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नव प्रशिक्षु सिपाही: बेटियों के मंच के पास पहुंचते ही परिजनों ने दी सलामी, आंखों से छलक पड़े खुशी के आंसू

अमर उजाला नेटवर्क, झांसी Published by: दीपक महाजन Updated Mon, 27 Apr 2026 12:22 PM IST
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सार

खाकी वर्दी में सजी बेटियां जब सलामी देते मंच के पास पहुंचीं तो उनके परिजन अपनी जगह खड़े हो गए। उन्होंने बेटियों को सलामी दी। यह दृश्य देख वहां मौजूद पुलिसवालों ने तालियां बजाकर उत्साह बढ़ाया।

Jhansi: As soon as the daughters reached the stage, the family members saluted them
मां के साथ महिला सिपाही। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

परेड स्थल के आखिरी छोर पर खींची चूने की लाइन पार करते ही कई रिक्रूट महिलाकर्मियों की आंखें छलछला आईं। इस चूने की लाइन पार करने में उनको नौ महीने की कठिन ट्रेनिंग से गुजरना पड़ा। कई महिला रिक्रूट ने अपने छोटे बच्चों को छोड़कर इस संघर्ष की राह चुनी थी। उनके संघर्षों की जीत के साक्षी परिवार के लोग भी बने वहीं, बेटियों को वर्दी में सजा देख उनके पिता का सीना भी गर्व से चौड़ा हो गया।
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Jhansi: As soon as the daughters reached the stage, the family members saluted them
भाई व पिता के साथ महिला सिपाही। - फोटो : अमर उजाला
खुशी से छलके आंसू
खाकी वर्दी में सजी बेटियां जब सलामी देते मंच के पास पहुंचीं तो उनके परिजन अपनी जगह खड़े हो गए। उन्होंने बेटियों को सलामी दी। यह दृश्य देख वहां मौजूद पुलिसवालों ने तालियां बजाकर उत्साह बढ़ाया। अपनी बेटी की उपलब्धि पर कई परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू दिखे। अलीगढ़, उन्नाव, फतेहपुर, फिरोजाबाद, ललितपुर जैसे तमाम इलाकों से परिजन यहां पहुंचे थे। कोई किसान था तो किसी ने छोटा-मोटा कारोबार करके अपनी बेटी को पढ़ाया-लिखाया।

 
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परिजनों के साथ फोटो निकलवाती महिला सिपाही। - फोटो : अमर उजाला
यह बोले परिजन
अलीगढ़ के इगलास इलाके के रामवीर सिंह अपनी छोटी बेटी ऋतु ठकुराले को वर्दी में सजा देखकर फूले नहीं समा रहे थे। किसानी करके किसी तरह बेटी को पढ़ाया था। पिता रामवीर ने बताया कि आसपास के गांव में भी उनकी बेटी ही पुलिस में भर्ती होने वाली पहली लड़की है। वहीं, सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली अस्मिता दीक्षित के पिता उन्नाव में प्राइवेट अध्यापक हैं। उनका कहना है कि घर से कोई भी पुलिस में भर्ती नहीं हुआ। घर में यह पुलिस की पहली नौकरी है।

 

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परेड के बाद पिता के साथ बेटियां। - फोटो : अमर उजाला
खूब ली सेल्फी
फिरोजाबाद निवासी अंजली यादव के पिता बीएसएफ में हैं। वह अपनी तरह बेटी को भी वर्दी में देखना चाहते थे। उनकी इच्छा अंजली ने पूरी की। उन्नाव निवासी गंगापाल अपनी बेटी नैंसी पाल की उपलब्धि पर फूले नहीं समा रहे थे। उनकी बेटी कई वर्गों में अव्वल रही। इसकी उनको दोहरी खुशी रही। कार्यक्रम में शामिल होने नैंसी का पूरा परिवार आया था। उन्नाव के चकरबंसी की रहने वाली अवंतिका के पिता प्रभात ने इस पल को पूरे खानदान के लिए उपलब्धि बताया। अवंतिका ने मुश्किलों से जूझते हुए ट्रेनिंग पूरी की। अवंतिका के मुताबिक शुरू में पांव फ्रैक्चर हो गया था। किसी तरह उसने ट्रेनिंग की। अपराध विधि समेत तीन विषयों में अव्वल मंसूरी के पिता राजेंद्र भी गर्व से फूले नहीं समा रहे थे।

कई रिक्रूट शादीशुदा थीं। घर परिवार से दूर रहकर नौ माह की कठिन ट्रेनिंग की। बच्चों से दूर रहना पड़ा। वर्दी में सजी बेटियों के साथ पिता, भाई, मां समेत अन्य परिजनों ने जमकर सेल्फी खिंचवाई।
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