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Farrukhabad: एक हजार रुपये फीस जमा होने के बाद वसूली जाती मनमानी रिश्वत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद
Published by: Shikha Pandey
Updated Thu, 30 Apr 2026 11:45 PM IST
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फतेहगढ़ कोतवाली में पवन सक्सेना को ले जाते एंटी करप्शन टीम के लोग
- फोटो : अमर उजाला
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भूमि की पैमाइश कराने के लिए एक हजार रुपये प्रति गाटा फीस निर्धारित है। इसके बाद भी लेखपाल व कानूनगो किसानों से पैमाइश व मेड़ बंदी के लिए मनमानी रिश्वत वसूलते हैं। यदि यह रिश्वत न दी जाए तो गलत रिपोर्ट लगाकर भी एसडीएम कोर्ट भेज देते हैं। किसान इस परेशानी से बचने के लिए रिश्वत देना ही उचित समझता है।
किसी किसान को यदि अपने खेत या अन्य भूमि की पैमाइश करानी है तो वह सबसे पहले राजस्व परिषद के पोर्टल पर आवेदन करेगा। इसके बाद एक हजार रुपये प्रति गाटा के हिसाब से ऑन लाइन फीस जमा करनी पड़ती है। इसके बाद स्व प्रमाणित प्रति राजस्व निरीक्षक को देनी होगी। राजस्व निरीक्षक नोटिस जारी कर संबंधित सहखातेदारों को नोटिस जारी कर पैमाइश की तिथि निर्धारित कर अवगत कराया जाएगा। इसके बाद राजस्व निरीक्षक मौके पर जाकर सभी पक्षों को सुनेगा। सहमति बनने पर पैमाइश करेगा। यदि सभी पक्ष राजी नहीं होते हैं तो धारा 24 के तहत राजस्व निरीक्षक अपनी आख्या एसडीएम कोर्ट में प्रस्तुत करेगा। एसडीएम के सुनवाई के बाद आदेश जारी होगा। इस आदेश पर राजस्व निरीक्षक भूमि की पैमाइश कर पत्थरगढ़ी कराएगा।
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तीन वर्ष से सदर तहसील में डटा था कानूनगो
कानूनगो विमल श्रीवास्तव वर्ष 2023 में फतेहपुर से स्थानांतरित होकर फर्रुखाबाद आया था। तब से वह सदर तहसील में ही डटा है। वह शहर के मोहल्ला बजरिया में डॉ. पीएन सक्सेना के मकान में किराए पर रहता था। यहीं से वह अपने निजी सहयोगियों के माध्यम से पैमाइश सहित अन्य मामलों में रिश्वत लेता था। इसके चलते अक्सर सुबह से शाम तक उसके यहां किसानों का आना जाना लगा रहता था।
कानूनगो विमल श्रीवास्तव वर्ष 2023 में फतेहपुर से स्थानांतरित होकर फर्रुखाबाद आया था। तब से वह सदर तहसील में ही डटा है। वह शहर के मोहल्ला बजरिया में डॉ. पीएन सक्सेना के मकान में किराए पर रहता था। यहीं से वह अपने निजी सहयोगियों के माध्यम से पैमाइश सहित अन्य मामलों में रिश्वत लेता था। इसके चलते अक्सर सुबह से शाम तक उसके यहां किसानों का आना जाना लगा रहता था।
पांच दिन पूर्व की थी शिकायत, किसान के वेष भी पहुंचे एंटी करप्शन टीम के सदस्य
किसान सर्वेश शाक्य ने पांच दिन पूर्व कानपुर जाकर एंटी करप्शन टीम से मामले की शिकायत की थी। उसके बाद टीम के कुछ सदस्य सदर तहसील व कानूनगो के बजरिया स्थित किराए के मकान के को देखकर वापस चले गए थे। इसके बाद टीम ने कानूनगो को पकड़ने के लिए जल बिछाया। सर्वेश को रंग लगे नोट दिए गए। वह नोट दिए। बजरिया फील्ड में कार खड़ी करने पहले ही टीम के अधिकांश सदस्या सिर पर गमछा आदि बांध कर किसान का वेष बना लिया, जिससे किसी को कोई शक न हो।
किसान सर्वेश शाक्य ने पांच दिन पूर्व कानपुर जाकर एंटी करप्शन टीम से मामले की शिकायत की थी। उसके बाद टीम के कुछ सदस्य सदर तहसील व कानूनगो के बजरिया स्थित किराए के मकान के को देखकर वापस चले गए थे। इसके बाद टीम ने कानूनगो को पकड़ने के लिए जल बिछाया। सर्वेश को रंग लगे नोट दिए गए। वह नोट दिए। बजरिया फील्ड में कार खड़ी करने पहले ही टीम के अधिकांश सदस्या सिर पर गमछा आदि बांध कर किसान का वेष बना लिया, जिससे किसी को कोई शक न हो।
पवन ने सर्वेश से रुपये लेकर रख दिए थे कानूनगो के बैग में
किसान सर्वेश शाक्य से कानूनगो अपने निजी सहयोगी पवन सक्सेना के माध्यम से 40 हजार रुपये की मांग कर रहा था। रुपये न होने की बात बार-बार कहने पर 30 हजार रुपये पैमाइश कराने का भरोसा पवन ने सर्वेश को दिया था। इसके बाद सर्वेश ने पैमाइश पहले 15 हजार रुपये देने की बात कही। इस पर कानूनगो तैयार हो गया था। सर्वेश पवन के साथ ही कानूनगो के कमरे पर रुपये देने गया। वहां उसने पवन को रुपये दिए तो उसने गिनने के बाद कानूनगो के बैग में रख दिए। इसके बाद पीछे किसान के वेष में खड़े एंटी करप्शन टीम के जवान ने बैग के साथ ही कानूनगो व पवन को दबोच लिया। इसके बाद एंटी करप्शन टीम के अन्य सदस्य पहुंच गए। दोनों आरोपियों के साथ सर्वेश को भी फतेहगढ़ कोतवाली लेकर पहुंचे।
पहले बताया मुंशी बाद खुद बताया अधिवक्ता
पवन सक्सेना मूल रूप से अमृतपुर का रहने वाला है। इन दिनों परिवार के साथ अपने कादरीगेट स्थित मकान में रहता था। उसके पिता अश्वनी सक्सेना नौकरी के दौरान लंबे समय तक बीमार रहे थे। इसके चलते उनका लेखपाल का काम पवन ही देखता था। इसके चलते उसे राजस्व विभाग की अच्छी जानकारी हो गई थी। जब टीम ने उसे पकड़ा तो उसने पहले अपने को कानूनगो विमल श्रीवास्तव का मुंशी बताया। बाद में पूछताछ के दौरान टीम को खुद को अधिवक्ता बताने लगा।
किसान सर्वेश शाक्य से कानूनगो अपने निजी सहयोगी पवन सक्सेना के माध्यम से 40 हजार रुपये की मांग कर रहा था। रुपये न होने की बात बार-बार कहने पर 30 हजार रुपये पैमाइश कराने का भरोसा पवन ने सर्वेश को दिया था। इसके बाद सर्वेश ने पैमाइश पहले 15 हजार रुपये देने की बात कही। इस पर कानूनगो तैयार हो गया था। सर्वेश पवन के साथ ही कानूनगो के कमरे पर रुपये देने गया। वहां उसने पवन को रुपये दिए तो उसने गिनने के बाद कानूनगो के बैग में रख दिए। इसके बाद पीछे किसान के वेष में खड़े एंटी करप्शन टीम के जवान ने बैग के साथ ही कानूनगो व पवन को दबोच लिया। इसके बाद एंटी करप्शन टीम के अन्य सदस्य पहुंच गए। दोनों आरोपियों के साथ सर्वेश को भी फतेहगढ़ कोतवाली लेकर पहुंचे।
पहले बताया मुंशी बाद खुद बताया अधिवक्ता
पवन सक्सेना मूल रूप से अमृतपुर का रहने वाला है। इन दिनों परिवार के साथ अपने कादरीगेट स्थित मकान में रहता था। उसके पिता अश्वनी सक्सेना नौकरी के दौरान लंबे समय तक बीमार रहे थे। इसके चलते उनका लेखपाल का काम पवन ही देखता था। इसके चलते उसे राजस्व विभाग की अच्छी जानकारी हो गई थी। जब टीम ने उसे पकड़ा तो उसने पहले अपने को कानूनगो विमल श्रीवास्तव का मुंशी बताया। बाद में पूछताछ के दौरान टीम को खुद को अधिवक्ता बताने लगा।
