Kanpur Metro: मेट्रो की खोदाई से कांप उठीं दीवारें, 5 मकानों में पड़ीं गहरी दरारें, UPMRC ने आरोपों को नकारा
Kanpur News: कानपुर की विजयनगर कॉलोनी में मेट्रो निर्माण कार्य के दौरान हो रही ड्रिलिंग के कंपन से पांच मकानों की दीवारों और बीम में दरारें आ गई हैं। निवासियों का आरोप है कि विरोध करने पर इंजीनियर ने बदसलूकी की, जबकि मेट्रो प्रशासन ने इसे पुरानी दरारें बताते हुए किसी भी प्रकार की ड्रिलिंग से इनकार किया है।
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कानपुर मेट्रो की लापरवाही से विजयनगर कॉलोनी के पांच मकानों की दीवारों में दरारें आ गई हैं। लोगों का आरोप है कि यहां ड्रिलिंग मशीन से खोदाई के दौरान इतना कंपन हुआ कि मकानों के अंदर और बीम तक में दरारें पड़ गई हैं। जब उन्होंने विरोध किया तो मेट्रो के इंजीनियर ने बदसलूकी की और काम बंद करने से मना कर दिया। इससे क्षेत्र के लोगों में आक्रोश व्याप्त है।
शहर में मेट्रो कॉरिडोर-2 में 8.60 किमी का निर्माण कार्य करा रहा है जिसमें सीएसए से बर्रा आठ तक मेट्रो का संचालन करने की योजना है। इसके तहत विजयनगर पर भी कार्य चल रहा है। विजयनगर कॉलोनी में ब्लॉक नंबर- 73/5 निवासी सौरभ श्रीवास्तव ने बताया कि यहां मेट्रो इंजीनियर और ठेकेदार तीन दिन से बड़ी मशीन से जमीन में ड्रिल करा रहे हैं। इससे बहुत ज्यादा कंपन हो रहा है।
किसी मशीन से ड्रिल नहीं किया जा रहा
बुधवार को उनके और ब्लॉक नंबर- 79/2 निवासी सुनील त्रिपाठी, हृदयेश कुमार मिश्रा, कौशल सहित पांच लोगों के मकान में दरारें दिखीं। मकान के अंदर के कमरों, बाहरी दीवार और यहां तक बीम तक में दरारें हैं। इसका विरोध किया तो अधिकारी कह रहे हैं कि अब किसी मशीन से ड्रिल नहीं किया जा रहा है, ये पहले की दरारें हैं, जबकि काम शुरू करने से पहले मेट्रो के अफसरों ने फोटो खींचकर फाइल भी बनाई थी।
खोदाई कर निकालेंगे ही, चाहे कुछ भी हो जाए
क्षेत्र के लोगों ने बताया कि जब मौके पर मौजूद मेट्रो के इंजीनियर से शिकायत की तो वह बोले कि यहां जमीन के नीचे मेरे 20 करोड़ रुपये दबे हैं, हम तो खोदाई कर निकालेंगे ही, चाहे कुछ भी हो जाए। उन्होंने काम नहीं रुकवाया और बदसलूकी भी की। सुबह आठ से रात आठ बजे तक ही काम करने की बात कही गई थी, लेकिन अब रात दो बजे तक मशीनों से ड्रिल किया जाता है। दो दिन पहले तो इतनी तेज आवाज हो रही थी कि कुछ लोग घरों से बाहर निकल आए थे।
कॉरिडोर-2 में अंडरग्राउंड सेक्शन 4.10 किमी का है, जहां टनलिंग का कार्य मार्च में पूरा हो गया था। शहर में वर्तमान में कहीं भी टनलिंग का काम नहीं हो रहा है। अब टनल के अंदर सिर्फ सिस्टम इंस्टालेशन और ट्रैक बिछाने का काम चल रहा है जिसमें किसी भी टनल बोरिंग मशीन की जरूरत नहीं होती है। वर्तमान में शहर में कोई भी टनल बोरिंग मशीन नहीं है। वैसे भी टनलिंग के कार्य से मकानों में दरार नहीं आ सकती। देर रात अफसरों ने यहां निरीक्षण किया तो प्रथम दृष्ट्या ये दरारें पूर्व की लग रही हैं, अभी की नहीं। -पंचानन मिश्रा, संयुक्त महाप्रबंधक, जनसंपर्क विभाग, यूपीएमआरसी
पूर्व में एक दर्जन मकानों की हिल गई थी नींव
मेट्रो के शहर में टनल और अंडरग्राउंड निर्माण की खोदाई की वजह से पहले भी मकान धंसने और ढहने की घटनाएं हो चुकी हैं। अगस्त 2024 में हरबंश मोहाल में मेट्रो टनल की खोदाई करा रहा था। इसमें करीब एक दर्जन मकानों की नींव हिल गई थी। चार मंजिला एक मकान भरभरा कर गिर गया था। बड़ा चौराहा से नयागंज तक अंडरग्राउंड सेक्शन में टनल निर्माण के दौरान करीब नौ मकानों पर निरंतर निगरानी रखी गई।
दर्जनों घरों में भारी जलभराव हो गया था
जोखिम वाले क्षेत्रों में रहने वालों के लिए मेट्रो प्रशासन ने किराये पर रहने की व्यवस्था कराई। काकादेव में डबल पुलिया के पास मेट्रो स्टेशन के निर्माण व खोदाई में पानी की मुख्य पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई थी जिससे आसपास के दर्जनों घरों में भारी जलभराव हो गया था। इसके अलावा कछियाना, भूसाटोली और दानाखोरी जैसे पुराने इलाकों में भी टनल की खोदाई और निर्माण के दौरान कई मकानों व इमारतों में दरारें आई थीं।