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उद्यमिता की दिशा में सोच विकसित करें छात्र : शेखर
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वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के जैव प्रौद्योगिकी एवं जैव रसायन विभाग में उद्योग-शिक्षा समन्वय को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र (एलुमनाई) एवं शेखर आनंद, सह-संस्थापक, हीथॉक्स-के प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्ली ने सहभागिता की।
आनंद ने छात्रों को केवल रोजगार तक सीमित न रहकर उद्यमिता की दिशा में सोच विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार उन्होंने थैलेसीमिया एवं सिकल सेल एनीमिया से ग्रसित नवजात शिशुओं के लिए डायग्नोस्टिक किट विकसित की, जिससे समय पर पहचान कर बेहतर उपचार एवं प्रबंधन संभव हो सके और रोगियों के जीवन की गुणवत्ता एवं अवधि में सुधार किया जा सके।
उन्होंने विचार (आइडिया) से उत्पाद (प्रोडक्ट) तक की पूरी यात्रा, अनुसंधान, नवाचार तथा विभिन्न फंडिंग स्रोतों पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम का आयोजन प्रो. राजेश शर्मा के निर्देशन में किया गया। अंत में डॉ. मनीष कुमार गुप्ता ने मुख्य वक्ता, उपस्थित प्राध्यापकों एवं छात्रों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. संजीव कुमार मौर्य द्वारा किया गया। इस अवसर पर डॉ. एस. पी. तिवारी, डॉ. सिपाही लाल, डॉ. दिनेश कुमार सहित शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
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कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र (एलुमनाई) एवं शेखर आनंद, सह-संस्थापक, हीथॉक्स-के प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्ली ने सहभागिता की।
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आनंद ने छात्रों को केवल रोजगार तक सीमित न रहकर उद्यमिता की दिशा में सोच विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार उन्होंने थैलेसीमिया एवं सिकल सेल एनीमिया से ग्रसित नवजात शिशुओं के लिए डायग्नोस्टिक किट विकसित की, जिससे समय पर पहचान कर बेहतर उपचार एवं प्रबंधन संभव हो सके और रोगियों के जीवन की गुणवत्ता एवं अवधि में सुधार किया जा सके।
उन्होंने विचार (आइडिया) से उत्पाद (प्रोडक्ट) तक की पूरी यात्रा, अनुसंधान, नवाचार तथा विभिन्न फंडिंग स्रोतों पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम का आयोजन प्रो. राजेश शर्मा के निर्देशन में किया गया। अंत में डॉ. मनीष कुमार गुप्ता ने मुख्य वक्ता, उपस्थित प्राध्यापकों एवं छात्रों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. संजीव कुमार मौर्य द्वारा किया गया। इस अवसर पर डॉ. एस. पी. तिवारी, डॉ. सिपाही लाल, डॉ. दिनेश कुमार सहित शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।