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Jhansi: विला खरीदने के लिए दी गई रकम ब्याज के साथ लौटाने का आदेश, जिला उपभोक्ता अदालत ने सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Fri, 16 Jan 2026 12:40 PM IST
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सार
आयोग के अध्यक्ष अमर पाल सिंह ने वादी के मानसिक कष्ट के लिए 5000 रुपये और वाद व्यय के मद में 3000 रुपये भी अदा करने का आदेश कॉलोनाइजर को दिया।
कोर्ट (प्रतीकात्मक फोटो)
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
दतिया गेट बाहर निवासी दंपती ने एक कॉलोनी में विला की बुकिंग कराई। उसने एक प्राइवेट बैंक से ऋण लिया। इसी बीच परिवादी का कारोबार खराब हो गया। उन्होंने विला खरीदने में असमर्थता जताई और बुकिंग की राशि लौटाने के लिए कहा लेकिन कॉलोनाइजर ने इन्कार कर दिया। दंपती ने न्यायालय की शरण ली और कॉलोनाइजर को रुपये लौटाने का आदेश सुनाया।
दतिया गेट बाहर निवासी अमोल गुप्ता और पत्नी अंजली गुप्ता ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में 18 फरवरी 2022 में वाद दायर किया था। उन्होंने बताया था कि घरेलू कलह की वजह से उन्हें स्वतंत्र आवास की जरूरत थी। इसलिए उन्होंने झांसी-कानपुर बाईपास स्थित सनफ्रान अशोक सिटी में एक विला 57 लाख रुपये में बुक कराया था। बुकिंग के रूप में उन्होंने छह लाख रुपये देकर रसीद ली थी। बकाया राशि जमा करने के लिए उन्होंने बैंक से ऋण भी लिया। इस बीच उन्होंने दो किस्तों में साढ़े 11 लाख और फिर दो लाख रुपये कॉलोनाइजर को दिए। इस बीच उनका कारोबार चौपट होने लगा। उन्होंने विला लेने में असमर्थता जताई। इसके बाद कॉलोनाइजर ने विला किसी और को बेच दिया लेकिन वादी के कुल 19,50,000 रुपये वापस नहीं किए।
इस मामले में कोर्ट ने वादी की ओर से चेक के माध्यम से कॉलोनाइजर को दिए गए 11,50,000 रुपये वाद दायर करने की तिथि से छह प्रतिशत ब्याज के साथ अदा करने का फैसला सुनाया। आयोग के अध्यक्ष अमर पाल सिंह ने वादी के मानसिक कष्ट के लिए 5000 रुपये और वाद व्यय के मद में 3000 रुपये भी अदा करने का आदेश कॉलोनाइजर को दिया।
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दतिया गेट बाहर निवासी अमोल गुप्ता और पत्नी अंजली गुप्ता ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में 18 फरवरी 2022 में वाद दायर किया था। उन्होंने बताया था कि घरेलू कलह की वजह से उन्हें स्वतंत्र आवास की जरूरत थी। इसलिए उन्होंने झांसी-कानपुर बाईपास स्थित सनफ्रान अशोक सिटी में एक विला 57 लाख रुपये में बुक कराया था। बुकिंग के रूप में उन्होंने छह लाख रुपये देकर रसीद ली थी। बकाया राशि जमा करने के लिए उन्होंने बैंक से ऋण भी लिया। इस बीच उन्होंने दो किस्तों में साढ़े 11 लाख और फिर दो लाख रुपये कॉलोनाइजर को दिए। इस बीच उनका कारोबार चौपट होने लगा। उन्होंने विला लेने में असमर्थता जताई। इसके बाद कॉलोनाइजर ने विला किसी और को बेच दिया लेकिन वादी के कुल 19,50,000 रुपये वापस नहीं किए।
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इस मामले में कोर्ट ने वादी की ओर से चेक के माध्यम से कॉलोनाइजर को दिए गए 11,50,000 रुपये वाद दायर करने की तिथि से छह प्रतिशत ब्याज के साथ अदा करने का फैसला सुनाया। आयोग के अध्यक्ष अमर पाल सिंह ने वादी के मानसिक कष्ट के लिए 5000 रुपये और वाद व्यय के मद में 3000 रुपये भी अदा करने का आदेश कॉलोनाइजर को दिया।
