बर्न वार्ड: शासन ने स्वीकृत नहीं किया स्टाफ, उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं, फरवरी में शुरू करने का दावा
Kanpur News: जीएसवीएम प्राचार्य ने फरवरी तक बर्न वार्ड चालू करने की बात कही है, लेकिन स्टाफ की कमी और उपकरणों की अनुपलब्धता से इस लक्ष्य को पूरा करना मुश्किल नजर आ रहा है।
विस्तार
कानपुर में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने दावा किया है कि फरवरी तक हैलट बर्न वार्ड चालू कर दिया जाएगा। हालांकि अभी यह दूर की कौड़ी लग रहा है क्योंकि स्टाफ तक शासन ने स्वीकृत नहीं किया है। इसके अलावा ओटी और आईसीयू के उपकरण तक नहीं आए हैं। हैलट के बर्न वार्ड की दीवारों की साफ-सफाई शुरू कर दी गई है। प्राचार्य का कहना है कि रोगी कल्याण समिति और दूसरे मद से भवन में जो कमियां रह गई हैं, उसे पूरा करवा लेंगे।
इसके साथ दी किसी दानदाता की मदद ले लेंगे। बता दें कि अस्पताल के बर्न वार्ड को प्लास्टिक सर्जरी विभाग के रूप में स्थापित किया जाना है। सर्जरी विभाग के पास इस समय दो प्लास्टिक सर्जन भी हैं, लेकिन इसके लिए स्टाफ की जरूरत है, जो अभी तक शासन ने स्वीकृत नहीं किया है। इसमें डॉक्टर, स्टाफ नर्स, पैरा मेडिकल स्टाफ मिला कर 95 लोग हैं। इनमें लगभग आधा स्टाफ आउटसोर्सिंग का रहेगा।
स्टाफ की अभी तक तैनाती नहीं की
शासन ने अभी तक आउटसोर्स के स्टाफ की नियुक्ति के संबंध में मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को अनुमति नहीं दी है। जब तक स्टाफ नहीं आएगा, बर्न वार्ड पूरी तरह चालू नहीं किया जा सकता। हैलट के स्टाफ से इसे फौरी तौर पर शुरू जरूर किया जा सकता है। इसके साथ ही प्रशिक्षित डॉक्टरों और नर्स स्टाफ की भी जरूरत रहेगी। शासन ने स्टाफ को मंजूरी दे दी, लेकिन अभी तक तैनाती नहीं की है। इसकी प्रक्रिया पूरी होने में कितना वक्त लगेगा, अभी यह भी तय नहीं है। सबसे अहम बात उपकरणों की है।
अभी तक बर्न वार्ड के उपकरण भी नहीं आए हैं। बर्न वार्ड में रोगियों के लिए अलग विशिष्ट आईसीयू की भी व्यवस्था है। इसके लिए आईसीयू से संबंधित उपकरणों की भी जरूरत होगी। इसके साथ ओटी के उपकरण भी अलग से आएंगे। इनकी उपलब्धता कब तक सुनिश्चित हो पाएगी। यह भी तय नहीं हो पाया है। इस वर्ष में यह सब संभव हो पाएगा कि नहीं यह सवाल अब भी बना हुआ है। प्राचार्य डॉ. काला का कहना है कि वह स्टाफ की नियुक्तियों और उपकरणों के लिए कोशिश कर रहे हैं।
- प्राचार्य डॉ. संजय काला भरपूर प्रयास में जुटे हैं।
- प्रस्ताव शासन को भेजे जा चुके हैं।
- शासन स्तर से बर्न वार्ड जल्दी शुरू करने के लिए कहा गया है।
- कॉलेज प्रबंधन ने अपने स्तर से काम शुरू करा दिया है।
- दो प्लास्टिक सर्जन पहले से कॉलेज के पास हैं।
इस वजह से भरोसा नहीं होता
- बर्न वार्ड के बुनियादी काम बाकी हैं।
- सबसे जरूरी बिजली की व्यवस्था नहीं।
- स्टाफ स्वीकृत हुआ लेकिन नियुक्तियां नहीं हुईं।
- इसमें कितना वक्त लगेगा, कोई सीमा तय नहीं है।
- उपकरणों की व्यवस्था नहीं है।
