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Jhansi News: तीन गांवों में चल रहा था बैंक खातों के ‘किराये का कारोबार’

Mon, 10 Aug 2026 02:19 AM IST
झांसी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी Updated Mon, 10 Aug 2026 02:19 AM IST
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The 'rental business' of bank accounts was going on in three villages.
झांसी। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) और संचार साथी पोर्टल में हॉट स्पॉट के तौर पर चिहिन्त कटेरा के तीनों गांव में 100 से भी अधिक लोगों ने अपने बैंक खाते साइबर ठगों को किराये पर दे रखे थे। देश भर में होने वाली ठगी की रकम इनमें मंगवाई जाती थी। पूछताछ में मालूम चला कि हर लेन-देन पर खाता धारक को पांच हजार रुपये मिलते थे। हर महीने 25-30 हजार रुपये तक कमाई हो जाती थी।
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पूछताछ के दौरान एक आरोपी ने पुलिस को बताया कि काडौर गांव निवासी शिवम उर्फ सत्यम ने कई लोगों के बैंक खाते किराए पर लिए हुए हैं। इनमें से तमाम खाते सत्यम ने खाता खुलवाए। खाता खुलवाने के बाद डेबिड कार्ड अपने पास रखा हुआ है। खाते में दर्ज मोबाइल नंबर भी सत्यम ने ही दर्ज करा रखा है। खाते में सिर्फ आधार नंबर एवं फोटो खाते धारक की लगी है। खाते से संबंधित हर चीज सत्यम ने अपने पास रखा हुआ है। इसी तरह राजू, नितीश और धीरेंद्र के पास भी कई खाते हैं। प्रत्येक लेन-देन पर खाते धारक को नकद पांच हजार रुपये दिए जाते थे। कुछ किए बिना इस रकम के मिलने से वह खुश थे। पुलिस के मुताबिक अधिकांश लोगों को सरकारी योजना का पैसा आने की बात कहकर बैंक खाता लेकर अपने पास रखते थे। इनमें से अधिकांश को भनक तक नहीं थी कि उनके खाते में साइबर जालसाजी की रकम मंगवाई जा रही है।
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डेबिड कार्ड के सहारे निकाले थे रकम
पुलिस के मुताबिक ठगी का पैसा बैंकों से निकालने में डेबिड कार्ड का अधिकांश तौर पर इस्तेमाल होता था। पुलिस ने मौके से 35 डेबिड कार्ड बरामद किए। इनमें पास से 29 बैंक पासबुक समेत 13 क्रेडिट कार्ड भी मिले। इनमें से एक बैंक खाते की पड़ताल करने पर मालूम चला कि इस खाते में झाबुआ (मध्य प्रदेश) और बेंगलुरु से साइबर ठगी करके लाखों रुपये मंगवाए गए। इसी तरह अन्य बैंक खातों की भी पड़ताल कराई जा रही है। सबसे अधिक धोखाधड़ी दिल्ली, गाजियाबाद, बिहार, तमिलनाडु एवं आंध्र प्रदेश के इलाकों में हुई। यहां एटीएम से रकम निकालने की जिम्मेदारी अलग-अलग लोगों के पास थी। यह रकम भी बैंक खातों के एटीएम या अन्य माध्यमों से निकाली जाती थी।
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