ग्राम प्रधान सहित कई परिवारों की लगातार तीन पीढ़ियों के विवाह भी गांव के भीतर ही संपन्न हुए हैं।
लगभग 6,600 की आबादी और चार हजार मतदाताओं वाले सोंगर गांव की आर्थिक स्थिति काफी मजबूत मानी जाती है। गांव के अधिकांश परिवार खेती-बाड़ी से जुड़े हैं, वहीं कई लोग विदेश में रहकर भी अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर रहे हैं। गांव निवासी इश्तियाक खान बताते हैं कि उनके दादा और पिता की शादी भी गांव में ही हुई थी।
गांव के प्रभावशाली परिवार पहले सामाजिक एकजुटता, संख्या बल, जमीन-जायदाद की सुरक्षा और राजनीतिक प्रभाव बनाए रखने के उद्देश्य से गांव के भीतर ही रिश्ते करना पसंद करते थे। इसी सोच ने धीरे-धीरे एक परंपरा का रूप ले लिया। आज भी गांव में अरशद-शाहिना, सौदागर-सीमा, शब्बीर-सुमैया, आसिफ माली-फातिमा, सिराजुद्दीन-सबिया, मतीन-मैसरी, हासिर-सुमैया, सुहेल-सीमा, शाहिद-बेबी, अच्छन-जुलेखा और मोहम्मद साद-पम्मी जैसे अनेक दंपती हैं, जिनके निकाह गांव के भीतर ही संपन्न हुए हैं।
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स्वयं हमारी शादी पूर्व प्रधान पत्नी साबेक़ा बानो के साथ गांव में ही हुई है। पहले गांव में करीब 70 प्रतिशत निकाह गांव के भीतर ही होते थे। परिवार एक-दूसरे को अच्छी तरह जानते थे, जिससे विश्वास बना रहता था और जमीन-जायदाद भी गांव के भीतर ही रहती थी। मेरे परिवार समेत कई परिवारों की लगातार तीन पीढ़ियों के विवाह भी गांव के भीतर ही संपन्न हुए हैं। अब तक 150 से अधिक जोड़ों का गांव में ही निकाह हो चुका है। हालांकि अब शिक्षा, रोजगार और बदलती सामाजिक सोच के कारण दूसरे गांवों में भी रिश्ते होने लगे हैं। - इश्तियाक अहमद, ग्राम प्रधान
पहले संख्या बल को प्रतिष्ठा और सामाजिक प्रभाव का आधार माना जाता था। इसी कारण रोटी-बेटी के रिश्ते गांव के भीतर रखने पर जोर दिया जाता था। -अकबर सिद्दीकी, स्थानीय
सामाजिक बदलाव की बयार अब गांव तक पहुंच चुकी है, लेकिन यह परंपरा आज भी सोंगर की अलग पहचान बनी हुई है।-सद्दाम खान, स्थानीय
करीबी रक्त संबंधों में विवाह से बढ़ सकता है आनुवंशिक बीमारी का खतरा
यूरो सर्जन डॉ. अदनान हबीब के अनुसार यदि विवाह करीबी रक्त संबंध (ब्लड रिलेशन) में होता है, तो बच्चों में कुछ आनुवंशिक बीमारियों का जोखिम सामान्य विवाह की तुलना में बढ़ सकता है। हालांकि यदि पति-पत्नी केवल एक ही गांव के निवासी हैं, लेकिन उनके बीच रक्त संबंध नहीं है, तो ऐसा जोखिम सामान्य विवाह जैसा ही माना जाता है। इसलिए दोनों स्थितियों में अंतर समझना जरूरी है।
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लगभग 6,600 की आबादी और चार हजार मतदाताओं वाले सोंगर गांव की आर्थिक स्थिति काफी मजबूत मानी जाती है। गांव के अधिकांश परिवार खेती-बाड़ी से जुड़े हैं, वहीं कई लोग विदेश में रहकर भी अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर रहे हैं। गांव निवासी इश्तियाक खान बताते हैं कि उनके दादा और पिता की शादी भी गांव में ही हुई थी।
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गांव के प्रभावशाली परिवार पहले सामाजिक एकजुटता, संख्या बल, जमीन-जायदाद की सुरक्षा और राजनीतिक प्रभाव बनाए रखने के उद्देश्य से गांव के भीतर ही रिश्ते करना पसंद करते थे। इसी सोच ने धीरे-धीरे एक परंपरा का रूप ले लिया। आज भी गांव में अरशद-शाहिना, सौदागर-सीमा, शब्बीर-सुमैया, आसिफ माली-फातिमा, सिराजुद्दीन-सबिया, मतीन-मैसरी, हासिर-सुमैया, सुहेल-सीमा, शाहिद-बेबी, अच्छन-जुलेखा और मोहम्मद साद-पम्मी जैसे अनेक दंपती हैं, जिनके निकाह गांव के भीतर ही संपन्न हुए हैं।
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स्वयं हमारी शादी पूर्व प्रधान पत्नी साबेक़ा बानो के साथ गांव में ही हुई है। पहले गांव में करीब 70 प्रतिशत निकाह गांव के भीतर ही होते थे। परिवार एक-दूसरे को अच्छी तरह जानते थे, जिससे विश्वास बना रहता था और जमीन-जायदाद भी गांव के भीतर ही रहती थी। मेरे परिवार समेत कई परिवारों की लगातार तीन पीढ़ियों के विवाह भी गांव के भीतर ही संपन्न हुए हैं। अब तक 150 से अधिक जोड़ों का गांव में ही निकाह हो चुका है। हालांकि अब शिक्षा, रोजगार और बदलती सामाजिक सोच के कारण दूसरे गांवों में भी रिश्ते होने लगे हैं। - इश्तियाक अहमद, ग्राम प्रधान
पहले संख्या बल को प्रतिष्ठा और सामाजिक प्रभाव का आधार माना जाता था। इसी कारण रोटी-बेटी के रिश्ते गांव के भीतर रखने पर जोर दिया जाता था। -अकबर सिद्दीकी, स्थानीय
सामाजिक बदलाव की बयार अब गांव तक पहुंच चुकी है, लेकिन यह परंपरा आज भी सोंगर की अलग पहचान बनी हुई है।-सद्दाम खान, स्थानीय
करीबी रक्त संबंधों में विवाह से बढ़ सकता है आनुवंशिक बीमारी का खतरा
यूरो सर्जन डॉ. अदनान हबीब के अनुसार यदि विवाह करीबी रक्त संबंध (ब्लड रिलेशन) में होता है, तो बच्चों में कुछ आनुवंशिक बीमारियों का जोखिम सामान्य विवाह की तुलना में बढ़ सकता है। हालांकि यदि पति-पत्नी केवल एक ही गांव के निवासी हैं, लेकिन उनके बीच रक्त संबंध नहीं है, तो ऐसा जोखिम सामान्य विवाह जैसा ही माना जाता है। इसलिए दोनों स्थितियों में अंतर समझना जरूरी है।