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Kanpur: उर्सला अस्पताल खुद ‘एनीमिक’; ब्लड बैंक में ए और ओ पॉजिटिव का स्टॉक शून्य, मरीज दर-दर भटकने को मजबूर

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Himanshu Awasthi Updated Wed, 10 Jun 2026 11:33 AM IST
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सार

Kanpur News: कानपुर के उर्सला अस्पताल में ‘ए’ और ‘ओ’ पॉजिटिव ब्लड का स्टॉक खत्म होने से मरीजों को काफी परेशानी हो रही है। डेढ़ महीने से रक्तदान शिविर न लगने के कारण मरीज दलालों और प्राइवेट ब्लड बैंकों पर आश्रित हैं। 

Kanpur Ursula Hospital itself anaemic  blood bank stocks of Apositive and O positive are zero
उर्सला अस्पताल - फोटो : amar ujala
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विस्तार

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  • केस-1: उर्सला अस्पताल में भर्ती एक रोगी का अपेंडिक्स का ऑपरेशन होना था। ओ पॉजिटिव ब्लड की जरूरत थी। मंगलवार को जब परिजन फैजान ब्लड लेने पहुंचा तो ब्लड न होने की बात कहकर उसे वापस कर दिया। फैजान ने बताया कि कर्मचारी कह रहे हैं कि अभी नहीं मिलेगा।
  • केस-2: उर्सला के पीडियाट्रिक विभाग में भर्ती एक बच्ची को बी पॉजिटिव रक्त की जरूरत थी। परिजन समी ने बताया कि तीन दिन से अस्पताल में उसके लिए ब्लड लेने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन नहीं मिला। आज चौथे दिन मिला है जबकि हमारे पास डोनर भी थे।
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  • केस-3: उन्नाव निवासी सौरभ सिंह ने बताया कि उनका रोगी उन्नाव में भर्ती है और उसको ब्लड की जरूरत पड़ी तो कहीं भी ब्लड नहीं मिला। उर्सला आए तो यहां भी मना कर दिया है। अब हैलट जाएंगे, शायद वहां मिल जाए।
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खून की कमी की वजह से मंडल के सबसे बड़ा जिला अस्पताल उर्सला ही एनीमिक हो गया है। यहां पर इस समय ए और ओ पॉजिटिव ब्लड ग्रुप का स्टॉक पूरी तरह शून्य हो चुका है। इसके बावजूद अस्पताल के अफसरों ने बीते डेढ़ माह से खून एकत्र करने के लिए एक भी शिविर का आयोजन नहीं किया है। इस कारण अस्पताल में भर्ती और आसपास के जिलों से आने वाले रोगियों को खून नहीं मिल पा रहा है।
अस्पताल में रोजाना आठ से 10 गंभीर रोगी ब्लड बैंक के चक्कर काटने के बाद बिना खून लिए ही लौटने पर मजबूर हैं। अस्पताल के वार्डों और आईसीयू में भर्ती रोगियों को भी एक यूनिट ब्लड के लिए दो से चार दिन का इंतजार करना पड़ रहा है जिससे उनकी हालत और बिगड़ती जा रही है। तीमारदारों को मजबूरन दलालों या महंगे प्राइवेट ब्लड बैंकों का रुख करना पड़ रहा है। गर्मियों में अक्सर ब्लड बैंकों में रक्त की कमी हो जाती है।

रक्त की कमी अप्रैल से शुरू हो गई थी
अप्रैल में हैलट में ब्लड की कमी हुई] तो अस्पताल प्रशासन ने आननफानन शिविर लगाया तो मेडिकल छात्रों ने बढ़-चढ़कर रक्तदान किया पर उर्सला के अफसरों ने ऐसा नहीं किया। यहां रक्त की कमी अप्रैल से शुरू हो गई थी। अप्रैल की शुरुआत में संस्था ने दो कैंप लगाए लेकिन इसके बाद से अभी तक एक भी कैंप नहीं लगा। ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. रिचा ने बताया कि मई में कोई रक्तदान शिविर नहीं लगा। अब जून में शिविर आयोजित करेंगे।

हैलट में भी खून की किल्लत
हैलट में भी इन दिनों खून की किल्लत है। दो दिनों से यहां भी ए पॉजिटिव ब्लड नहीं था, रोगियों को लौटाया जा रहा था। ऐसे में प्राचार्य डॉ. संजय काला के निर्देश पर रक्तदानियों से अपील की गई कि आगे बढ़ें और रक्तदान करें। ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. लुबना खान ने बताया कि हमारी अपील के बाद कुछ ए पॉजिटिव लोगों ने रक्तदान किया, अब हम रोगियों के लिए खून की व्यवस्था कर पा रहे हैं।

ब्लड बैंक में ब्लड की कमी इन दिनों काफी है। इसे दूर करने के लिए अब हम अपने संस्थान से ही शुरुआत कर रहे हैं। 14 जून को हम कैंप लगाएंगे और लोगों से अपील करेंगे कि वे आकर रक्तदान करें।  -डॉ. सीमा, निदेशक उर्सला

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