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Jhansi News: ईडी के रडार पर शेल कंपनियां, 250 करोड़ से अधिक की संपत्तियों की जांच
Fri, 10 Jul 2026 02:39 AM IST
झांसी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
Updated Fri, 10 Jul 2026 02:39 AM IST
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झांसी/लखनऊ। गरौठा के पूर्व सपा विधायक दीपनारायण सिंह यादव और उनके सहयोगियों से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच तेज हो गई है। पूर्व विधायक ने सियासी रसूख के सहारे बड़ा आर्थिक साम्राज्य भी खड़ा किया। बुधवार को छापे की कार्रवाई के बाद लौटी ईडी टीम को कई शेल कंपनियों के दस्तावेज भी मिले हैं। आशंका है कि इनके सहारे करोड़ों रुपये छिपाए गए और कई शहरों में करोड़ों रुपये निवेश हुए। अब तक की जांच में करीब 250 करोड़ रुपये की संपत्ति का पता चला है।
ईडी के अनुसार जांच उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई। एफआईआर में आरोप है कि दीपनारायण सिंह यादव ने जांच अवधि के दौरान अपनी ज्ञात आय से 23.02 करोड़ रुपये अधिक की संपत्ति अर्जित की। इसके अलावा शेल कंपनियों के माध्यम से बड़े पैमाने पर निवेश और धन के लेनदेन की शिकायत मिलने पर ईडी ने उनके और उनके करीबी लोगों के परिसरों पर तलाशी ली।
जांच एजेंसी के अनुसार प्रारंभिक जांच में ऐसे दस्तावेज मिले हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि कई व्यावसायिक संस्थाओं और कथित शेल कंपनियों के माध्यम से निवेश किया गया। ईडी का आरोप है कि इनमें परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों और करीबी सहयोगियों के नाम का इस्तेमाल किया गया। एजेंसी को कुछ ऐसी कंपनियों के दस्तावेज भी मिले हैं, जिनके बारे में प्रथम दृष्टया वास्तविक व्यावसायिक गतिविधियां नहीं मिलने का दावा किया गया है।
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सूत्रों के अनुसार जांच के दौरान झांसी, निवाड़ी, भोपाल, लखनऊ और नोएडा समेत विभिन्न स्थानों पर स्थित संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड भी एजेंसी के हाथ लगे हैं। ईडी इन दस्तावेजों की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन संपत्तियों और निवेश का स्रोत क्या है तथा क्या इनका संबंध अपराध से अर्जित धन से है।
सूत्रों का यह भी कहना है कि कुछ कंपनियों के निदेशक मंडल में पूर्व विधायक से जुड़े कर्मचारियों और परिजनों के नाम सामने आए हैं। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि ईडी ने नहीं की है। एजेंसी दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ कर सकती है। ईडी ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।
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ईडी के अनुसार जांच उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई। एफआईआर में आरोप है कि दीपनारायण सिंह यादव ने जांच अवधि के दौरान अपनी ज्ञात आय से 23.02 करोड़ रुपये अधिक की संपत्ति अर्जित की। इसके अलावा शेल कंपनियों के माध्यम से बड़े पैमाने पर निवेश और धन के लेनदेन की शिकायत मिलने पर ईडी ने उनके और उनके करीबी लोगों के परिसरों पर तलाशी ली।
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जांच एजेंसी के अनुसार प्रारंभिक जांच में ऐसे दस्तावेज मिले हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि कई व्यावसायिक संस्थाओं और कथित शेल कंपनियों के माध्यम से निवेश किया गया। ईडी का आरोप है कि इनमें परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों और करीबी सहयोगियों के नाम का इस्तेमाल किया गया। एजेंसी को कुछ ऐसी कंपनियों के दस्तावेज भी मिले हैं, जिनके बारे में प्रथम दृष्टया वास्तविक व्यावसायिक गतिविधियां नहीं मिलने का दावा किया गया है।
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सूत्रों के अनुसार जांच के दौरान झांसी, निवाड़ी, भोपाल, लखनऊ और नोएडा समेत विभिन्न स्थानों पर स्थित संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड भी एजेंसी के हाथ लगे हैं। ईडी इन दस्तावेजों की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन संपत्तियों और निवेश का स्रोत क्या है तथा क्या इनका संबंध अपराध से अर्जित धन से है।
सूत्रों का यह भी कहना है कि कुछ कंपनियों के निदेशक मंडल में पूर्व विधायक से जुड़े कर्मचारियों और परिजनों के नाम सामने आए हैं। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि ईडी ने नहीं की है। एजेंसी दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ कर सकती है। ईडी ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।