Kanpur: ‘दुल्हन की फोटो और अकाउंट में डाका’, तीन कॉल सेंटरों पर छापा, 23 टेलीकॉलर्स से पूछताछ, संचालक गिरफ्तार
Kanpur News: कानपुर साइबर पुलिस ने शादी के नाम पर ठगी करने वाले तीन कॉल सेंटरों का पर्दाफाश किया है। भिलाई निवासी संचालक को गिरफ्तार कर 23 टेलीकॉलर्स से पूछताछ की जा रही है और गिरोह के 10 बैंक खातों की जांच शुरू कर दी गई है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कानपुर में शादी कराने का झांसा देकर लोगों से लाखों रुपये की साइबर ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह का साइबर क्राइम पुलिस ने पर्दाफाश किया है। गिरोह इंटरनेट और सोशल मीडिया से युवतियों की तस्वीरें जुटाकर फर्जी प्रोफाइल तैयार करता था और फिर विवाह के इच्छुक युवकों को अपने जाल में फंसाता था। कॉल सेंटर में बैठे कर्मचारी ही महिला बनकर बातचीत करते थे और विभिन्न शुल्कों के नाम पर रकम वसूलते थे।
साइबर क्राइम थाना पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए तीन संदिग्ध कॉल सेंटरों पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान कॉल सेंटर संचालक रंजीश कुमार गौड़ को गिरफ्तार किया गया, जबकि 23 टेलीकॉलर्स से पूछताछ की गई है। आरोपी मूल रूप से भिलाई (छत्तीसगढ़) का रहने वाला है।
बैंक खातों में करीब चार लाख रुपये जमा करा लिए
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के अनुसार बाराबंकी के रामनगर तहसील के चंदश नामक व्यक्ति की शिकायत पर जांच शुरू हुई थी। पीड़ित ने बताया था कि मैरिज ब्यूरो संचालक बनकर कुछ लोगों ने शादी कराने का भरोसा दिलाया और अलग-अलग बैंक खातों में करीब चार लाख रुपये जमा करा लिए।
तकनीकी और बैंकिंग ट्रेल की पड़ताल शुरू
जांच के बाद साइबर थाना में मुकदमा दर्ज कर तकनीकी और बैंकिंग ट्रेल की पड़ताल शुरू की गई। जांच में सामने आया कि गिरोह "परफेक्ट रिश्ते", "शादी मैच" और "शादी मैच इंडिया" नाम से मैट्रिमोनियल सेंटर संचालित कर रहा था। इनके कार्यालय बर्रा, कर्रही रोड, गौशाला चौराहा और यशोदा नगर क्षेत्रों में संचालित होने की जानकारी मिली है।
ऐसे फंसाते थे शिकार
गिरोह सोशल मीडिया और मैट्रिमोनियल वेबसाइटों से मोबाइल नंबर और अन्य जानकारी जुटाता था। इसके बाद टेलीकॉलर्स शादी के इच्छुक युवकों से संपर्क कर आकर्षक रिश्तों का प्रस्ताव देते थे। फर्जी महिला प्रोफाइल, इंटरनेट से ली गई तस्वीरें और मनगढ़ंत पारिवारिक विवरण दिखाकर विश्वास बनाया जाता था।
प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए और पैसा जमा करना जरूरी
विश्वास बनने के बाद रजिस्ट्रेशन फीस, प्रोफाइल निर्माण शुल्क, मैचिंग शुल्क, संपर्क शुल्क और पारिवारिक सहमति शुल्क जैसे अलग-अलग बहानों से रकम मांगी जाती थी। कई मामलों में फर्जी भुगतान रसीदें और स्क्रीनशॉट भेजकर यह दिखाया जाता था कि दूसरी तरफ से भी भुगतान हो चुका है। इसलिए प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए और पैसा जमा करना जरूरी है।
शिकायत होते ही अपनाते थे नई चाल
पूछताछ में यह भी सामने आया कि जब कोई पीड़ित साइबर पोर्टल या पुलिस में शिकायत दर्ज कर देता था तो गिरोह उससे संपर्क कर समझौते का दबाव बनाता था। कुछ मामलों में आंशिक या पूरी रकम लौटाकर शिकायत वापस लेने की कोशिश की जाती थी, ताकि फ्रीज हुए बैंक खाते दोबारा सक्रिय कराए जा सकें।
भारी मात्रा में सामान बरामद
छापेमारी के दौरान पुलिस ने 43 कीपैड मोबाइल, 13 एंड्रॉयड फोन, तीन डेस्कटॉप कंप्यूटर, तीन सीपीयू, 40 रजिस्टर, 10 एटीएम कार्ड, आठ चेकबुक, पांच क्यूआर कोड, बैंक जमा रसीदें, प्रचार सामग्री और अन्य डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं।
10 बैंक खातों की पड़ताल
पुलिस को गिरोह से जुड़े 10 बैंक खातों की जानकारी मिली है। इनमें एसबीआई, पीएनबी, बैंक ऑफ बड़ौदा, यूको बैंक, इंडियन बैंक, केनरा बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक के खाते शामिल हैं। इन खातों के जरिए धन के लेनदेन, यूपीआई आईडी, क्यूआर कोड और मनी ट्रेल की विस्तृत जांच की जा रही है।
कई राज्यों के लोगों को निशाना बनाया
साइबर पुलिस का मानना है कि गिरोह ने उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के लोगों को निशाना बनाया है। बरामद मोबाइल, रजिस्टर और डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर संभावित पीड़ितों की पहचान की जा रही है। पुलिस को आशंका है कि ठगी की रकम चार लाख रुपये से कहीं अधिक हो सकती है। जांच और डिजिटल फॉरेंसिक विश्लेषण जारी है।