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Kaushambi News: मकान के अंदर चल रही तरल यूरिया की फैक्टरी सीज
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किसानों के लिए सब्सिडी पर मिलने वाली यूरिया को मुनाफे का जरिया बनाकर पंसौर गांव में मकान के अंदर अवैध तरल यूरिया की अवैध फैक्टरी चलाई जा रही थी। बृहस्पतिवार को जिला कृषि विभाग और चरवा पुलिस की संयुक्त छापेमारी में पूरा खेल उजागर हो गया।
कार्रवाई के दौरान मकान के भीतर से 70 बोरी अनुदानित यूरिया, 71 डीईएफ बाल्टियां, 21 हजार लीटर क्षमता के टैंक, तरल यूरिया बनाने की मशीन, पंप, सीसीटीवी, इन्वर्टर, डीसीएम और महिंद्रा वाहन समेत भारी मात्रा में सामग्री मिली। पुलिस ने मौके से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि एक बाल अपचारी को संरक्षण में लिया।
मकान को सील कर आरोपियों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, ट्रेड मार्क अधिनियम और बीएनएस की धाराओं में एफआईआर दर्ज कर न्यायालय भेज दिया गया। बृहस्पतिवार को एसपी सत्यनारायण ने बताया कि जिला चरवा पुलिस और कृषि अधिकारी की संयुक्त कार्रवाई के दौरान पता पंसौर गांव के एक मकान में अनुदानित यूरिया से अवैध रूप से तरल यूरिया तैयार किया जा रहा है।
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सूचना पर कृषि विभाग और चरवा पुलिस ने संयुक्त छापेमारी की। बरामदगी में महिंद्रा वाहन में लदी 70 बोरी इफको यूरिया और डीसीएम में रखी डीईएफ की दर्जनों बाल्टियां मिलीं। पुलिस ने बड़ेगांव निवासी राजबहादुर और सुनील पासी और चंदौली के चकिया निवासी मानवेन्द्र सिंह को गिरफ्तार कर लिया।
- किसानों को नहीं मिल रही खाद, फिर तस्करों तक कैसे पहुंच गई 70 बोरी अनुदानित यूरिया
मंझनपुर। अनुदानित यूरिया किसानों को सरकार की ओर से निर्धारित मूल्य पर सहकारी समितियों और अधिकृत उर्वरक विक्रेताओं के माध्यम से आधार सत्यापन के बाद निर्धारित मात्रा में दी जाती है। नियमों के मुताबिक इसका उपयोग केवल कृषि कार्य के लिए किया जा सकता है। सवाल यह है कि जब किसान समितियों और दुकानों पर घंटों लाइन लगाने के बाद भी यूरिया नहीं पा रहे हैं, तब अवैध कारोबारियों तक 70 बोरी अनुदानित यूरिया कैसे पहुंच गई? संवाद
ऐसे बनाई जा रही थी तरल यूरिया
मंझनपुर। पुलिस के अनुसार पंसौर स्थित मकान में अनुदानित यूरिया को घोलकर अवैध रूप से तरल यूरिया तैयार किया जा रहा था। मौके से तरल यूरिया बनाने की मशीन, 21 बड़े टैंक, डीईएफ की बाल्टियां और अन्य उपकरण मिले। संवाद
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कार्रवाई के दौरान मकान के भीतर से 70 बोरी अनुदानित यूरिया, 71 डीईएफ बाल्टियां, 21 हजार लीटर क्षमता के टैंक, तरल यूरिया बनाने की मशीन, पंप, सीसीटीवी, इन्वर्टर, डीसीएम और महिंद्रा वाहन समेत भारी मात्रा में सामग्री मिली। पुलिस ने मौके से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि एक बाल अपचारी को संरक्षण में लिया।
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मकान को सील कर आरोपियों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, ट्रेड मार्क अधिनियम और बीएनएस की धाराओं में एफआईआर दर्ज कर न्यायालय भेज दिया गया। बृहस्पतिवार को एसपी सत्यनारायण ने बताया कि जिला चरवा पुलिस और कृषि अधिकारी की संयुक्त कार्रवाई के दौरान पता पंसौर गांव के एक मकान में अनुदानित यूरिया से अवैध रूप से तरल यूरिया तैयार किया जा रहा है।
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सूचना पर कृषि विभाग और चरवा पुलिस ने संयुक्त छापेमारी की। बरामदगी में महिंद्रा वाहन में लदी 70 बोरी इफको यूरिया और डीसीएम में रखी डीईएफ की दर्जनों बाल्टियां मिलीं। पुलिस ने बड़ेगांव निवासी राजबहादुर और सुनील पासी और चंदौली के चकिया निवासी मानवेन्द्र सिंह को गिरफ्तार कर लिया।
- किसानों को नहीं मिल रही खाद, फिर तस्करों तक कैसे पहुंच गई 70 बोरी अनुदानित यूरिया
मंझनपुर। अनुदानित यूरिया किसानों को सरकार की ओर से निर्धारित मूल्य पर सहकारी समितियों और अधिकृत उर्वरक विक्रेताओं के माध्यम से आधार सत्यापन के बाद निर्धारित मात्रा में दी जाती है। नियमों के मुताबिक इसका उपयोग केवल कृषि कार्य के लिए किया जा सकता है। सवाल यह है कि जब किसान समितियों और दुकानों पर घंटों लाइन लगाने के बाद भी यूरिया नहीं पा रहे हैं, तब अवैध कारोबारियों तक 70 बोरी अनुदानित यूरिया कैसे पहुंच गई? संवाद
ऐसे बनाई जा रही थी तरल यूरिया
मंझनपुर। पुलिस के अनुसार पंसौर स्थित मकान में अनुदानित यूरिया को घोलकर अवैध रूप से तरल यूरिया तैयार किया जा रहा था। मौके से तरल यूरिया बनाने की मशीन, 21 बड़े टैंक, डीईएफ की बाल्टियां और अन्य उपकरण मिले। संवाद