Kanpur: पंचायत चुनाव टलने से बढ़ीं धड़कन, खर्चे में डूबे नए प्रत्याशी बोले- जेब पर भारी पड़ रही है देरी
Kanpur News: यूपी पंचायत चुनाव की मतदाता सूची अब 15 अप्रैल को आएगी। कानपुर के गांवों में दावेदारों ने दावतों पर पानी की तरह पैसा बहाया है, लेकिन चुनाव टलने और प्रशासक नियुक्त होने की संभावना ने उनकी चिंता बढ़ा दी है।
विस्तार
केस- वन
शिवराजपुर की बोझा ग्राम पंचायत में प्रधान पद के उम्मीदवारों की बाढ़ आ गई है। इस बार सामान्य सीट होने की संभावना के चलते बड़े नामी लोग भी मैदान में ताल ठोकने को तैयार हैं। इसमें कोई विधायक प्रतिनिधि है तो कोई सांसद प्रतिनिधि। चार माह से सभी दावेदार अलग-अलग तरीके से मतदाताओं को दावत दे रहे हैं। इसमें कई दावेदार लाखों रुपये अभी तक खर्च कर चुके हैं।
केस- दो
चौबेपुर ब्लाॅक की भगवंतपुर ग्राम पंचायत में करीब पांच माह से दावतें चल रहीं है। इस बार पिछड़ावर्ग की सीट होने की उम्मीद से दावेदार मतदाताओं को पूरी तरह से रिझाने के लिए हर तरह से प्रयास कर रहे हैं। कोई शाम को बैठक लगाकर शराब पार्टी दे रहा तो कोई दावत देकर भोज करा रहे हैं। हर किसी को आगे निकलने की अभी से होड़ लग गई है।
कानपुर में पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच मतदाता सूची जारी करने की तारीखें बढ़ने से मैदान में उतरने वाले नए दावेदारों की धड़कन भी बढ़ रही हैं। एक तरफ गांवों में चुनावी सरगर्मी चरम पर है, दूसरी ओर चुनाव की तिथि बढ़ने से दावेदारों की जेब ढीली होती जा रही है। कोई शराब पार्टियों में जुटा है तो कोई सामाजिक आयोजनों में उपहार बांट रहा है तो कई बड़े भोज की तैयारी में पैसा झोंक रहे हैं।
अब दूसरी बार अंतिम मतदाता सूची की तारीख बढ़ने से उनका पूरा गणित बिगड़ गया है। चुनाव आयोग ने अब पंचायत चुनाव की अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 15 अप्रैल की तारीख तय की है। इससे पहले यह तारीख छह फरवरी से बढ़ाकर 28 मार्च की गई थी। तारीख भले बढ़ रही हो लेकिन गांवों में चुनावी माहौल लगातार गरम होता जा रहा है। चौपालों से लेकर चाय की दुकानों तक चुनावों की तिथियों को लेकर चर्चा है।
छह महीने के भीतर कराए जा सकते हैं चुनाव
गांवों में चुनाव लड़ने की तैयारी महीनों से शुरू है। कई संभावित दावेदारों ने जनसंपर्क अभियान, सामाजिक कार्यक्रमों और मतदाताओं को साधने में भारी रकम भी खर्च कर दी, लेकिन लगातार बढ़ रही तारीखों के बीच चुनाव टलने की संभावना दिख रही है। जिले की 590 ग्राम पंचायतों के प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा है। कार्यकाल समाप्त होने तक चुनाव कराना संभव नहीं होगा। ऐसी स्थिति में पंचायतों में प्रशासक तैनात किए जा सकते हैं और फिर छह महीने के भीतर चुनाव कराए जा सकते हैं। गांवों में चर्चा है कि चुनाव से पहले ही आधी पूंजी खत्म हो गई।
प्रशासनिक व्यस्तता बनी वजह
मतदाता सूची के कंप्यूटरीकरण, राज्य मतदाता नंबर जारी करने और मतदान केंद्रों की मैपिंग का काम अब 13 अप्रैल तक किया जाएगा। बोर्ड परीक्षाओं, विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान और अन्य सरकारी कार्यों में प्रशासनिक मशीनरी व्यस्त होने के कारण लगातार देरी हो रही है।
