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शिवानी हत्याकांड: थाने में युवती की हत्या मामले में थानाध्यक्ष समेत तीन लाइन हाजिर, जांच में सामने आई लापरवाही
Mon, 15 Jun 2026 12:04 AM IST
Shikha Pandey
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
Published by: Shikha Pandey
Updated Mon, 15 Jun 2026 12:04 AM IST
सार
Banda News: शिवानी हत्याकांड में सीओ सदर की जांच में पुलिस की लापरवाही सामने आई है। एसआई और महिला आरक्षी पर भी कार्रवाई की गई है।
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शिवानी हत्याकांड
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बदौसा थाना परिसर में 10 जून को अनुसूचित जाति के युवक से शादी करने वाली युवती शिवानी की हत्या के मामले में थानाध्यक्ष, दिवस अधिकारी और महिला आरक्षी को लाइन हाजिर किया गया है। पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल ने यह कार्रवाई सीओ सदर की जांच रिपोर्ट के आधार पर की है।
जांच में यह पाया गया कि थानाध्यक्ष अजीत प्रताप सिंह, दिवस अधिकारी उपनिरीक्षक सुरेंद्र मिश्रा और महिला आरक्षी राखी ने सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही और ड्यूटी के दौरान अपेक्षित सतर्कता नहीं बरती। इसी वजह से पिता सत्य कुमार सिंह ने चाकू से वारकर शिवानी की हत्या कर दी। सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में युवती की सुरक्षा को लेकर पर्याप्त इंतजाम नहीं किए जाने का भी जिक्र किया गया है।
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जांच में यह पाया गया कि थानाध्यक्ष अजीत प्रताप सिंह, दिवस अधिकारी उपनिरीक्षक सुरेंद्र मिश्रा और महिला आरक्षी राखी ने सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही और ड्यूटी के दौरान अपेक्षित सतर्कता नहीं बरती। इसी वजह से पिता सत्य कुमार सिंह ने चाकू से वारकर शिवानी की हत्या कर दी। सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में युवती की सुरक्षा को लेकर पर्याप्त इंतजाम नहीं किए जाने का भी जिक्र किया गया है।
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अब आगे क्या होगी कार्रवाई
पुलिस विभाग में लाइन हाजिर किया जाना प्रारंभिक अनुशासनात्मक कार्रवाई माना जाता है। इसके बाद संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की जा सकती है। जांच अधिकारी आरोपों की समीक्षा कर सभी पक्षों के बयान दर्ज करेंगे। यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो दोषी पुलिसकर्मियों पर चेतावनी, वेतनवृद्धि रोकने, प्रतिकूल प्रविष्टि, निलंबन अथवा सेवा से बर्खास्तगी तक की कार्रवाई की जा सकती है। कार्रवाई के अगले चरण में यह तय होगा कि थाने के भीतर हुई इस सनसनीखेज हत्या के लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों की जवाबदेही किस स्तर तक तय की जाती है।
पुलिस विभाग में लाइन हाजिर किया जाना प्रारंभिक अनुशासनात्मक कार्रवाई माना जाता है। इसके बाद संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की जा सकती है। जांच अधिकारी आरोपों की समीक्षा कर सभी पक्षों के बयान दर्ज करेंगे। यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो दोषी पुलिसकर्मियों पर चेतावनी, वेतनवृद्धि रोकने, प्रतिकूल प्रविष्टि, निलंबन अथवा सेवा से बर्खास्तगी तक की कार्रवाई की जा सकती है। कार्रवाई के अगले चरण में यह तय होगा कि थाने के भीतर हुई इस सनसनीखेज हत्या के लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों की जवाबदेही किस स्तर तक तय की जाती है।
कई थाना प्रभारी इधर से उधर
एसपी पलाश बंसल ने कोतवाली देहात में तैनात सीपी तिवारी को थाना बिसंडा, अतर्रा प्रभारी संजीव चौबे को देहात कोतवाली, बबेरू थाना में तैनात उपनिरीक्षक राधाकृष्ण तिवारी बदौसा की कमान सौंपी है। इसके साथ ही 10 उपनिरीक्षकों का भी कार्यक्षेत्र परिवर्तित किया गया है।
एसपी पलाश बंसल ने कोतवाली देहात में तैनात सीपी तिवारी को थाना बिसंडा, अतर्रा प्रभारी संजीव चौबे को देहात कोतवाली, बबेरू थाना में तैनात उपनिरीक्षक राधाकृष्ण तिवारी बदौसा की कमान सौंपी है। इसके साथ ही 10 उपनिरीक्षकों का भी कार्यक्षेत्र परिवर्तित किया गया है।