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Kanpur: 34 वार्डों का भू-सतह तापमान 40 पार, 8.7 लाख लोग प्रभावित, निगम का ‘कूल प्लान’ तैयार, पढ़ें पूरी रिपोर्ट

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Himanshu Awasthi Updated Wed, 10 Jun 2026 11:01 AM IST
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सार

Kanpur News: कानपुर नगर निगम ने बढ़ते तापमान और हीट आइलैंड इफेक्ट को देखते हुए 2026-2028 की ग्रीष्म अनुकूलन कार्ययोजना लागू की है। पहले चरण में 12 सबसे गर्म वार्डों में छतों पर सफेद रिफ्लेक्टिव कोटिंग और बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया जाएगा।

Kanpur Surface temperature in 34 wards crosses 40°C affecting 8.7 lakh people nagar nigam Cool Plan ready
40 डिग्री के पार पहुंचा 34 वार्डों का पारा - फोटो : amar ujala
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विस्तार

कानपुर में नगर निगम के 106 वार्डों में से 34 सबसे गर्म पाए गए हैं, जहां लगभग 8.7 लाख लोग गर्मी से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। मौसम विभाग के उपग्रह से मिली रिपोर्ट के अनुसार इन वार्डों में भू-सतह तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक पाया गया है। श्यामनगर, सुजातगंज और ओमपुरवा जैसे क्षेत्रों में यह 43.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है। रिपोर्ट के अनुसार इन इलाकों में कंक्रीट निर्माण, हरियाली की कमी और अनियोजित शहरीकरण के कारण हीट आइलैंड इफेक्ट बढ़ रहा है।

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इसी स्थिति को देखते हुए नगर निगम ने 2026 से 2028 तक दो वर्षीय ग्रीष्म अनुकूलन कार्ययोजना शुरू करने का निर्णय लिया है। इसका मुख्य उद्देश्य इन चिह्नित वार्डों में भू-सतह तापमान को कम करना और गर्मी से राहत के स्थायी उपाय विकसित करना है। नगर निगम ने पहले चरण में 34 में से 12 सबसे गर्म और घनी आबादी वाले वार्डों को प्राथमिकता में रखा है। इसके बाद दूसरे वर्ष में योजना का विस्तार सभी 34 वार्डों तक किया जाएगा।

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क्या है ग्रीष्म अनुकूलन कार्ययोजना
कार्ययोजना के तहत भू-सतह तापमान को कम करने के लिए कई ठोस उपाय किए जाएंगे। इसके तहत पहले चरण में घरों, स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों पर परावर्तक (रिफ्लेक्टिव) सफेद कोटिंग करने का अभियान चलाया जाएगा। इसके अलावा सार्वजनिक शीतलता केंद्रों की स्थापना, बाजारों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में मुफ्त पेयजल व्यवस्था, गर्मी से बचाव के लिए शुरुआती चेतावनी प्रणाली को सक्रिय करना और मानसून से पहले स्थानीय प्रजातियों के पौधों का बड़े पैमाने पर रोपण करने का काम होगा। अस्पतालों को गर्मी से होने वाली बीमारियों के इलाज के लिए तैयार किया जाएगा।

परावर्तक छतें होंगी अनिवार्य, निर्माण नियमों में होगा बदलाव
दूसरे चरण में पूरे 34 वार्डों में परावर्तक छत कार्यक्रम का विस्तार किया जाएगा। इसके तहत कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) भवन निर्माण की स्वीकृतियों में रिफ्लेक्टिव रूफिंग को अनिवार्य करेगा। खाली भूखंडों और जल निकायों के किनारे हरित क्षेत्र विकसित किए जाएंगे। श्रमिकों के लिए काम के घंटों में बदलाव और कार्यस्थलों पर छाया व पानी का प्रावधान किया जाएगा। नगर निगम का मानना है कि सफेद कोटिंग और हरियाली बढ़ाने से भू-सतह तापमान में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।

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सबसे गर्म इन वार्डों में पहले शुरू होगा काम
वार्ड-74 श्याम नगर–सुजातगंज, वार्ड-29 ओमपुरवा, वार्ड-93 गोविंदनगर नार्थ, वार्ड-24 कृष्ण नगर, वार्ड-28 हरजिंदर नगर, वार्ड-47 देहली सुजानपुर व केडीए कॉलोनी, वार्ड-89 कोपरगंज, वार्ड-88 बसंत विहार, वार्ड-14 सब्जी मंडी किदवई नगर, वार्ड-66 नौबस्ता वेस्ट, वार्ड-105 बाबूपुरवा और वार्ड-92 किदवई नगर साउथ।

कई वार्डों में हरियाली की जगह कंक्रीट संरचनाएं बढ़ रही हैं जिससे यह क्षेत्र हीट आइलैंड में बदलते जा रहे हैं। पक्की सड़कें और मानकविहीन फुटपाथ गर्मी को और बढ़ा रहे हैं तथा रात के तापमान में भी गिरावट नहीं हो रही।  -एसएन सुनील पांडे, मौसम वैज्ञानिक

गोविंदनगर जैसे वार्ड का अत्यधिक गर्म श्रेणी में आना चिंता का विषय है। नगर निगम चावला मार्केट, धर्म कांटे और नटराज जैसे स्थानों पर टेंट लगाकर कूलर और ठंडे पानी की व्यवस्था करेगा। पानी का छिड़काव और छाया की सुविधा भी की जाएगी। लोगों से घरों के बाहर एक-एक पौधा लगाने की अपील भी की जाएगी।  -नवीन पंडित, भाजपा पार्षद दल नेता

कार्ययोजना के तहत इन वार्डों के स्लम क्षेत्रों और सरकारी भवनों पर सफेद पेंटिंग, व्यापक पौधरोपण और हरित क्षेत्र विकसित करने की योजना लागू की जाएगी जिससे भू-सतह तापमान में कमी लाई जा सके।  -अर्पित उपाध्याय, नगर आयुक्त

12 बजे के बजाय अब साढ़े 10 बजे पारा पहुंच रहा 40 पार
वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक डॉ. एसएन सुनील पांडेय ने बताया कि चार साल पहले दोपहर 12 बजे के बाद ही पारा 40 डिग्री के पार जाता था पर वर्तमान में सुबह साढ़े 10 बजे ही 40 डिग्री पर पहुंच जा रहा है। उनका कहना है कि शहर भर में पक्के निर्माण बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में गर्मी जमीन पर पहुंचती है पर वापस वायुमंडल में नहीं जा पा रही। इस कारण सुबह से ही तपिश महसूस होने लगती है। उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज से विष्णपुरी, आचार्यनगर, सीएसए और गंगा बैराज में शहर के अन्य इलाकों की तुलना में तापमान दो से तीन डिग्री कम रहता है। पक्के निर्माणों की कमी और वन्य क्षेत्र अधिक होने के कारण तापमान में यह अंतर रहता है।

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