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Kaushambi : सावधान! बारिश और उमस भरी गर्मी से रिहायशी इलाकों को ठिकाना बना रहे विषथर

अमित कुमार सिंह, कौशांंबी Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 20 Jun 2026 12:56 PM IST
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सार

भीषण गर्मी और बारिश के मौसम ने ग्रामीण इलाकों में सर्पों की गतिविधियां बढ़ा दी हैं। खेतों, झाड़ियों और बिलों तक सीमित रहने वाले कोबरा, करैत, चेन वाइपर, आदि जहरीले सांप अब तेजी से घरों, आंगन, पशुशालाओं और आबादी वाले क्षेत्रों में दिखाई देने लगे हैं।

Beware! Venomous snakes are making residential areas their habitat due to the rain and humid heat.
कोबरा। - फोटो : संवाद।
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विस्तार

भीषण गर्मी और बारिश के मौसम ने ग्रामीण इलाकों में सर्पों की गतिविधियां बढ़ा दी हैं। खेतों, झाड़ियों और बिलों तक सीमित रहने वाले कोबरा, करैत, चेन वाइपर, आदि जहरीले सांप अब तेजी से घरों, आंगन, पशुशालाओं और आबादी वाले क्षेत्रों में दिखाई देने लगे हैं। इससे सर्पदंश की घटनाओं का जोखिम भी बढ़ चुका है। बीते दो महीनों के दौरान करीब आधा दर्जन लोगों की सर्पदंश के कारण मौत हो चुकी है।



ग्रामीण क्षेत्रों में घरों के आसपास जमा कबाड़, ईंटों और लकड़ी के ढेर, भूसा, घनी झाड़ियां, चूहों की अधिक मौजूदगी, खुली नालियां और दीवारों की दरारें सांपों को रुकने और छिपने के लिए अनुकूल वातावरण देती हैं। जबकि बारिश के दौरान पानी भरने से उनके प्राकृतिक ठिकाने प्रभावित होते हैं और वे ऊंचे व सूखे स्थानों की ओर बढ़ते हैं।
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सर्पदंश के जानलेवा खतरे से ऐसे करें बचाव 

डीएफओ पंकज कुमार शुक्ला के मुताबिक  घरों में सांप आने की संभावना कम करने के लिए परिसर की नियमित सफाई करें, झाड़ियों और ऊंची घास को हटाएं, अनाज व पशु चारा बंद स्थान पर रखें, चूहों की संख्या नियंत्रित करें और दरवाजों व दीवारों की दरारों को बंद करें। रात के समय घर के बाहर और शौच के लिए जाते समय टॉर्च का उपयोग करें तथा बच्चों को नंगे पैर बाहर न भेजें।

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Beware! Venomous snakes are making residential areas their habitat due to the rain and humid heat.
राम किशोर शुक्ला और विवेक तिवारी। - फोटो : संवाद।

झाड़ फूंक में की गई देरी, मौत की बड़ी वजह

 प्रभारी चिकित्सा अधिकारी सरसंवा डॉक्टर प्रसून जायसवाल का कहना है कि सर्पदंश होने पर प्रभावित अंग को स्थिर रखें और बिना देरी किए नजदीकी अस्पताल पहुंचें। सर्पदंश के बाद करीब 35 मिनट का समय बहुत महत्वपूर्ण होता है।झाड़-फूंक और घरेलू उपचार कई बार स्थिति को गंभीर बना सकते हैं।

इनका कहना है -

तिरहार इलाके में मई- जून से अक्टूबर महीनों के बीच सर्पदंश की घटनाएं तेजी से बढ़ती हैं। इलाके में नाग और करैत सांप अधिक दिखते हैं। बीते साल भवनसुरी गांव के दो लोगों की मौत हो चुकी है। -रामकिशोर शुक्ला, ग्रामीण 

 सरसंवा ब्लॉक का अधिकांश  हिस्सा यमुना नदी के किनारे बसे हुए गांवों के सीमांत  तिरहार इलाके का है। सर्पदंश के मामलों में उपचार के लिए जिला अस्पताल  रेफर किया जाता है, जो 40 किलोमीटर दूर है। इलाके में एक ट्रॉमा सेंटर बहुत जरूरी है। -  विवेक तिवारी ग्रामीण 

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