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Kushinagar News: मोबाइल टॉवर की ऊंचाई से न्याय की गुहार...जमीन पर सुनवाई ही नहीं

संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Tue, 24 Mar 2026 01:28 AM IST
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A Plea for Justice from Atop a Mobile Tower... No Hearing to be Found on the Ground
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पडरौना। जिले में अपनी मांग मनवाने व प्रशासन से न्याय के लिए मोबाइल टॉवर पर चढ़कर आत्महत्या की धमकी देने के मामले बढ़े हैं। यह प्रशासन के लिए चुनौती भी है।
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भूमि विवाद, पारिवारिक कलह और उत्पीड़न आदि से तंग आकर जब न्याय की उम्मीद धुंधली दिखने लगती है, तो पीड़ित व्यक्ति मोबाइल टाॅवर की ऊंचाई को अपनी आखिरी उम्मीद का जरिया बना ले रहा है। टॉवर पर चढ़कर हाई वोल्टेज ड्रामा न केवल पुलिस प्रशासन की नींद उड़ा रहे हैं, बल्कि व्यवस्था के मौजूदा हालात को भी बयां कर रहे हैं। हालांकि, टॉवर पर चढ़कर जान देने की धमकी के बाद भी मामले का समाधान नहीं होता है। पीड़ितों को जब तहसील व थाना स्तर से न्याय नहीं मिलता है तो वे टॉवर पर चढ़ जाते हैं। उन्हें सुरक्षित टॉवर से उतरवाने में प्रशासन को घंटों मशक्कत करनी पड़ती है। आरोप है कि टॉवर से उतरवाने के बाद प्रशासन दिए गए आश्वासन को भूल जाता है और स्थिति जस की तस बनी रहती है। दोबारा पीड़ित उसी पुराने मामले को लेकर चक्कर लगाना शुरू कर देता है। इसके बावजूद उसकी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। 22 मार्च को एक बुजुर्ग पांच महीने के अंदर ही दूसरी बार टॉवर पर चढ़ गया। प्रशासन की ओर से फिर आश्वासन देकर व समझा-बुझाकर उसे किसी तरह सुरक्षित उतारा गया। बुजुर्ग को कब न्याय मिलेगा, इसकी कोई तिथि तय नहीं है।
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इच्छा मृत्यु की अनुमति की मांग कर चुके हैं हरेंद्र : पडरौना। पटहेरवा थाना क्षेत्र के बलुआ तकिया गांव निवासी हरेंद्र राय भाई के साथ चल रहे जमीन संबंधी विवाद में इच्छामृत्यु की अनुमति मांग चुके हैं। इसके बावजूद मामले का समाधान नहीं हो पाया है। उनका आरोप है कि 26 जुलाई 2025 को थाना समाधान दिवस में प्रार्थना पत्र दिया था। निस्तारण नहीं हुआ तो 2 अगस्त 2025 तहसीलदार तमकुहीराज को पत्र देकर कार्रवाई की मांग की थी। 20 अगस्त 2025 को डीएम से शिकायत की। इसके बाद उन्होंने 11 सितंबर 2025 को राज्यपाल को संबोधित प्रार्थना पत्र रजिस्टर्ड डाक को भेजा। राजस्व परिषद में शिकायत की और कार्रवाई की मांग की। जब कहीं से कोई राहत नहीं मिली तो 18 दिसंबर 2025 को राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपकर इच्छा मृत्यु की अनुमति की मांग की। इसके बावजूद कुछ नहीं हुआ तो 22 मार्च को फिर टॉवर पर चढ़ गए।
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