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Kanpur News: अब कानपुर-प्रयागराज के बीच नहीं टकराएंगी ट्रेनें
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कानपुर। प्रयागराज से कानपुर के बीच ट्रेन का सफर अब अधिक सुगम और सुरक्षित होगा। कानपुर सेंट्रल और प्रयागराज जंक्शन को छोड़कर, इस 190 किलोमीटर के रूट को स्वदेशी सुरक्षा प्रणाली कवच से लैस किया गया है। तकनीकी और फील्ड परीक्षणों के बाद रेलवे ने इस रूट को चालू करने का निर्णय लिया है। अब ट्रेनों के टकराने की स्थिति में यह प्रणाली स्वचालित रूप से आपातकालीन ब्रेक लगा देगी।
उत्तर-मध्य रेलवे अपने खंड में आने वाले ट्रैक को कवच से लैस कर रहा है। प्रयागराज और कानपुर के बीच इस प्रणाली को लगाने के बाद सभी परीक्षण कर लिए गए हैं। उच्च गति पर प्रदर्शन परखने के लिए 20 कोच वाली वंदे भारत रैक को भी ट्रैक पर दौड़ाकर देखा गया। चौरीचौरा एक्सप्रेस सहित कई ट्रेनों का 20,000 किलोमीटर से अधिक का ट्रायल किया गया है।
कवच स्वदेशी रूप से विकसित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है। अगर ट्रेन गलती से लाल सिग्नल पार करती है, तो यह उसे तुरंत रोक देता है। अगर लोको पायलट निर्धारित गति सीमा को नियंत्रित नहीं कर पाता या आमने-सामने की टक्कर की स्थिति बनती है, तो यह स्वचालित रूप से आपातकालीन ब्रेक लगा देती है। ट्रेन के निर्धारित गति सीमा से तेज होने पर कवच गति को कम कर देता है। खराब मौसम या कोहरे में दृश्यता कम होने पर यह प्रणाली ड्राइवर को कैब में ही सिग्नल की स्थिति दिखाकर सुरक्षित संचालन में मदद करती है। यह लोकोमोटिव की गति और आवश्यक ब्रेकिंग दूरी की तत्काल निगरानी भी सुनिश्चित करती है। विदेशी प्रणालियों की तुलना में कवच काफी सस्ता है।
वर्जन
कवच प्रणाली शुरू होने से ट्रेनों का सफर और भी सुरक्षित होगा। इस प्रशिक्षण की सफलता से अब ट्रेनों की गति भी बढ़ाई जा सकेगी। -अमित मालवीय, सीनियर पीआरओ, उत्तर-मध्य रेलवे
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उत्तर-मध्य रेलवे अपने खंड में आने वाले ट्रैक को कवच से लैस कर रहा है। प्रयागराज और कानपुर के बीच इस प्रणाली को लगाने के बाद सभी परीक्षण कर लिए गए हैं। उच्च गति पर प्रदर्शन परखने के लिए 20 कोच वाली वंदे भारत रैक को भी ट्रैक पर दौड़ाकर देखा गया। चौरीचौरा एक्सप्रेस सहित कई ट्रेनों का 20,000 किलोमीटर से अधिक का ट्रायल किया गया है।
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कवच स्वदेशी रूप से विकसित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है। अगर ट्रेन गलती से लाल सिग्नल पार करती है, तो यह उसे तुरंत रोक देता है। अगर लोको पायलट निर्धारित गति सीमा को नियंत्रित नहीं कर पाता या आमने-सामने की टक्कर की स्थिति बनती है, तो यह स्वचालित रूप से आपातकालीन ब्रेक लगा देती है। ट्रेन के निर्धारित गति सीमा से तेज होने पर कवच गति को कम कर देता है। खराब मौसम या कोहरे में दृश्यता कम होने पर यह प्रणाली ड्राइवर को कैब में ही सिग्नल की स्थिति दिखाकर सुरक्षित संचालन में मदद करती है। यह लोकोमोटिव की गति और आवश्यक ब्रेकिंग दूरी की तत्काल निगरानी भी सुनिश्चित करती है। विदेशी प्रणालियों की तुलना में कवच काफी सस्ता है।
वर्जन
कवच प्रणाली शुरू होने से ट्रेनों का सफर और भी सुरक्षित होगा। इस प्रशिक्षण की सफलता से अब ट्रेनों की गति भी बढ़ाई जा सकेगी। -अमित मालवीय, सीनियर पीआरओ, उत्तर-मध्य रेलवे