बांदा जेल में खेल: जिस दिन होनी थी कैदी की रिहाई, उसी दिन पहुंचा कोमा में; वेंटिलेटर पर जंग, पुलिसकर्मी फरार
Banda News: जिला कारागार में बंद विचाराधीन कैदी नीतीश पाल (25) की रिहाई के दिन अचानक हालत बिगड़ने से मामला चर्चा का विषय बन गया है। पॉक्सो एक्ट के तहत जेल में बंद नीतीश को न्यायालय से जमानत मिल चुकी थी और सोमवार को उसकी रिहाई होनी थी, लेकिन वह फिलहाल रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज के एडवांस आईसीयू में वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत से जूझ रहा है।
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पॉक्सो एक्ट के तहत जेल में बंद एक 25 वर्षीय विचाराधीन कैदी की संदिग्ध परिस्थितियों में हालत इतनी बिगड़ गई कि वह कोमा में चला गया। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि सोमवार को ही कोर्ट से उसकी जमानत मंजूर होने के बाद उसे जेल से रिहा होना था।
लेकिन, रिहाई के चंद घंटे पहले वह रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज के एडवांस आईसीयू के वेंटिलेटर पर मौत से जूझने लगा। इस पूरे मामले में जिला अस्पताल के डॉक्टरों की लीपापोती और कैदी को तड़पता छोड़ पुलिसकर्मियों के अस्पताल से रफूचक्कर होने के बाद हड़कंप मच गया है।
सुबह आनी थी आजादी की खबर
बंदी नीतीश पाल उम्र 25 वर्ष पिछले कुछ समय से बांदा जिला जेल में बंद था। सोमवार को उसकी कानूनी रिहाई की कागजी प्रक्रिया पूरी होनी थी और परिजन जेल गेट पर उसका इंतजार कर रहे थे। लेकिन सोमवार की सुबह अचानक जेल के भीतर उसकी हालत अत्यंत नाजुक हो गई।
मेडिकल कॉलेज के कैजुअल्टी रिकॉर्ड के मुताबिक, जेल में तैनात डॉक्टर ने दलील दी है कि नीतीश पाल को अचानक मिर्गी जैसे तेज दौरे पड़े और वह असंतुलित होकर जमीन पर गिर गया, जिससे वह अचेत हो गया। हालांकि, परिजन इस थ्योरी पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं।
इलाज करने से ही मुकर गए डॉक्टर
इस पूरे मामले में बांदा स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और डॉक्टरों के आपसी विरोधाभास ने मामले को पूरी तरह संदिग्ध बना दिया है। जिला पुरुष चिकित्सालय के सरकारी डिस्चार्ज पर्चे के मुताबिक, मरीज को सुबह 7:51 बजे इमरजेंसी में भर्ती किया गया था और पर्चे पर डॉ. हृदेश के अंतर्गत इलाज चलने और जीवन रक्षक दवाइयां देने का बकायदा उल्लेख है।
लेकिन, सबसे बड़ा ट्विस्ट तब आया जब डॉ. हृदेश पटेल ने ऑन-रिकॉर्ड इस मरीज को देखने या उसका इलाज करने से साफ इनकार कर दिया। वहीं, ऑन-ड्यूटी डॉ. आकाश ने बताया कि उन्होंने मरीज की गंभीर हालत को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद उसे तुरंत रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया था। डॉक्टरों का यह यू-टर्न बता रहा है कि दाल में कुछ काला जरूर है।
एआईसीयू में भर्ती कराकर रफूचक्कर हुए पुलिसकर्मी
रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज के आधिकारिक पर्चे से एक और सनसनीखेज खुलासा हुआ है। पर्चे पर स्पष्ट दर्ज है कि कैदी नीतीश पाल को पुलिसकर्मी राकेश और आशीष पांडे गंभीर हालत में लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचे थे। आरोप है कि सुबह 11:20 बजे जैसे ही कैदी को गंभीर और अचेत अवस्था में एडवांस आईसीयू के वेंटिलेटर पर शिफ्ट किया गया, ये दोनों पुलिसकर्मी कानूनी जिम्मेदारी से बचते हुए चुपचाप अस्पताल से रफूचक्कर हो गए।
कैदी की हालत इतनी नाजुक है कि वह कोमा में है और कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं है। इस बेहद संवेदनशील और मानवाधिकारों से जुड़े मामले पर फिलहाल जेल अधीक्षक से लेकर पुलिस का कोई भी आला अधिकारी कैमरे के सामने कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।