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Kanpur News: कोरोना काल में कौशल निखारने व मदद कर जीता विश्वास

संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर Updated Sun, 11 Jan 2026 01:54 AM IST
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Won trust by improving skills and helping during the Corona period
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कानपुर देहात। कोरोना महामारी ने लोगों को रोजगार से लेकर पेट भरने तक का संकट खड़ा कर दिया था। उस दौर में मिली तनिक सी मदद भी लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं थी। अकबरपुर थाना से एक किलोमीटर दूर पर बंद हुए एक स्कूल में व्यवसायिक प्रशिक्षण केंद्र शुरू करने वाले शातिरों ने पहले लोगों को उनके कौशल निखारने व मदद करने के नाम पर विश्वास जीता। साथ ही धर्मांतरण का मकड़जाल फैलाकर कानपुर देहात के अलावा कई स्थानों के लोगों का धर्मांतरण करवा दिया।
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कन्नौज जिले के धर्मांतरण के मामले में पन्नालाल की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को कानपुर देहात से उसके तार जुड़े होने की जानकारी पर एसपी श्रद्धा नरेंद्र पांडेय की ओर से एसआईटी का गठन कर जांच शुरू करवाई गई थी। शनिवार को नवाकांति का संचालन करने वाले डेनियल शरद सिंह, हरिओम त्यागी व सावित्री शर्मा को गिरफ्तार किया है।
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एसपी ने बताया कि नवाकांति सोसाइटी में पहले स्कूल का संचालन होता था। जोकि कोविड में बंद हो गया था। बाद में यहां व्यवसायिक प्रशिक्षण केंद्र का संचालन शुरू किया था। तीनों लोग सूक्ष्म व लघु स्तर पर अपना जाल फैला कर अनुसूचित जाति के लोगों व आर्थिक रूप कमजोर लोगों को फंसाते थे। आरोपी लोगों को सिलाई, कढ़ाई, बुनाई व अन्य तकनीकी कौशल प्रशिक्षण का प्रलोभन देकर अपने पास लाते थे। साथ ही लोगों को हैंडपंप सहित अन्य छोटी-छोटी जरूरत की चीजें देते थे। लोगों के जाल में फंसने पर बाइबिल रीडिंग से लेकर वेपटिस्म प्रक्रिया से शुद्धीकरण के बाद धर्मांतरण तक काम करते थे। इन लोगों ने जिले में करीब 50 हैंडपंप लगवाए हैं। जिनकी जांच की जा रही है। प्रत्येक हैंडपंप लगाने में करीब 50 हजार रुपये तक का खर्चा आता था। जांच के दौरान पुलिस को संस्था के भवन से कई कागजात मिले हैं। जिनकी गहन जांच की जा रही है। आरोपियों ने अभी तक कितने लोगों का धर्मांतरण करवाया है। इनके अंतरजनपदीय व दूसरे प्रांतों से तार जुड़े होने को लेकर जांच की जा रही है।
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आयु वर्ग व स्तर के हिसाब से चलाते थे क्लब
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने यह भी बताया कि वह लोग गांवों में रहने कम पढ़े लिखे लोगों, युवाओं, बच्चों व बुजुर्गों के हिसाब से क्लब बनाकर संचालन करते थे। इनमें इन लोगों के दो क्लब सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण रहते थे। जिसमें पहला क्लब गृह कलीसिया के नाम से संचालित होता था। जिसमें गांव स्तर पर ईसाई धर्म को अपना लेने वाला युवक अपने घर में अस्थाई रूप से चर्च का संचालन कर प्रार्थना सभा कर लोगों को गरीबी से मुक्ति दिलाने व ईसाई धर्म की खूबियां गिनाकर उन्हें प्रभावित करता था। लोगों को झांसे में लेने के बाद उनका धर्म परिवर्तन करवाने का काम करते था। वहीं दूसरा समूह अवाना जोकि विशेष तौर पर बच्चों को धर्मांतरण करवाता था। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों के ओर से वीडियो बाइबिल रीडिंग स्कूल, वोकेशनल सेंटर, प्रौढ़ शिक्षा केंद्र, सिलाई प्रशिक्षण केंद्र आदि का संचालन किया गया। यहां तक कि धर्मांतरण के बाद जिले में ईसाई धर्म में सबसे परिपक्व हो जाने वाले व्यक्ति को जिला स्तर का पादरी आदि भी घोषित कर देते थे।
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कन्नौज में हुई चूक से ली सीख, तत्परता से की कार्रवाई
कन्नौज में धर्मांतरण गिरोह का भंडाफोड़ होने के बाद पुलिस ने अपनी लिखा-पढ़ी में चूक कर दी थी। कन्नौज में हुई किरकरी से पुलिस ने धर्मांतरण के मकड़जाल से निकलने के प्रयास में जुटे निबौली निवासी रामभरोसे की शिकायत पर गंभीरता दिखाई। पीड़ित ने पुलिस को आरोपियों की मदद के नाम पर प्रलोभन देने से लेकर धर्मांतरण आदि कराने का चिट्ठा खोला तो पुलिस ने भी लिखा-पढ़ी में पीड़ित की सुरक्षा व आरोपियों पर कार्रवाई करने में कसर नहीं छोड़ी। पुलिस ने पीड़ित की तहरीर पर दर्ज की गई प्राथमिकी में उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 की धारा 3/5(1)/5(2)/5(3) लगाई है। पुलिस अधिकारी के मुताबिक इस अधिनियम की धारा 3 किसी महिला, नाबालिग, अनुसूचित जाति के लोगों के साथ धोखाधड़ी कर धर्मांतरण कराने पर लगाई जाती है। इसमें करीब पांच साल की सजा हो सकती है। धारा 5(1) की जबरन धर्मांतरण को दर्शाती है। इसमें तीन साल तक की सजा का प्रावधान है। धारा 5(2) धर्मांतरण के लिए विदेशी फंडिंग को दर्शाती है। इसमें अधिकतम 14 साल की सजा व अर्थदंड का प्रावधान है।
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व्यापारिक गतिविधियों की तरह फैला रहे थे मकड़जाल
व्यवसायिक कंपनियां व चिट फंड कंपनियां जिस प्रकार से एक चेन से लोगों को जोड़कर अपना कारोबार बढ़ाती हैं। कारोबार को एक नियत स्तर पर लाभ पहुंचाने पर संबंधित सदस्य को उपहार भी देती हैं। ठीक इसी तरह धर्मांतरण गिरोह के सदस्य भी अनुसूचित जाति के लोगों का धर्म परिवर्तन करवाने के लिए प्रयोग करते थे। पहले यह कुछ लोगों को मदद के नाम पर अपने झांसे में लेते थे। इसके बाद तय स्थान पर होने वाली प्रार्थना सभा में शामिल होने के 200 रुपये देते थे। ईसाई धर्म का प्रचार करने व धर्मांतरण करवाने वाले लोगों को कौशल संबंधी प्रशिक्षण देने के साथ छह से 10 हजार रुपये मासिक वेतन के रूप में देते थे। इसके बाद नए लोगों को जागरूक कर धर्मांतरण करवा देने पर भी उनको उपहार के रूप में तय धनराशि मुहैया करवाते थे। इसके साथ ही अन्य कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए भी खर्चा देते थे।
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सर्विलांस व साइबर टीम की मदद से मिले थे सुराग
कन्नौज में धर्मांतरण गिरोह के सदस्य पन्नालाल से पूछताछ के बाद सक्रिय हुई कानपुर देहात की सर्विलांस व साइबर टीम ने पन्नालाल से फोन पर संपर्क करने वाले लोगों की जांच कर कड़ी से कड़ी जोड़कर बाढ़ापुर स्थित धर्मांतरण गिरोह के सदस्यों के गिरेबान तक जा पहुंची। पुलिस अब इन आरोपियों के खातों में देश व विदेश से हुई फंडिंग आदि की जांच में जुटी है।
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कन्नौज के अलावा आसपास के जिलों में भी फैले हो सकते हैं तार
पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि गिरोह के सदस्य प्रदेश व अन्य प्रांतों में होने वाले आयोजन में भी शामिल होने जाते थे। कन्नौज में पुलिस ने धर्मांतरण गिरोह का भंडाफोड़ किया था। मिर्जापुर में भी दिसंबर माह में धर्मांतरण के मामले सामने आए थे। पुलिस आरोपियों के बार्डर के जिले औरैया, जालौन, कानपुर नगर के साथ फतेहपुर, झांसी, चंदौली आदि स्थानों पर तार फैले होने को लेकर छानबीन में जुटी है।
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करीब एक माह से एसआईटी जुटा रही थी सुराग

पुलिस को कन्नौज से इनपुट मिलने के बाद एसआईटी टीम काम कर रही थी। इसमें इंटेलीजेंट इनपुट भी जुटाए गए। इसके बाद यह पता चला कि अकबरपुर में धर्म परिवर्तन की एक्टिविटी हो रही है। नवाकांती सोसाइटी के नाम से अकबरपुर में एक स्किल डेवलपमेंट एकेडमी संचालित थी। पुलिस को पता चला है कि डेनियल शरद सिंह का मूल नाम शरद सिंह है धर्म बदलने के बाद शरद सिंह के साथ डेनियल जोड़ा।

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आंध्रप्रदेश से जुड़े तार खंगाल रही पुलिस

धर्मांतरण के मामले में तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने गहराई से छानबीन शुरू की है। एसपी श्रद्धा नरेंद्र पांडेय ने बताया नवाकांती सोसाइटी पूर्व में स्कूल के रूप में संचालित थी। पुलिस छानबीन में कुछ आईडी मिली है, जिन्हें संस्था के लोगों द्वारा एकत्र किया गया था। इससे यह पता चल सकेगा, कितने लोगों का अब तक धर्मांतरण कराया। जांच में मिले अभिलेख व बैंक अकाउंट की जांच की जा रही है। जिससे यह पता लगाया जा सके इसमें कहां से तार जुड़े हैं। एसपी ने बताया कि कन्नौज में कार्य हुआ, उसका भी जिले से लिंक है। इनकी संस्था आंध्रप्रदेश के मछली पटनम से पंजीकृत है, हो सकता है संस्था से जुड़े लोगों के और बड़े लिंक हो, इसकी भी गहना से जांच की जा रही है।

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पुलिस के हाथ लगी फोटो में दिख रहे विदेशी, फंडिंग की होगी जांच

एसआईटी की जांच में पकड़े गए आरोपियों के रिकार्ड से कुछ पुरानी फोटो हाथ लगीं हैं। साथ ही दर्ज कराई गई एफआईआर में रामभरोसे ने विदेश से संस्था को फंडिंग किए जाने के आरोप लगाए हैं। इस पर भी पुलिस कड़ी से कड़ी मिलाकर बारीकी से जांच कर रही है। एसपी ने बताया कि पुलिस को कुछ फोटो मिली हैं। इसमें कुछ फोटो में 15 से 20 व कुछ में 40 से 50 लोग बैठकर बाइबल पढ़ते दिख रहे हैं। इसमें कुछ विदेशी दिखने वाले लोग भी प्रार्थना करते दिख रहे हैं। इस आधार पर फोटो व बैंक अकाउंट का आकलन किया जा रहा है।

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युवाओं को जोड़ने के लिए ईसाई धर्म अपनाने पर देते थे जोर

पुलिस को रामभरोसे ने बताया कि वह खेती किसानी करता है। 10 पूर्व उसकी जब नवाकांति सोसाइटी में हरिओम से मुलाकात हुई तो उसने बेरोजगार युवाओ को जोड़ने के लिए कहा। धीरे-धीरे कर कई लोग संस्था से जुड़ गए। कुछ महिलाएं भी जुड़ गईं। जिन्हें सिलाई मशीन व रुपये दिए जाने का लालच दिया जाने लगा। बताया कि जब लोग जुड़ने लगे तो ईसाई धर्म की प्रार्थना होने लगी। इस बीच लोगों को ईसाई धर्म के उपदेश सुनने के लिए मेमोरी कार्ड दिए जाते थे। कुछ को रेडियो भी दिए गए। संस्था में दो लोग पैंट शर्ट पहन कर आते थे, जिनका नाम कभी नहीं बताया गया। वह जय मसीह से अभिवादन कर अपनी बात शुरू करते थे और जब बात खत्म होती थी तो भी जय मसीह बोलते थे। कन्नौज के ठठिया में संस्था का पन्नालाल पकड़ा गया तो मुझे पता चला कि धर्म बदलना कानूनी रूप से गलत है। यह लोग लोगों से बेरोजगारी व उनकी आर्थिक स्थिति का फायदा उठाकर धर्म परिवर्तन करा रहे है तो उसने विरोध किया। तीनों ने उसे धमकाया तब उसने पुलिस की शरण ली।
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