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Kanpur News: कानपुर देहात के पानी में जहरीले तत्वों की स्थिति परखेगी जीएसवीएम की टीम
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Fri, 30 Jan 2026 02:15 AM IST
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कानपुर। अब पूरे कानपुर के पानी की गुणवत्ता की जांच की जाएगी। इसके अलावा कानपुर देहात और फतेहपुर में भी पानी में भारी धातुओं और जहरीले तत्वों की स्थिति परखी जाएगी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देश पर गठित जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की कमेटी ने पानी की जांच के दूसरे चरण के लिए गाइडलाइन जारी कर दी है। पहले चरण में इन जिलों के प्रभावित क्षेत्रों की जांच की गई थी। इसमें लोगों के ब्लड सैंपल लिए गए जिनमें भारी धातुओं की पुष्टि हुई थी।
मेडिकल कॉलेज की कमेटी के अध्यक्ष मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. बीपी प्रियदर्शी ने बताया कि तीनों जनपद क्षेत्रों के पानी की जांच के लिए कहा गया है। उन्होंने बताया कि दूसरे चरण की गाइडलाइन में जिलों के जल की स्थिति का सर्वे किया जाएगा। शिविरों का आयोजन भी किया जाएगा। अलग-अलग मोहल्लों में पानी की सैंपलिंग होगी। शिविरों में आने वाले लोगों का भी ब्लड सैंपल लिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इसमें देखा जाएगा कि पानी में भारी धातुओं की क्या स्थिति है। धातु तत्वों की मात्रा मानक के अनुरूप है या फिर अधिक है। इसके बाद लोगों के ब्लड सैंपल की जांच करके देखा जाएगा कि खून में इन तत्वों की कितनी मात्रा है। गाइडलाइन संंबंधी ड्राफ्ट इन जिलों के मुख्य चिकित्साधिकारियों को दे दिया गया है। पहले चरण में शहर के राखी मंडी, जाजमऊ आदि इलाकों का सर्वे किया गया था। कानपुर देहात में रनियां क्षेत्र और फतेहपुर के कुछ क्षेत्रों का सर्वे हुआ है। मुख्य चिकित्साधिकारी और जलकल विभाग की टीमों को सैंपलिंग और सर्वे की जिम्मेदारी दी गई है। कॉलेज की कमेटी अभियान की रूपरेखा बताती है।
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इन धातुओं से हो सकतीं हैं ये बीमारियां
पहले चरण के सर्वे में पानी में कॉपर, आर्सेनिक, मरकरी आदि हैवी मेटल्स मिले हैं। पानी में इन धातु तत्वों की अधिकता होने पर व्यक्ति को कैंसर भी हो सकता है। त्वचा रोग, हृदय की बीमारियां, लिवर रोग, गुर्दों की भी खराबी हो सकती है। साथ ही आंतों, खाने की थैली, स्टमक वॉल आदि में दिक्कत आ सकती है।
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मेडिकल कॉलेज की कमेटी के अध्यक्ष मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. बीपी प्रियदर्शी ने बताया कि तीनों जनपद क्षेत्रों के पानी की जांच के लिए कहा गया है। उन्होंने बताया कि दूसरे चरण की गाइडलाइन में जिलों के जल की स्थिति का सर्वे किया जाएगा। शिविरों का आयोजन भी किया जाएगा। अलग-अलग मोहल्लों में पानी की सैंपलिंग होगी। शिविरों में आने वाले लोगों का भी ब्लड सैंपल लिया जाएगा।
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उन्होंने बताया कि इसमें देखा जाएगा कि पानी में भारी धातुओं की क्या स्थिति है। धातु तत्वों की मात्रा मानक के अनुरूप है या फिर अधिक है। इसके बाद लोगों के ब्लड सैंपल की जांच करके देखा जाएगा कि खून में इन तत्वों की कितनी मात्रा है। गाइडलाइन संंबंधी ड्राफ्ट इन जिलों के मुख्य चिकित्साधिकारियों को दे दिया गया है। पहले चरण में शहर के राखी मंडी, जाजमऊ आदि इलाकों का सर्वे किया गया था। कानपुर देहात में रनियां क्षेत्र और फतेहपुर के कुछ क्षेत्रों का सर्वे हुआ है। मुख्य चिकित्साधिकारी और जलकल विभाग की टीमों को सैंपलिंग और सर्वे की जिम्मेदारी दी गई है। कॉलेज की कमेटी अभियान की रूपरेखा बताती है।
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इन धातुओं से हो सकतीं हैं ये बीमारियां
पहले चरण के सर्वे में पानी में कॉपर, आर्सेनिक, मरकरी आदि हैवी मेटल्स मिले हैं। पानी में इन धातु तत्वों की अधिकता होने पर व्यक्ति को कैंसर भी हो सकता है। त्वचा रोग, हृदय की बीमारियां, लिवर रोग, गुर्दों की भी खराबी हो सकती है। साथ ही आंतों, खाने की थैली, स्टमक वॉल आदि में दिक्कत आ सकती है।
