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Kannauj News: बदले मौसम ने बढ़ाई किसानों की चिंता
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छिबरामऊ। मार्च में बार-बार बदलते मौसम ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कई दिनों से आसमान में बादलों का आना-जाना लगा हुआ है। वहीं शनिवार को तेज हवाओं के चलते तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है।
इस अस्थिर मौसम के कारण किसानों की नींद उड़ी हुई है। बारिश होने पर खेतों में खड़ी तैयार फसलों के नुकसान होने का खतरा मंडरा रहा है। इलाके के गांव पलिया के किसान शिवानंद दुबे ने बताया कि इस समय आलू की खोदाई का काम चल रहा है। इसके साथ ही गेहूं और सरसों की फसल कटाई के लिए तैयार है। ऐसे में यदि बारिश होती है या तेज हवाएं चलती हैं, तो इन फसलों को भारी नुकसान हो सकता है। गेहूं की फसल गिरने से उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है। वहीं, सरसों की फली टूटकर गिर सकती है। आलू की खोदाई में भी दिक्कतें आ सकती हैं।
अकबरपुर के किसान ज्ञानेंद्र सक्सेना, सूरजपाल, रॉबिन यादव और अखिलेश राजपूत ने अपनी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि उन्होंने पूरी मेहनत और लागत लगाकर फसल तैयार की है। लेकिन मौसम के इस बदले मिजाज ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेरने की आशंका पैदा कर दी है। यदि इस समय बारिश हो जाती है तो खेतों में पानी भरने से आलू सड़ सकता है। गेहूं की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है।
इसके अलावा मौसमी सब्जियों की पैदावार पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। तेज हवाओं और तापमान में गिरावट से सब्जियों की वृद्धि रुक सकती है। इससे बाजार में आपूर्ति घटने और दाम बढ़ने की स्थिति बन सकती है। मौसम वैज्ञानिक डॉ. अमरेंद्र कुमार ने बताया कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम का मिजाज बदल रहा है। मौसम विभाग इस पर अध्ययन कर रहा है।
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इस अस्थिर मौसम के कारण किसानों की नींद उड़ी हुई है। बारिश होने पर खेतों में खड़ी तैयार फसलों के नुकसान होने का खतरा मंडरा रहा है। इलाके के गांव पलिया के किसान शिवानंद दुबे ने बताया कि इस समय आलू की खोदाई का काम चल रहा है। इसके साथ ही गेहूं और सरसों की फसल कटाई के लिए तैयार है। ऐसे में यदि बारिश होती है या तेज हवाएं चलती हैं, तो इन फसलों को भारी नुकसान हो सकता है। गेहूं की फसल गिरने से उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है। वहीं, सरसों की फली टूटकर गिर सकती है। आलू की खोदाई में भी दिक्कतें आ सकती हैं।
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अकबरपुर के किसान ज्ञानेंद्र सक्सेना, सूरजपाल, रॉबिन यादव और अखिलेश राजपूत ने अपनी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि उन्होंने पूरी मेहनत और लागत लगाकर फसल तैयार की है। लेकिन मौसम के इस बदले मिजाज ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेरने की आशंका पैदा कर दी है। यदि इस समय बारिश हो जाती है तो खेतों में पानी भरने से आलू सड़ सकता है। गेहूं की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है।
इसके अलावा मौसमी सब्जियों की पैदावार पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। तेज हवाओं और तापमान में गिरावट से सब्जियों की वृद्धि रुक सकती है। इससे बाजार में आपूर्ति घटने और दाम बढ़ने की स्थिति बन सकती है। मौसम वैज्ञानिक डॉ. अमरेंद्र कुमार ने बताया कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम का मिजाज बदल रहा है। मौसम विभाग इस पर अध्ययन कर रहा है।