Kanpur: उर्सला में टूटी थी किशोरी की हड्डी, डॉक्टर बोला- जटिल सर्जरी नहीं कर पाएंगे, अब बाहर से आएंगे एक्सपर्ट
Kanpur News: उर्सला अस्पताल में कूल्हे की रॉड निकलवाने आई 15 साल की किशोरी रिंसा की जांघ की हड्डी टूटने के मामले में अस्पताल बैकफुट पर आ गया है। ऑपरेशन के बाद भागने वाले डॉक्टर सुनील गुप्ता ने जटिल सर्जरी करने से इनकार कर दिया है, जिसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने बाहर से एक्सपर्ट सर्जनों की टीम बुलाकर किशोरी की दोबारा सर्जरी कराने का निर्णय लिया है।
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कानपुर के उर्सला अस्पताल में कूल्हे में पड़ी रॉड निकलवाने आई 15 साल की किशोरी रिंसा की जांघ की हड्डी तोड़ने के मामले में अस्पताल बैकफुट पर आ गया है। ऑपरेशन करके भागने वाले डॉक्टर सुनील गुप्ता से मरीज की स्थिति न संभलने के बाद अब अस्पताल प्रबंधन ने इलाज का जिम्मा उठाया है। डॉ. सुनील का कहना है कि वह जटिल सर्जरी नहीं कर पाएंगे। अस्पताल प्रबंधन ने फैसला किया है कि बाहर से एक्सपर्ट सर्जनों की टीम बुलाकर किशोरी की दोबारा सर्जरी कराई जाएगी।
जांघ की हड्डी (फीमर बोन) टूट जाने के कारण रिंसा की हालत इतनी गंभीर है कि उसे आईसीयू में भर्ती किया गया है। डॉक्टरों की टीम लगातार उसकी निगरानी कर रही है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। बता दें कि शुक्रवार को हड्डी तोड़ने के बाद भाग रहे डॉ. सुनील को तीमारदारों ने पकड़ लिया था, तब उन्होंने खुद इलाज करने का आश्वासन दिया था। प्रबंधन ने परिजनों को आश्वस्त किया है कि किशोरी के बेहतर और सुरक्षित इलाज के लिए वरिष्ठ विशेषज्ञों व एक्सपर्ट सर्जनों की टीम को बुलाया जा रहा है।
नौ हजार रुपये लेने का भी लगाया आरोप
जो आईसीयू में भर्ती रिंसा की क्रिटिकल सर्जरी करेगी। निदेशक डॉ. सीमा श्रीवास्तव ने बताया कि रिंसा का इलाज यहीं पर होगा। इसके लिए हम बाहर से एक्सपर्ट बुलाएंगे। अभी कुछ दिन ऑपरेशन नहीं होगा। डॉक्टर से ऐसी लापरवाही कैसे हुई, इसकी जांच के लिए एक कमेटी भी गठित कर दी गई है। वहीं, रोगी के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर नौ हजार रुपये लेने का भी आरोप लगाया है। अस्पताल प्रबंधन ने सफाई दी है कि कोई पैसा नहीं लिया गया है।
पांच दिन में जांच रिपोर्ट सौंपेगी कमेटी
उर्सला में पहले भी डॉक्टरों पर आरोप लगते रहते हैं और हर बार कमेटी बनाकर अस्पताल प्रबंधन इतिश्री कर लेता है। इस बार भी तीन सदस्यीय कमेटी बना दी गई है जो इस बात की जांच करेगी कि डॉ. सुनील से लापरवाही कैसे हुई। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. शैलेंद्र तिवारी की अध्यक्षता में बनी कमेटी में हड्डी रोग विभाग के डॉ. श्री प्रकाश और डॉ. अशोक कुमार को शामिल किया गया है। कमेटी पांच दिन में जांच कर रिपोर्ट सौंपेंगी।
पेंच निकालने में टूट गई हड्डी
हड्डी रोग विशेषज्ञों के अनुसार डॉ. सुनील रोगी के चार वर्ष पहले पड़ी रॉड को बाहर निकाल रहे थे। बच्चों में हड्डी जल्दी मजबूती पकड़ लेती है और ऐसा ही इस मामले में भी हुआ है। चार साल पहले हड्डी टूटी थी वो अच्छी तरह जम गई। जब डॉक्टर ने रॉड निकाली तो काफी मुश्किल आई। इसे निकालने में एक पेंच अंदर फंसा ही रह गया, जिसे बाहर खींचने के दौरान ही हड्डी भी टूट गई। ऐसा कई बार रोगियों के साथ हो जाता है, लेकिन ऐसे में डॉक्टर खुद पर नियंत्रण रखते हुए केस को करते हैं। केस छोड़कर भागते नहीं है। कई बार उर्सला में इस तरह के मामले और भी डॉक्टरों से हुए हैं, जिसमें उन्होंने रोगी को बताया और कुछ दिन भर्ती रखने के बाद दोबारा प्लेट लगाकर हड्डी जोड़ दी है।
हमेशा चर्चा में रहता है, उर्सला अस्पताल
उर्सला अस्पताल अभी भी आधुनिक सुविधाओं के बजाय साल में 12 महींने विवादों के चलते चर्चा में रहता है। अभी दो महीने पहले ईएनटी के डॉक्टर पर फतेहपुर के एक रोगी ने आरोप लगाया था कि 50 हजार रुपये ले लिए और उर्सला में लाकर डाल दिया। सर्जरी तक नहीं की। रोगी और उसके पति ने इसकी शिकायत पुलिस में भी की थी। जांच कमेटी बनी और रिपोर्ट सौंपने से पहले ही रोगी अस्पताल से अचानक चले गए। ये लिखकर कि हमसे समझने में कुछ भूल हुई है। हमारा ऑपरेशन हुआ है और डॉक्टर ने हमसे कोई पैसे भी नहीं लिए हैं। इसी तरह एक बाबूपुरवा निवासी महिला ने आठ माह पहले एक सर्जन पर ऑपरेशन के बदले पैसे लेने का आरोप लगाया था। महिला का कहना था कि डॉक्टर के साथ रहने वाले ड्राइवर ने उससे पाचं हजार रुपये लिए हैं। हालांकि बाद में वो महिला भी ये लिखकर चली गई कि कुछ नहीं हुआ है।