‘मौत का लाइव': वीडियो में छलका डॉक्टर का दर्द, यमुना में लगाई थी छलांग, 15 घंटे बाद शव बरामद, आरोपी गिरफ्तार
Auraiya News: एक निजी अस्पताल में कार्यरत डॉक्टर ने एसएचओ और अस्पताल संचालक पर उत्पीड़न, मारपीट और बंधक बनाने का आरोप लगाते हुए लाइव किया और फिर यमुना नदी में छलांग लगा दी। 15 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद डॉक्टर का शव बरामद कर लिया गया है।
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औरैया जिले में मोहल्ला तिलक नगर स्थित एक निजी अस्पताल में कार्यरत डॉक्टर के यमुना नदी में कूदने की घटना ने पूरे प्रशासन को झकझोर कर रख दिया है। मरने से पहले डॉक्टर द्वारा लाइव वीडियो पर लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश है।
बुधवार दोपहर यमुना नदी में छलांग लगाने से पहले डॉक्टर ने तीन-चार बार लाइव किया। इसमें उन्होंने कोतवाली के एसएचओ और अस्पताल के कर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए। डॉक्टर का कहना था कि उन्हें अस्पताल में बंधक बनाकर रखा गया।
प्रशासन की टीम ने तलाशी अभियान शुरू किया
उनके साथ मारपीट की गई और लगातार मानसिक उत्पीड़न किया गया। अपनी आपबीती सुनाते हुए उन्होंने अपनी व्यथा बयां की, जो अब वायरल हो रही है। घटना के तुरंत बाद पुलिस और प्रशासन की टीम ने तलाशी अभियान शुरू किया।
15 घंटे बाद शव बरामद
15 घंटे के लंबे संघर्ष के बाद डॉक्टर का शव यमुना नदी से बरामद कर लिया गया। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में गुस्सा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल संचालक एसके सिंह समेत अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संचालक एसके सिंह को गिरफ्तार भी कर लिया है।
ये था पूरा मामला
मोहल्ला तिलक नगर स्थित एक निजी अस्पताल में तैनात लखीमपुर के डॉक्टर ने बुधवार दोपहर यमुना नदी में छलांग लगा दी। डॉक्टर की तलाश जारी है। पुलिस के अनुसार छलांग लगाने से पहले डॉक्टर ने लाइव पर कोतवाली के एसएचओ व अस्पताल कर्मी पर उत्पीड़न, मारपीट और बंधक बनाए जाने के आरोप लगाए।
अस्पताल के एक कर्मचारी से विवाद हुआ था
लखीमपुर के थाना व कस्बा मोहम्मदी निवासी डॉ. सौरभ बाजपेयी करीब तीन साल से शहर के निजी अस्पताल में तैनात हैं। वह यहां तिलक नगर मोहल्ले में रहते हैं। पुलिस का कहना है कि बुधवार की दोपहर तीन-चार बजे के करीब वह फेसबुक लाइव पर आए। जिसमें उन्होंने बताया कि डॉक्टर का कुछ दिन पहले अस्पताल के एक कर्मचारी से विवाद हुआ था।
बंधक बनाकर उत्पीड़न किया गया
सदर कोतवाली के गांव हरिरपुर निवासी इस अस्पताल कर्मी पर उन्होंने पीटने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मारपीट के बाद जब वह कोतवाली पहुंचे, तो आरोपी व एसएचओ के सजातीय होने के कारण कोई कार्रवाई नहीं की गई। उल्टा उन्हें बंधक बना लिया गया। उसके उनका उत्पीड़न किया गया।