सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   Jhansi: Mahatma Gandhi had given impetus to the freedom movement by coming here twice.

Jhansi: दो बार आकर महात्मा गांधी ने दी थी आजादी के आंदोलन को धार, किले में जनसभा को किया था संबोधित

अमर उजाला नेटवर्क, झांसी Published by: दीपक महाजन Updated Fri, 30 Jan 2026 07:55 AM IST
विज्ञापन
सार

झांसी के किले में जनसभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कहा था कि रानी लक्ष्मीबाई का बलिदान भारत की आत्मा में बसता है।

Jhansi: Mahatma Gandhi had given impetus to the freedom movement by coming here twice.
महात्मा गांधी - फोटो : ट्विटर @@rashtrapitaa
विज्ञापन

विस्तार
Follow Us

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने दो बार झांसी आकर देश की आजादी के आंदोलन को धार दी थी। उन्होंने झांसी के किले में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था कि रानी लक्ष्मीबाई का बलिदान भारत की आत्मा में बसता है। एसपीआई इंटर कॉलेज में जिस कक्ष में वह ठहरे थे, उसका नाम महात्मा गांधी स्मृति कक्ष रखा गया है। इसके अलावा कॉलेज परिसर में उनकी प्रतिमा भी स्थापित करवाई गई है।
Trending Videos



रानी लक्ष्मीबाई को दी थी श्रद्धांजलि
झांसी केवल 1857 की क्रांति की भूमि नहीं, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में भी राष्ट्रीय चेतना का प्रमुख केंद्र रही। महात्मा गांधी सबसे पहले वर्ष 1921 के नवंबर महीने में झांसी आए थे। इतिहासकार हरगोविंद कुशवाहा का कहना है कि झांसी गजेटियर के पेज 71 पर इसका उल्लेख किया गया है। उस समय देश में आजादी का आंदोलन चरम पर था। महात्मा गांधी ने झांसी आगमन पर हार्डीगंज (अब सुभाषगंज), किले के आसपास समेत कई स्थलों पर विदेशी कपड़ों की होली जलवाई थी। उन्होंने जन-जन में आजादी की अलख जगाते हुए कहा था कि जब तक देश आजाद नहीं हो जाता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। आजादी के आंदोलन में हर व्यक्ति को अपनी भूमिका अदा करनी है। इस दौरान उन्होंने झांसी किले में रानी लक्ष्मीबाई को श्रद्धांजलि अर्पित की थी। स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को नमन किया। इस यात्रा ने झांसी को 1857 की क्रांति और 1921 के स्वतंत्रता आंदोलन के बीच वैचारिक सेतु प्रदान किया।
विज्ञापन
विज्ञापन




लोगों ने चंदा एकत्र कर भेंट की थी थैली
हरगोविंद कुशवाहा का कहना है कि दूसरी बार महात्मा गांधी वर्ष 1929 में 22 नवंबर को झांसी आए थे। एक दिन यहां ठहरने के बाद वह मुंशी अजमेरी के आमंत्रण पर 23 नवंबर को चिरगांव पहुंचे। यहां पर उन्होंने राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के निवास पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की बैठक को संबोधित किया। इसके बाद मुख्य बाजार में सभा को संबोधित किया। उस दाैरान उन्होंने संदेश दिया कि आजादी केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि नैतिक और सामाजिक परिवर्तन का मार्ग है। यहां से जाते समय महात्मा गांधी कुछ देर मोंठ में भी रुके थे। यहां के लोगों ने भी उन्हें चंदा एकत्र कर थैली भेंट की थी। इस यात्रा ने झांसी में राष्ट्रीय आंदोलन को और अधिक संगठित किया।इससे आंदोलन में महिलाओं और युवाओं की सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा मिला। स्वतंत्रता संग्राम को जन आंदोलन का स्वरूप मिला।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

Election
एप में पढ़ें

Followed