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Kaushambi News: भृगु एक्सप्रेस की चपेट में आकर मां-बेटी की मौत
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Mon, 26 Jan 2026 01:37 AM IST
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हादसे के बाद लोगों से जानकारी लेती जीआरपी। संवाद
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दिल्ली-हावड़ा रेल मार्ग पर स्थित सिराथू रेलवे स्टेशन पर रविवार सुबह दर्दनाक हादसा हो गया। ट्रैक पार करते समय कानपुर से प्रयागराज जा रही भृगु एक्सप्रेस की चपेट में आने से मां-बेटी की मौत हो गई। दोनों परिवार के साथ कानपुर शादी में जा रही थीं।
कड़ा धाम थाना क्षेत्र के गौसपुर नवावां गांव निवासी जाहिद खान सऊदी अरब में रहते हैं। उनकी पत्नी बानों (32) रविवार सुबह अपनी बेटी हमीरा (सात), बेटे अहान और परिवार के सात-आठ लोगों के साथ कानपुर जाने के लिए सुबह स्टेशन पहुंचीं। वहां रामादेवी में रहने वाली भतीजी समरीन की शादी में उनको सोमवार को शामिल होना था।
पैसेंजर ट्रेन पकड़ने के लिए सभी प्लेटफॉर्म नंबर एक से दो पर ट्रैक पार कर जाने लगे। परिवार के अन्य लोग आगे निकल गए। बानों और हमीरा पीछे रह गईं। पटरी से प्लेटफॉर्म पर चढ़ने के दौरान ही दोनों तेज गति से आ रही भृगु एक्सप्रेस की चपेट में आ गईं और उनके शरीर के चीथड़े उड़ गए। हादसे के बाद स्टेशन परिसर में अफरातफरी मच गई। मौके पर पहुंची जीआरपी ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
समय था लेकिन, नहीं किया पुल का प्रयोग
पैसेंजर ट्रेन का समय करीब आठ बजे है। सभी लोग सात बजे ही स्टेशन आ गए थे। पर्याप्त समय के बावजूद किसी ने पैदल पुल का इस्तेमाल नहीं किया। सभी प्लेटफॉर्म एक से उतरकर पैदल ही ट्रैक पार करने लगे। करीब 7:18 मिनट पर जैसे ही मां-बेटी पटरी पार कर प्लेटफॉर्म नंबर दो पर चढ़ने को हुईं, ट्रेन की चपेट में आ गईं। ट्रेन की तेज आवाज भी शायद कानों में नहीं पड़ी, नहीं तो करीब चार फिट पहले दूसरा ट्रैक खाली था। उस पर आने से जान बच सकती थी।
यह है प्लेटफॉर्म बदलने का नियम
स्टेशन अधीक्षक गोपाल जी वर्मा ने बताया कि रेलवे स्टेशन पर एक प्लेटफॉर्म से दूसरे पर जाने के लिए सबसे सुरक्षित व आधिकारिक तरीका फुट ओवरब्रिज है। कहीं पर अंडरपास भी बना है। इसका प्रयोग करना चाहिए। इसके अलावा अन्य किसी भी तरीके से एक प्लेटफॉर्म से दूसरे पर जाना दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।
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कड़ा धाम थाना क्षेत्र के गौसपुर नवावां गांव निवासी जाहिद खान सऊदी अरब में रहते हैं। उनकी पत्नी बानों (32) रविवार सुबह अपनी बेटी हमीरा (सात), बेटे अहान और परिवार के सात-आठ लोगों के साथ कानपुर जाने के लिए सुबह स्टेशन पहुंचीं। वहां रामादेवी में रहने वाली भतीजी समरीन की शादी में उनको सोमवार को शामिल होना था।
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पैसेंजर ट्रेन पकड़ने के लिए सभी प्लेटफॉर्म नंबर एक से दो पर ट्रैक पार कर जाने लगे। परिवार के अन्य लोग आगे निकल गए। बानों और हमीरा पीछे रह गईं। पटरी से प्लेटफॉर्म पर चढ़ने के दौरान ही दोनों तेज गति से आ रही भृगु एक्सप्रेस की चपेट में आ गईं और उनके शरीर के चीथड़े उड़ गए। हादसे के बाद स्टेशन परिसर में अफरातफरी मच गई। मौके पर पहुंची जीआरपी ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
समय था लेकिन, नहीं किया पुल का प्रयोग
पैसेंजर ट्रेन का समय करीब आठ बजे है। सभी लोग सात बजे ही स्टेशन आ गए थे। पर्याप्त समय के बावजूद किसी ने पैदल पुल का इस्तेमाल नहीं किया। सभी प्लेटफॉर्म एक से उतरकर पैदल ही ट्रैक पार करने लगे। करीब 7:18 मिनट पर जैसे ही मां-बेटी पटरी पार कर प्लेटफॉर्म नंबर दो पर चढ़ने को हुईं, ट्रेन की चपेट में आ गईं। ट्रेन की तेज आवाज भी शायद कानों में नहीं पड़ी, नहीं तो करीब चार फिट पहले दूसरा ट्रैक खाली था। उस पर आने से जान बच सकती थी।
यह है प्लेटफॉर्म बदलने का नियम
स्टेशन अधीक्षक गोपाल जी वर्मा ने बताया कि रेलवे स्टेशन पर एक प्लेटफॉर्म से दूसरे पर जाने के लिए सबसे सुरक्षित व आधिकारिक तरीका फुट ओवरब्रिज है। कहीं पर अंडरपास भी बना है। इसका प्रयोग करना चाहिए। इसके अलावा अन्य किसी भी तरीके से एक प्लेटफॉर्म से दूसरे पर जाना दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।

हादसे के बाद लोगों से जानकारी लेती जीआरपी। संवाद

हादसे के बाद लोगों से जानकारी लेती जीआरपी। संवाद
