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Jhansi: पश्चिम एशिया में युद्ध से खाद्य तेलों व माचिस के दाम में उछाल, सरसों आदि तेलों की कीमत भी बढ़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Thu, 26 Mar 2026 01:17 PM IST
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सार
अमेरिका-इजराइल और ईरान में करीब तीन हफ्ते से युद्ध चल रहा है। इसके चलते घरेलू व कॉमर्शियल रसोई गैस पर साफ असर दिखाई दे रहा है। अब खाद्य तेलों पर भी प्रभाव दिखने लगा है।
ईरान युद्ध का असर।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध का असर अब खाद्य तेलों व माचिस पर पड़ने लगा है। ब्राजील, अर्जेंटीना समेत अन्य देशों से आने वाले सरसों, सोयाबीन, पाम ऑयल महंगे होने लगे हैं। पिछले एक हफ्ते में इनके भाव में पांच से दस फीसदी का उछाल आया है। माचिस की कीमत भी बढ़ी है।
अमेरिका-इजराइल और ईरान में करीब तीन हफ्ते से युद्ध चल रहा है। इसके चलते घरेलू व कॉमर्शियल रसोई गैस पर साफ असर दिखाई दे रहा है। अब खाद्य तेलों पर भी प्रभाव दिखने लगा है। एक हफ्ते पहले जहां पाम ऑयल का भाव 2200 रुपये प्रति 15 लीटर था, वहीं अब 2400 के करीब पहुंच गया है। जबकि, फुटकर दुकानों पर इसका भाव दस से 15 फीसदी तक बढ़ गया है। यही हाल सोयाबीन तेल का है, इसमें भी वृद्धि दर्ज की गई है। आंकड़ों के मुताबिक जिले में रोजाना 50 टन से ज्यादा खाद्य तेल की खपत होती है। सुभाषगंज व्यापार मंडल के अध्यक्ष अरुण राय का कहना है कि खाद्य तेल ब्राजील व अन्य देशों से आता है। इस पर महंगाई का असर दिख रहा है।
माचिस का कच्चा माल महंगा
माचिस बनाने में बारूद, मोम, तेल समेत अन्य ज्वलनशील पदार्थ खाड़ी देशों से आयात किए जाते हैं। इनके भाव बढ़ने से माचिस महंगी हो चली है। व्यापारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में एक रुपये वाली माचिस की लागत में ज्यादा खर्च आने से यह गायब हो सकती है। ऐसे में दो रुपये वाली माचिस ही मिलेगी। बताया गया कि जिले में हर रोज एक लाख पेटी माचिस की खपत होती है। माचिस कारोबारी पवन गुप्ता का कहना है कि सारा कच्चा माल खाड़ी देशों से आता है। कच्चे माल के भाव में वृद्धि से माचिस महंगी हो गई है।
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अमेरिका-इजराइल और ईरान में करीब तीन हफ्ते से युद्ध चल रहा है। इसके चलते घरेलू व कॉमर्शियल रसोई गैस पर साफ असर दिखाई दे रहा है। अब खाद्य तेलों पर भी प्रभाव दिखने लगा है। एक हफ्ते पहले जहां पाम ऑयल का भाव 2200 रुपये प्रति 15 लीटर था, वहीं अब 2400 के करीब पहुंच गया है। जबकि, फुटकर दुकानों पर इसका भाव दस से 15 फीसदी तक बढ़ गया है। यही हाल सोयाबीन तेल का है, इसमें भी वृद्धि दर्ज की गई है। आंकड़ों के मुताबिक जिले में रोजाना 50 टन से ज्यादा खाद्य तेल की खपत होती है। सुभाषगंज व्यापार मंडल के अध्यक्ष अरुण राय का कहना है कि खाद्य तेल ब्राजील व अन्य देशों से आता है। इस पर महंगाई का असर दिख रहा है।
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माचिस का कच्चा माल महंगा
माचिस बनाने में बारूद, मोम, तेल समेत अन्य ज्वलनशील पदार्थ खाड़ी देशों से आयात किए जाते हैं। इनके भाव बढ़ने से माचिस महंगी हो चली है। व्यापारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में एक रुपये वाली माचिस की लागत में ज्यादा खर्च आने से यह गायब हो सकती है। ऐसे में दो रुपये वाली माचिस ही मिलेगी। बताया गया कि जिले में हर रोज एक लाख पेटी माचिस की खपत होती है। माचिस कारोबारी पवन गुप्ता का कहना है कि सारा कच्चा माल खाड़ी देशों से आता है। कच्चे माल के भाव में वृद्धि से माचिस महंगी हो गई है।