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Kannauj News: 43.6 डिग्री पहुंचा पारा, गर्म हवाओं ने झुलसाया
संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
Updated Tue, 21 Apr 2026 12:30 AM IST
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कन्नौज। सूरज की तपिश और लू के थपेड़ों से लोग दिनभर बेहाल रहे। सोमवार को अधिकतम तापमान 43.6 डिग्री व न्यूनतम तापमान 25.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। ऐसे में लोगों ने गर्मी से बचाव के एहतियात बरतनी शुरू कर दी।
अप्रैल में ही लोगों को मई व जून जैसी गर्मी का अहसास होने लगा है। दोपहर में चिलचिलाती धूप के साथ 16 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से चली गर्म हवाओं ने लोगों को परेशान कर दिया। लोग चेहरों को कपड़े से ढककर और छाते का सहारा लेकर ही जरूरी काम से बाहर निकलते दिखे। बाजारों में दोपहर के समय चहल-पहल भी कम देखने को मिली। शाम को सूरज अस्त होने के बाद गर्मी से कुछ राहत मिली। मौसम विभाग ने इस सप्ताह तापमान 44 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचने का अनुमान जताया है।
भीषण गर्मी के कारण जिला अस्पताल और निजी क्लीनिकों में उल्टी, दस्त, डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक के मरीजों की संख्या में अचानक इजाफा हुआ है। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि बहुत जरूरी होने पर ही दोपहर में बाहर निकलें।
मौसमी फल खाएं, ब्रांडेड चश्मे का करें प्रयोग
गर्मी के मौसम में सेहत का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. शक्ति बसु ने बताया कि गर्मी में शरीर को हाइड्रेटेड रखना सबसे महत्वपूर्ण है। दिनभर में आठ से 10 गिलास पानी, नारियल पानी, नींबू पानी, छाछ जैसे तरल पदार्थ पीए। प्यास लगने का इंतजार किए बिना थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पीते रहें। भोजन में जंक फूड से बचें। खीरा, ककड़ी, तरबूज जैसे मौसमी फल खाएं। दोपहर में धूप में निकलने से बचें। यदि बाहर जाना जरूरी हो तो चेहरा ढककर और धूप में ब्रांडेड चश्मा लगाकर निकलें।
गर्मी में इनका करें ज्यादा प्रयोग
-हल्के रंग के एवं पसीना शोषित करने वाले हल्के कॉटन के कपड़े पहनें।
धूप का चश्मा, छाता, टोपी का प्रयोग करें।
अगर खुले में काम करते हैं तो सिर, चेहरा, हाथ और पैर को गीले कपड़े से ढके रहें।
ओआरएस घोल घर में जरूर रखें।
बीमारी का अनुभव करते है तो तुरंत डॉक्टर सलाह ले घर को ठंडा रखे।
भरपूर मात्रा में पानी, नींबू पानी और ओआरएस का घोल पिएं।
खाली पेट घर से बाहर न निकलें।
यदि चक्कर आए या तेज सिरदर्द हो, तो तुरंत नजदीकी डॉक्टर से संपर्क करें।
पशु-पक्षी भी बेहाल
गर्मी का असर केवल इंसानों पर ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षियों पर भी साफ देखा जा रहा है। जलाशयों के सूखने और भीषण तपिश के कारण बेजुबान जानवर छांव और पानी की तलाश में भटकते नजर आए। ग्रामीण इलाकों में खेती-किसानी का काम भी प्रभावित हुआ है, मजदूर केवल सुबह और देर शाम को ही खेतों में काम कर पा रहे हैं।
आने वाले दो-तीन दिनों तक गर्मी से राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। तापमान में और वृद्धि हो सकती है, इससे लू का प्रकोप और गहराने की आशंका है।
डॉ. अमरेंद्र कुमार, मौसम वैज्ञानिक
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अप्रैल में ही लोगों को मई व जून जैसी गर्मी का अहसास होने लगा है। दोपहर में चिलचिलाती धूप के साथ 16 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से चली गर्म हवाओं ने लोगों को परेशान कर दिया। लोग चेहरों को कपड़े से ढककर और छाते का सहारा लेकर ही जरूरी काम से बाहर निकलते दिखे। बाजारों में दोपहर के समय चहल-पहल भी कम देखने को मिली। शाम को सूरज अस्त होने के बाद गर्मी से कुछ राहत मिली। मौसम विभाग ने इस सप्ताह तापमान 44 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचने का अनुमान जताया है।
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भीषण गर्मी के कारण जिला अस्पताल और निजी क्लीनिकों में उल्टी, दस्त, डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक के मरीजों की संख्या में अचानक इजाफा हुआ है। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि बहुत जरूरी होने पर ही दोपहर में बाहर निकलें।
मौसमी फल खाएं, ब्रांडेड चश्मे का करें प्रयोग
गर्मी के मौसम में सेहत का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. शक्ति बसु ने बताया कि गर्मी में शरीर को हाइड्रेटेड रखना सबसे महत्वपूर्ण है। दिनभर में आठ से 10 गिलास पानी, नारियल पानी, नींबू पानी, छाछ जैसे तरल पदार्थ पीए। प्यास लगने का इंतजार किए बिना थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पीते रहें। भोजन में जंक फूड से बचें। खीरा, ककड़ी, तरबूज जैसे मौसमी फल खाएं। दोपहर में धूप में निकलने से बचें। यदि बाहर जाना जरूरी हो तो चेहरा ढककर और धूप में ब्रांडेड चश्मा लगाकर निकलें।
गर्मी में इनका करें ज्यादा प्रयोग
-हल्के रंग के एवं पसीना शोषित करने वाले हल्के कॉटन के कपड़े पहनें।
धूप का चश्मा, छाता, टोपी का प्रयोग करें।
अगर खुले में काम करते हैं तो सिर, चेहरा, हाथ और पैर को गीले कपड़े से ढके रहें।
ओआरएस घोल घर में जरूर रखें।
बीमारी का अनुभव करते है तो तुरंत डॉक्टर सलाह ले घर को ठंडा रखे।
भरपूर मात्रा में पानी, नींबू पानी और ओआरएस का घोल पिएं।
खाली पेट घर से बाहर न निकलें।
यदि चक्कर आए या तेज सिरदर्द हो, तो तुरंत नजदीकी डॉक्टर से संपर्क करें।
पशु-पक्षी भी बेहाल
गर्मी का असर केवल इंसानों पर ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षियों पर भी साफ देखा जा रहा है। जलाशयों के सूखने और भीषण तपिश के कारण बेजुबान जानवर छांव और पानी की तलाश में भटकते नजर आए। ग्रामीण इलाकों में खेती-किसानी का काम भी प्रभावित हुआ है, मजदूर केवल सुबह और देर शाम को ही खेतों में काम कर पा रहे हैं।
आने वाले दो-तीन दिनों तक गर्मी से राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। तापमान में और वृद्धि हो सकती है, इससे लू का प्रकोप और गहराने की आशंका है।
डॉ. अमरेंद्र कुमार, मौसम वैज्ञानिक

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