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कानपुर किडनी कांड: तीन गाड़ियां और तीन दिशाएं, क्या था भागने का प्लान, लखनऊ गई तीसरी कार बनी पुलिस के लिए पहेली

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Himanshu Awasthi Updated Fri, 10 Apr 2026 06:43 AM IST
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सार

Kanpur News: कानपुर किडनी ट्रांसप्लांट मामले में पुलिस उन तीन डॉक्टरों की तलाश कर रही है, जो ऑपरेशन के बाद लखनऊ की ओर भागे थे। पुलिस कमिश्नर ने मुख्य आरोपियों डॉ. रोहित और डॉ. अफजल की तत्काल गिरफ्तारी के लिए पांच टीमें गठित की हैं।

Kanpur Kidney Racket What Was the Escape Plan Third Car Headed for Lucknow Becomes Puzzle for Police
डॉ. अमित, डॉ. अफजल और डॉ. वैभव - फोटो : amar ujala
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विस्तार

कानपुर में किडनी ट्रांसप्लांट में शामिल डॉक्टर, ओटी मैनेजर, ओटी टेक्नीशियन और पैरामेडिकल स्टाॅफ अब तक पुलिस की पहुंच से दूर हैं। 29 मार्च की रात सर्जरी करने के बाद आहूजा हॉस्पिटल से लखनऊ के लिए निकली कार का अब तक सुराग नहीं मिला है, जबकि 450 किलोमीटर दूर गाजियाबाद गई कार के सवार दोनों ओटी टेक्नीशियन जेल पहुंच गए हैं। तीसरे सवार ओटी मैनेजर मुदस्सर अली सिद्दीकी की तलाश है।

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पुलिस के पास लखनऊ गई कार से तीन डॉक्टरों के जाने की जानकारी आई है। केशवपुरम स्थित आहूजा हॉस्पिटल में मुजफ्फरनगर की पारुल तोमर को बेगूसराय के आयुष की किडनी ट्रांसप्लांट करने के बाद तीन कारें अलग-अलग जगह के लिए निकली थीं। पुलिस को जानकारी मिली है कि मुदस्सर अली सिद्दीकी, कुलदीप सिंह राघव और राजेश तोमर गाजियाबाद के वैशाली क्षेत्र में उतरे थे।

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दूसरी कार मेरठ और तीसरी लखनऊ गई थी
पुलिस ने कार मालिक और रास्ते में अली के द्वारा ऑनलाइन रुपये ट्रांसफर करने की वजह से कुलदीप सिंह राघव और राजेश तोमर को गिरफ्तार कर लिया। अली फरार है। पुलिस को कुलदीप सिंह राघव, राजेश तोमर और डॉ. अफजल के साथी परवेज सैफी से पूछताछ में पता चला कि दूसरी कार मेरठ और तीसरी लखनऊ गई थी। मेरठ की कार में डॉ. रोहित, डॉ. अफजल, डॉ. वैभव, डॉ. अंकित सवार थे।

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शिवम अग्रवाल और आहूजा हॉस्पिटल - फोटो : amar ujala

बड़े अस्पताल का बताया जा रहा है एक डॉक्टर
लखनऊ के लिए रवाना हुई कार में तीन डॉक्टर भी शामिल थे। इनमें से एक विशेषज्ञ सर्जन और दो निजी अस्पतालों के डॉक्टर बताए जा रहे हैं। तीनों के बारे में पुलिस को अब तक कोई जानकारी नहीं हुई है जबकि तीनों ऑपरेशन थिएटर के अंदर थे। कुल आठ डॉक्टर ओटी के अंदर गए थे। इस मामले में पुलिस भी बचते हुए जांच कर रही है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक एक डॉक्टर बड़े अस्पताल का बताया जा रहा है।

पुलिस कमिश्नर ने जांच टीम के साथ की समीक्षा
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने गुरुवार को जांच कर रही टीम के साथ समीक्षा की। अब तक हुई कार्रवाई, गिरफ्तारी, सबूत और आरोपियों के खिलाफ दबिश के बारे में जानकारी की। उन्होंने जांच टीम को निर्देशित किया कि पहले फरार आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा। डॉ. रोहित, डॉ. अफजल और मुदस्सर अली सिद्दीकी का नाम सामने आ गया है। उनके शहर में होने के प्रमाण भी मिले हैं, जिस पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। गुरुवार को पांच अलग-अलग टीमें फिर से एनसीआर के लिए रवाना हुईं।

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पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल - फोटो : अमर उजाला

किडनी ट्रांसप्लांट में अब तक किसी सरकारी अस्पताल के डॉक्टर का नाम नहीं आया है। कुछ संदिग्धों के बारे में पता चला है। पुलिस की जांच टीमें उलझ रही थीं, जिसके लिए उन्हें पहले डॉ. रोहित, डॉ. अफजल और मुदस्सर अली को गिरफ्तार करने का निर्देश दिया गया है। टीमें रवाना हो गई हैं।  -रघुबीर लाल, पुलिस कमिश्नर

एनसीआर के बड़े अस्पताल को नोटिस भेजने से बच रही पुलिस
किडनी ट्रांसप्लांट मामले में एनसीआर के बड़े अस्पताल का दो बार नाम आ चुका है लेकिन पुलिस उनके प्रबंधन को नोटिस देने से बच रही है। अधिकारियों का कहना है कि अभी और साक्ष्य एकत्रित किए जा रहे हैं। टीमें जानकारी जुटाने के लिए वहां गई हैं। पुलिस को आहूजा हॉस्पिटल के स्टाफ शिवम अग्रवाल के मोबाइल से रिकार्डिंग बरामद हुई है, जिसमें वह प्रयागराज के नवीन पांडेय से बातचीत कर रहा है।

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वायरल चैट और किडनी कांड के मरीज आयुष चौधरी की जांच करते प्राचार्य डॉ. संजय काला और अन्य - फोटो : Amar ujala

अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया
नवीन पांडेय डॉ. रोहित के लिए एनसीआर क्षेत्र में डोनर व रिसीवर तलाशने का कार्य करता है। रिकार्डिंग 19 नवंबर 2025 की है। इसमें शिवम और नवीन एक महिला की मौत होने की बात कर रहे हैं। शिवम नवीन से कह रहा है कि जिस महिला को कानपुर से दिल्ली के अस्पताल भेजा गया था। उसने अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया। महिला की रावतपुर के नर्सिंगहोम में किडनी ट्रांसप्लांट की गई। हालत बिगड़ने पर उन्हें दिल्ली के अस्पताल में भेजा गया।

महिला के परिजनों को मैनेज किया
रिकार्डिंग में दोनों ने डॉ. रोहित का नाम लिया और कहा कि महिला के परिजनों को मैनेज किया जाए। वह अस्पताल के बाहर हंगामा कर रहे हैं। रिकार्डिंग से पुलिस को पता चला है कि ट्रांसप्लांट कराने के बाद एक महिला की मौत भी हुई है लेकिन वह कहां की है इसकी कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। नर्सिंगहोम और स्वास्थ्य विभाग के पास भी किसी तरह के कोई रिकॉर्ड नहीं है। दिल्ली के बड़े अस्पताल के पास कुछ न कुछ जानकारी होने की संभावना है, जिसके लिए उन्हें नोटिस भेजने की तैयारी थी।

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इसी अस्पताल में चल रहा था किडनी कांड - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

अस्पताल की दूसरी ब्रांच में मुलाकात हुई थी
साथ ही, पुलिस को जेल भेजे गए ओटी टेक्नीशियन कुलदीप सिंह राघव और राजेश कुमार तोमर ने पूछताछ में बताया है कि उनकी डॉ. रोहित, डॉ. अली से अस्पताल की दूसरी ब्रांच में मुलाकात हुई थी। वहां के एक स्टाफ भी साथ में थे। पुलिस उसकी जानकारी जुटाने का प्रयास कर रही है।

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