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कानपुर: 400 साल पुराना है शुक्लागंज का दुर्गा मंदिर, भक्तों पर बरसती है कृपा, ये है प्रतिमा चोरी की कहानी

Sun, 18 Oct 2026 01:16 PM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Himanshu Awasthi Updated Sun, 18 Oct 2026 01:16 PM IST
सार

Kanpur News: शुक्लागंज स्थित 400 साल पुराने प्राचीन मां दुर्गा मंदिर का इतिहास बेहद गौरवशाली और आस्था से जुड़ा है। किंवदंतियों के अनुसार, प्राचीन काल में यहां मां की स्वर्ण प्रतिमा स्थापित थी, जो चोरी हो गई थी। इसके बाद वर्ष 1953 में महाराष्ट्र के संत मदन केशव राव आमडेकर (गुरुजी) ने मां के आदेश पर यहां पुनः प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना शुरू की।

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Kanpur Durga temple in Shuklaganj is 400 years old it bestows blessings upon devotees
माता की पुरानी प्रतिमा, वर्तमान में स्थापित प्रतिमा और अध्यक्ष आदित्य सिंह - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर में शुक्लागंज स्थित मां दुर्गा मंदिर का इतिहास करीब 400 वर्ष पुराना बताया जाता है। मान्यता है कि प्राचीन समय में मठ के भीतर मां की स्वर्ण प्रतिमा स्थापित थी जो चोरी हो गई। इसके बाद वर्ष 1953 में आयुध निर्माणी जबलपुर में कार्यरत संत मदन केशव राव आमडेकर (गुरुजी) का तबादला कानपुर हुआ। मां के अनन्य भक्त महाराष्ट्र के ब्राह्मण परिवार में जन्मे गुरुजी ने यहां मूर्ति विहीन मठ देखा और जानकारी जुटाई।

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मान्यता है कि मां के आदेश पर उन्होंने छोटी प्रतिमा स्थापित कराकर पूजा-अर्चना शुरू की। मंदिर गंगा किनारे स्थित होने के कारण पहले बाढ़ के दौरान यहां तक लहरें माता की प्रतिमा का स्पर्श करने आती थीं। यहां गुरुजी श्रद्धालुओं की समस्याएं सुनते और उन्हें मां के दरबार में प्रार्थना करने की प्रेरणा देते थे। धीरे-धीरे भक्तों की संख्या बढ़ी और वर्ष 1965 में भक्तों के आग्रह पर मां की बड़ी प्रतिमा स्थापित कराई गई।

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हरि ओम तत्सत का होता है जाप
प्रतिमा के दाईं ओर गणेश जी और बाईं ओर गायत्री माता विराजमान हैं। वर्ष 1972 में दुर्गा मंदिर सेवा समिति का गठन हुआ। गणेश शंकर बाजपेयी इसके प्रथम अध्यक्ष बने। मंदिर में प्रतिदिन सुबह पांच बजे हवन और आरती होती है। नवरात्र में दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है। प्रत्येक शनिवार की शाम आरती के बाद रात से लेकर सुबह तक यहां हरि ओम तत्सत का जाप होता है।

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साड़ी और सुहाग का चढ़ाते हैं सामान
गुरुजी पांच सितंबर 1983 को ब्रह्मलीन हो गए। स्थानीय लोगों के अनुसार पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी 1978 में चुनाव प्रचार के दौरान मां के दर्शन करने आई थीं। इसके बाद वर्ष 1980 में वह दोबारा प्रधानमंत्री बनीं। मन्नत पूरी होने पर यहां श्रद्धालु मां को साड़ी और सुहाग का सामान चढ़ाते हैं, जिसे करवा चौथ से पहले सुहागिन महिलाओं में वितरित किया जाता है।

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भक्त ही करते हैं मंदिर की सेवा
मंदिर समिति के अध्यक्ष आदित्य सिंह ने बताया कि मंदिर के निर्माण में केवल राजमिस्त्री लगाया गया था जबकि बाकी काम भक्तों ने श्रमदान से किया। आज भी यही परंपरा जारी है। केवल मुख्य पुजारी आचार्य विनोद पांडेय को वेतन दिया जाता है। अन्य सभी भक्त श्रद्धाभाव से सेवा करते हैं। मंदिर में हर व्यक्ति सेवादार है। मंदिर के पीछे गुरुजी की प्रतिमा भी स्थापित है।

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