{"_id":"6a0f51556a36961483005bf5","slug":"infertility-and-hormonal-disorders-are-increasing-due-to-changing-lifestyles-kaushambi-news-c-261-1-pr11004-141787-2026-05-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kaushambi News: बदलती लाइफ स्टाइल से बढ़ रही बांझपन और हार्मोनल बीमारियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kaushambi News: बदलती लाइफ स्टाइल से बढ़ रही बांझपन और हार्मोनल बीमारियां
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Fri, 22 May 2026 12:09 AM IST
विज्ञापन
स्री रोग विभाग में मरीजों को देखती डॉ. विशाखा दीक्षित व डॉ. वर्षा केसरी। स्रोत: डॉक्टर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
महिलाओं में बांझपन, हार्मोनल इंबैलेंस और पीरियड अनियमितता जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। जिला अस्पताल की स्त्री रोग ओपीडी में हर दिन 100 से अधिक महिलाएं पहुंच रही हैं, जिनमें करीब 40 मरीज बांझपन की शिकायत से संबंधित होती हैं।
वहीं किशोरियों और युवतियों में भी मासिक धर्म अनियमित होने के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक बदलती जीवनशैली, तनाव, जंक फूड और जागरूकता की कमी इसके प्रमुख कारण बन रहे हैं।
जिला अस्पताल के स्त्री रोग विभाग की डॉक्टर वर्षा केसरी ने बताया कि पहले जहां महिलाएं लंबे समय बाद इलाज के लिए आती थीं, वहीं अब शादी के छह महीने बाद ही कई महिलाएं यह शिकायत लेकर आती हैं कि उन्हें गर्भधारण नहीं हो रहा है। उन्होंने बताया कि सामान्य रूप से शादी के बाद करीब एक साल तक इंतजार करना चाहिए। इसके बाद भी समस्या बनी रहे तो विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
विज्ञापन
Trending Videos
वहीं किशोरियों और युवतियों में भी मासिक धर्म अनियमित होने के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक बदलती जीवनशैली, तनाव, जंक फूड और जागरूकता की कमी इसके प्रमुख कारण बन रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
जिला अस्पताल के स्त्री रोग विभाग की डॉक्टर वर्षा केसरी ने बताया कि पहले जहां महिलाएं लंबे समय बाद इलाज के लिए आती थीं, वहीं अब शादी के छह महीने बाद ही कई महिलाएं यह शिकायत लेकर आती हैं कि उन्हें गर्भधारण नहीं हो रहा है। उन्होंने बताया कि सामान्य रूप से शादी के बाद करीब एक साल तक इंतजार करना चाहिए। इसके बाद भी समस्या बनी रहे तो विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।