Kanpur: स्टेप-एचबीटीआई सोसाइटी में 30 करोड़ की अनियमितता, ईओडब्ल्यू ने शुरू की आपराधिक जांच, एफआईआर दर्ज
Kanpur STEP-HBTI Scam: एचबीटीयू स्थित स्टेप-एचबीटीआई सोसाइटी में 30 करोड़ रुपये के सरकारी धन की अनियमितता के मामले में ईओडब्ल्यू ने तत्कालीन निदेशक प्रो. राकेश कुमार त्रिवेदी और वरिष्ठ प्रबंधक गोपाल मेहरोत्रा के खिलाफ धारा 409 के तहत रिपोर्ट दर्ज की है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कानपुर के हरकोर्ट बटलर तकनीकी विश्वविद्यालय (एचबीटीयू) परिसर में संचालित स्टेप-एचबीटीआई सोसाइटी में करीब 30 करोड़ रुपये के सरकारी धन की अनियमितता का मामला अब आपराधिक जांच के दायरे में आ गया है। आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) की लंबी जांच के बाद प्रदेश सरकार ने तत्कालीन निदेशक प्रो. राकेश कुमार त्रिवेदी और तत्कालीन वरिष्ठ प्रबंधक गोपाल मेहरोत्रा के खिलाफ आपराधिक विश्वासघात के आरोप में रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश दिया है।
ईओडब्ल्यू ने रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। ईओडब्ल्यू के इंस्पेक्टर राघवेंद्र कुमार सिंह की तहरीर के अनुसार 23 अप्रैल 2010 से 11 जून 2017 के बीच प्रो. राकेश कुमार त्रिवेदी स्टेप-एचबीटीआई के निदेशक, सदस्य सचिव और समन्वयक थे। उस दौरान संस्था को विभिन्न योजनाओं के लिए शासन से लगभग 30 करोड़ रुपये मिले थे। आरोप है कि शासन से मिली धनराशि का उपयोग निर्धारित नियमों के अनुसार नहीं किया गया। खर्च से जुड़े कई महत्वपूर्ण रिकॉर्ड और मूल दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं कराए गए।
चार फरवरी 2026 को ईओडब्ल्यू की संस्तुति स्वीकार की
जांच के दौरान मिले दस्तावेजों, अभिलेखों और संबंधित लोगों के बयान के आधार पर प्रो. राकेश कुमार त्रिवेदी और गोपाल मेहरोत्रा की भूमिका प्रथमदृष्टया संदिग्ध पाई गई। इसी आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर आगे की आपराधिक जांच शुरू करने की संस्तुति की गई। ईओडब्ल्यू ने अपनी अंतिम प्रगति आख्या 10 दिसंबर 2025 को शासन को भेजी थी। रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद गृह (गोपन) अनुभाग के अनुसचिव ने चार फरवरी 2026 को ईओडब्ल्यू की संस्तुति स्वीकार की। इसके बाद दोनों अधिकारियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 409 के तहत रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिया।
प्रो. पाठक की शिकायत, जांच में मिलीं अनियमितताएं
एकेटीयू का कुलपति रहने के दौरान प्रो. विनय कुमार पाठक को एचबीटीयू के कुलपति का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। वह स्टेप-एचबीटीआई के तत्कालीन चेयरमैन भी थे। प्रो. विनय कुमार पाठक और अन्य ने 30 करोड़ रुपये की धनराशि का दुरुपयोग कर गबन करने की शिकायत शासन से की थी। ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया कि कार्यदायी संस्थाओं को आमंत्रित करने, उनका चयन करने, अनुबंध करने और भुगतान कराने जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में तत्कालीन निदेशक प्रो. राकेश कुमार त्रिवेदी की सीधी भूमिका थी।
तत्कालीन वरिष्ठ प्रबंधक की भूमिका भी सवालों के घेरे में
कई मामलों में स्टेप-एचबीटीआई सोसायटी के पदेन चेयरमैन से आवश्यक अनुमोदन नहीं लिया गया। इतना ही नहीं संस्थान से कार्यकाल समाप्त होने के बाद संस्था के कई महत्वपूर्ण मूल अभिलेख भी किसी जिम्मेदार अधिकारी को उन्होंने नहीं सौंपे। जांच के दौरान भी ये रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए गए। इस तरह से सरकारी धन का गबन करने का प्रथमदृष्टया अपराध पाया गया। तत्कालीन वरिष्ठ प्रबंधक गोपाल मेहरोत्रा की भूमिका भी सवालों के घेरे में मिली। आरोप है कि उन्होंने कर्मचारियों की नियुक्तियों से संबंधित मूल अभिलेखों का समुचित रखरखाव नहीं किया। संस्था छोड़ते समय भी रिकॉर्ड किसी जिम्मेदार अधिकारी को नहीं सौंपा।
1986 में की गई थी स्टेप-एचबीटीआई की स्थापना
स्टेप-एचबीटीआई (साइंस एंड टेक्नोलॉजी एंटरप्रेन्योर्स पार्क) की स्थापना वर्ष 1986 में एचबीटीआई (अब एचबीटीयू) परिसर में की गई थी। अब यह एचबीटीयू के स्कूल ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप एंड मैनेजमेंट के नाम से जाना जाता है। इसका उद्देश्य युवाओं को उद्यमिता, तकनीकी प्रशिक्षण, स्वरोजगार और कौशल विकास से जोड़ना था। इस संस्था के माध्यम से विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाते थे। इन योजनाओं के संचालन के लिए राज्य सरकार समय-समय पर बजट उपलब्ध कराती थी।
मामले की विवेचना की जा रही है। प्रो. राकेश कुमार त्रिवेदी का बयान दर्ज किया जा चुका है। 20 अन्य लोगों को बयान दर्ज करने के लिए नोटिस दिया गया है। विवेचना में सामने आए तथ्यों और साक्ष्य के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी। -इंस्पेक्टर संजीव कुमार मिश्रा, ईओडब्ल्यू, कानपुर सेक्टर