Kanpur: बेकनगंज में छापकर ब्रिटेन तक भेज रहे थे फर्जी मार्कशीट, 10 हजार में छापकर देते थे डिग्री, ऐसे खुला खेल
Kanpur News: कानपुर पुलिस ने बेकनगंज में 13 साल से चल रहे अंतरराष्ट्रीय फर्जी डिग्री रैकेट का भंडाफोड़ कर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह देश-विदेश में कूरियर और ऑनलाइन पीडीएफ के जरिए जाली डिग्रियां बेचता था और क्रेडिबिलिटी के लिए नकली वेबसाइट्स भी चला रहा था।
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कानपुर में फर्जी मार्कशीट और डिग्री बेचने वाला गिरोह देशभर में फर्जी डिग्रियां और मार्कशीट कूरियर के जरिये भेजता है। वहीं, विदेशों में इनकी पीडीएफ कॉपी ऑनलाइन पहुंचाई जाती है। वहां गिरोह के लोग इसे खास कागज पर प्रिंटकर ग्राहक को सौंप देते थे। गिरोह की जड़ें हैदराबाद से नोएडा और शहर से कनाडा तक फैली हैं। जांच का दायरा कानपुर, नोएडा, हैदराबाद से लेकर ब्रिटेन तक पहुंच गया है। इससे पहले जेल भेजे गए मनीष, राघव, विनीत जैसे शातिरों के तार हैदराबाद, दिल्ली और नोएडा से जुड़े थे।
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि गिरोह का सदस्य जियाउल हसन विभिन्न विश्वविद्यालयों व बोर्डों की मार्कशीट, डिग्री और अन्य शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की हूबहू डिजाइन तैयार करता था। यह काला कारोबार स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं था बल्कि अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के रूप में संचालित हो रहा था। आरोपियों ने बताया कि कनाडा और लंदन में उनके कुछ साथी हैं जिन्हें पहले से इस काम में इस्तेमाल होने वाले खास कागज को उपलब्ध करा रखा है।
2014 से लेकर अब तक का रिकाॅर्ड मिला
सिर्फ पीडीएफ बनाकर भेजी जाती है, जिसे वहां प्रिंट कर ग्राहक को मुहैया करा देते हैं। वहीं, शहर में प्रिंट हुईं फर्जी मार्कशीटों और डिग्रियों को देशभर में कूरियर के माध्यम से पहुंचा जाता था। पुलिस को कूरियर कंपनी की जांच में 2014 से लेकर अब तक इनके द्वारा दस्तावेज भेजे जाने का रिकाॅर्ड मिला है। वहीं, पुलिस ने अपने सामने छपाई कारखाने में शातिरों से हाईस्कूल से लेकर पीएचडी तक की मार्कशीटें व डिग्रियां छपवाकर देखीं। इसकी वीडियोग्राफी भी करवाई गई।
हुनरमंद बताने के लिए चाहिए होता प्रमाणपत्र
हसन ने बताया कि वह तीन बार विदेश यात्रा कर चुका है। वहां नौकरी पाने के लिए कुशल कारीगर होने के प्रमाणपत्र की आवश्यकता होती है। ऐसे में उसने कूटरचित मार्कशीट और डिग्री तैयार कर बेचना शुरू कर दिया। वह अब तक हजारों डिग्री मार्कशीट बेच चुका है। उसने कबूला कि वह सउदी अरब, कनाडा, ब्रिटेन जैसे देशों में फर्जी मार्कशीट और डिग्री बेच चुका है। वह लंदन में अपना नेटवर्क फैलाना चाहता था। इसके लिए वहां का सिम इस्तेमाल करता था।
सत्यापन की गारंटी को बनाईं नकली वेबसाइट
आरोपियों ने पुलिस की पूछताछ में बताया कि वह सिर्फ मार्कशीट और डिग्री ही नहीं देते बल्कि इनके सत्यापन की भी पूरी गारंटी लेते थे। इसके लिए उन्होंने संबंधित विश्वविद्यालयों की नकली वेबसाइटें तक बना रखी हैं। ग्राहक को भरोसा दिलाने के लिए इस पर सत्यापन करके दिखाया जाता था। इन वेबसाइटों के नाम संबंधित वेबसाइटों के नाम से मिलते जुलते रखे गए थे। हसन को हैदराबाद एसटीएफ ने 2016 में फर्जी मार्कशीट-डिग्री मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
ये है पूरा मामला
फर्जी मार्कशीट और डिग्री बनाने वाले गिरोह की जांच में जुटी पुलिस ने बेकनगंज इलाके में संचालित फर्जी मार्कशीट छपाई कारखाने का खुलासा किया। यहां विभिन्न विश्वविद्यालयों और बोर्डों की फर्जी मार्कशीटें व डिग्रियां छापकर देश के कई राज्यों के साथ ही ब्रिटेन तक भेजी जा रहीं थीं। आरोपी पहले पकड़े गए किदवईनगर वाले गिरोह को भी फर्जी मार्कशीट व डिग्रियां छापकर सप्लाई करते थे।
ग्राफिक्स डिजाइन में माहिर हैं आरोपी
उनके बैंक खातों की जांच से इस छपाई कारखाने का सुराग लगा। इसके बाद बेकनगंज पुलिस ने छापा मारकर चार अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया है। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि पकड़े गए आरोपियों में हीरामन का पुरवा निवासी जियाउल हसन उर्फ समीर, नूरउद्दीन, हसन आसिफ और आमिर अहमद शामिल हैं। जियाउल हसन बीबीए पास है और ग्राफिक्स डिजाइन में माहिर है।
ये सामान हुआ बरामद
वह मांग के अनुरूप हाईस्कूल की मार्कशीट से लेकर डॉक्टरेट की डिग्री तक डिजाइन कर छापता है। पुलिस ने उनके कब्जे से दस्तावेज तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले दो लैपटॉप, कंप्यूटर, प्रिंटर, विश्वविद्यालयों की 141 मुहरें, मोनोग्राम और छपाई वाले 830 पेपर बरामद किए हैं। साथ ही आठ विश्वविद्यालयों की 62 तैयार मार्कशीट व डिग्री आदि बरामद की हैं। आरोपियों में आमिर दादानगर स्थित निजी आईटीआई में टेक्नीशियन है।
10 हजार में छापकर देते थे एक डिग्री
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि जेल भेजे गए शैलेंद्र ओझा, मनीष और राघव के बैंक खातों की जांच की गई। इनके खातों से आमिर के खातों में लेन-देन के साक्ष्य मिले थे। जियाउल हसन के खाते में 40 लाख और आमिर के खाते में एक करोड़ से ज्यादा का लेनदेन हुआ है। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वह शैलेंद्र और उसके साथियों की मांग के अनुरूप डिग्री तैयार करते थे। प्रति डिग्री 10 हजार रुपये में छापकर दी जाती थी। कबूला की वह 13 वर्षों से इस काले कारोबार में शामिल हैं।
खुद नकली डिग्री के बूते लंदन में पाया काम
हसन दो बार लंदन रहकर लौटा है। वह पहली बार सात और दूसरी बार छह माह के लिए गया था। इससे पहले वह वर्ष 2022 में सउदी अरब रहकर आया है। उसे लंदन में काम पाने के लिए हुनरमंद होने का सर्टिफिकेट चाहिए था इसलिए वह अपनी बीएससी नर्सिंग की जाली डिग्री बनाकर ले गया था। उसने वहां डिपार्टमेंटल स्टोर पर काम किया था।
पहले 10 अब चार आरोपी भेजे गए जेल
पुलिस कमिश्नरी की संयुक्त टीम, एसआईटी और साइबर सेल की कार्रवाई में अब तक इस मामले में 14 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। सबसे पहले 18 फरवरी को किदवईनगर पुलिस ने जूही गोशाला स्थित कार्यालय में छापा मारकर शैलेंद्र ओझा और उसके तीन साथियों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद छह अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया। हसन ने सभी आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अपने पुराने मोबाइल तोड़ दिए थे।