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Kushinagar News: गैस वितरण की डिजिटल व्यवस्था...सर्वर की सुस्ती से गोदामों पर लंबी कतार
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Mon, 30 Mar 2026 01:59 AM IST
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सेवरही के जीरो बांध पर गैस वितरण में जुटी प्रशासन व लोगों की भीड़।संवाद
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पडरौना। रसोई गैस की किल्लत के बीच वितरण प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए डिलीवरी आथेंटिकेशन कोड (डीएसी) और ई-केवाईसी जैसी व्यवस्थाएं की गई हैं। यह व्यवस्था बिचौलियों को खत्म करने और सही उपभोक्ता को गैस की आपूर्ति के लिए की गई है, लेकिन धरातल पर यह व्यवस्था सुविधा की जगह दुविधा बनती जा रही है। सर्वर की सुस्ती, बायोमेट्रिक विफलता और गोदामों पर लगने वाली लंबी कतारों ने उपभोक्ताओं के चूल्हे की आंच को तकनीकी फेर में फंसा कर रख दिया है।
गए नियम के अनुसार, सिलिंडर की डिलीवरी तभी पूरी होती है, जब उपभोक्ता के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आया डीएसी कोड हॉकर को दिया जाए। ऐसे में गैस की किल्लत व गोदामों पर रात में ही लग रही कतारों के बीच तमाम उपभोक्ता गोदाम ई-केवाईसी, डीएसी कोड व पर्ची कटवाने के फेर में उलझकर रह गए हैं, जिन्होंने लंबे समय से ई-केवाईसी नहीं कराई हैं।
हालात यह हैं कि एजेंसियों पर इन दिनों ई-केवाईसी कराने वालों की भीड़ लग रही है। यही नहीं, बिना ई-केवाईसी के सरकार की तरफ से दिया जा रहा अनुदान भी नहीं मिल पाएगा। इसके बीच सबसे बड़ी कठिनाई यह सामने आ रही है कि कंपनियों के सर्वर अक्सर डाउन चल रहे हैं। वहीं, बायोमेट्रिक मैच न होने से भी उपभोक्ताओं को परेशानी हो रही है। यह सब पूरा होने के बाद भी राहत नहीं है। उपभोक्ताओं को एजेंसी से पर्ची कटवाने के बाद सिलिंडर के लिए गोदाम तक चक्कर लगाना पड़ रहा है।
कप्तानगंज कस्बे के प्रमोद सिंह, मुकेश सिंह, योगेंद्र सिंह, मिथिलेश मिश्रा, परमहंस कुमार, रामप्रीत गुप्ता, प्रमोद कुमार श्रीवास्तव, गौरी शंकर वर्मा, जंग बहादुर खरवार ने कहा कि डीएसी कोड के लिए आधी रात से लेकर भोर तक गैस की बुकिंग के लिए जूझना पड़ रहा है। इसकी वजह है कि दिन में कंपनियों के सर्वर की रफ्तार सुस्त पड़ जा रही है। इनका कहना है कि अगर डीएसी कोड मिल गया तो गैस एजेंसी पर लाइन में लगकर सप्लाई पर्ची लेनी पड़ रही है।
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उपभोक्ता बोले:-
पहले सिलिंडर खत्म होने पर एजेंसी जाते थे और मिल जाता था। अब मोबाइल पर ओटीपी का चक्कर है। कभी नेटवर्क नहीं रहता, तो कभी ओटीपी ही नहीं आता। ऊपर से ई-केवाईसी के लिए एजेंसी का चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन हर बार सर्वर डाउन बताकर लौटा दिया जाता है। -रमजान अली, कप्तानगंज, कस्बावासी
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गैस लेने के लिए ई-केवाईसी जरूरी है। ऐसे में एजेंसियों पर लग रही भीड़ के बीच ई-केवाईसी के लिए पहुंचने पर लिंक फैल होने की बात सामने आ रही है। दो बार ई-केवाईसी के लिए एजेंसी पर गया था, लेकिन अभी हो नहीं पाया है। इसके चलते गैस नहीं मिल पा रही है। -प्रमोद श्रीवास्तव, कप्तानगंज,कस्बावासी
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डीएसी कोड और ई-केवाईसी के नाम पर घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। गैस एजेंसी और गोदाम के बीच कोई तालमेल नहीं है। एजेंसी से पर्ची कटती है और गोदाम पर जाने पर वहां गैस की उपलब्धता खत्म होने के चलते खाली सिलिंडर लेकर लौटना पड़ रहा है। -रामचंद्र सिंह, देवरिया बाबू
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होम डिलीवरी शुरू होना चाहिए, ताकि ग्रामीण इलाकों के उपभोक्ताओं को दूर एजेंसी तक न जाना पड़े। वहीं, जो भी तकनीकी समस्या है, उसे उपभोक्ताओं से जानकारी लेकर पूरी कर लेने की जरूरत है, ताकि उन्हें आ रही दिक्कत दूर हो जाए। -रोहित सिंह, भड़सर खास
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नहीं पहुंची गाड़ी, बिना गैस ही लौट गए उपभोक्ता
पटहेरवा। करीब एक महीने से चल रही रसोई गैस की किल्लत के बीच शनिवार को पटहेरिया में होम डिलीवरी की गाड़ी का दोपहर तक उपभोक्ता इंतजार करते रहे, लेकिन गाड़ी नहीं आई। मायूस होकर बिना गैस के ही उन्हें लौटना पड़ा। गैस के लिए लाइन में लगे ब्रजेश राव, राजकुमार गुप्ता, कन्हैया लाल, यूनुस खान, संतोष गुप्ता ने कहा कि लगातार पांच दिनों से होम डिलीवरी की गाड़ी आने की उम्मीद में पटहेरिया पहुंच रहे हैं। गाड़ी नहीं आने पर दोपहर बाद लौटना पड़ रहा है।
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गैस की गाड़ी पहुंची तो जुटी भीड़
तमकुहीरोड। घरेलू गैस की किल्लत कम होने का नाम नहीं ले रही है। पिपराघाट स्थित एचपी गैस एजेंसी पर रविवार को तीन दिन बाद गैस सिलिंडर लेकर गाड़ी पहुंची तो उपभोक्ताओं की भीड़ उमड़ पड़ी। गहमा-गहमी के बीच 306 गैस सिलिंडर का वितरण किया गया, जबकि रकबा दुलमा पट्टी स्थित इंडेन गैस एजेंसी पर उपभोक्ताओं को लंबी कतार लगी थी। उपभोक्ता उदयभान राय व पकड़ियार पूरब पट्टी के मुबारक अली ने होम डिलीवरी कराए जाने की मांग की।
कतार लगवाकर गैस का हुआ वितरण
गंगुआ बाजार। तमकुहीराज क्षेत्र के पिपरा बघेल स्थित इंडेन गैस एजेंसी पर रविवार को बेतरतीब खड़े उपभोक्ताओं को कतारबद्ध करवाकर गैस सिलिंडर का वितरण किया गया। गैस के लिए एजेंसी पर सुबह से उपभोक्ताओं की भीड़ जुट गई थी। एजेंसी के प्रबंधक शिवदयाल ने उपभोक्ताओं से कतारबद्ध होकर गैस सिलिंडर लेने के लिए अपील की तो सभी उपभोक्ता कतारबद्ध हो गए और बारी-बारी गैस सिलिंडर लेकर चले गए। मौजूद कुछ उपभोक्ताओं का कहना था कि बुकिंग के बाद तत्काल ओटीपी नहीं आ रहा है। मौजूद सभी उपभोक्ताओं को गैस वितरण किया गया।
वर्जन:-
ई-केवाईसी और डीएसी की प्रक्रिया सरकार के निर्देश के अनुसार अनिवार्य है। गैस वितरण में आ रही तकनीकी समस्याओं और सर्वर की सुस्ती का मामला संज्ञान में है। गैस एजेंसी संचालकों व हॉकरों की तरफ से अगर कोई गड़बड़ी का मामले सामने आएगा तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उपभोक्ता इसकी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं। -कृष्ण गोपाल पांडेय, डीएसओ,कुशीनगर
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गए नियम के अनुसार, सिलिंडर की डिलीवरी तभी पूरी होती है, जब उपभोक्ता के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आया डीएसी कोड हॉकर को दिया जाए। ऐसे में गैस की किल्लत व गोदामों पर रात में ही लग रही कतारों के बीच तमाम उपभोक्ता गोदाम ई-केवाईसी, डीएसी कोड व पर्ची कटवाने के फेर में उलझकर रह गए हैं, जिन्होंने लंबे समय से ई-केवाईसी नहीं कराई हैं।
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हालात यह हैं कि एजेंसियों पर इन दिनों ई-केवाईसी कराने वालों की भीड़ लग रही है। यही नहीं, बिना ई-केवाईसी के सरकार की तरफ से दिया जा रहा अनुदान भी नहीं मिल पाएगा। इसके बीच सबसे बड़ी कठिनाई यह सामने आ रही है कि कंपनियों के सर्वर अक्सर डाउन चल रहे हैं। वहीं, बायोमेट्रिक मैच न होने से भी उपभोक्ताओं को परेशानी हो रही है। यह सब पूरा होने के बाद भी राहत नहीं है। उपभोक्ताओं को एजेंसी से पर्ची कटवाने के बाद सिलिंडर के लिए गोदाम तक चक्कर लगाना पड़ रहा है।
कप्तानगंज कस्बे के प्रमोद सिंह, मुकेश सिंह, योगेंद्र सिंह, मिथिलेश मिश्रा, परमहंस कुमार, रामप्रीत गुप्ता, प्रमोद कुमार श्रीवास्तव, गौरी शंकर वर्मा, जंग बहादुर खरवार ने कहा कि डीएसी कोड के लिए आधी रात से लेकर भोर तक गैस की बुकिंग के लिए जूझना पड़ रहा है। इसकी वजह है कि दिन में कंपनियों के सर्वर की रफ्तार सुस्त पड़ जा रही है। इनका कहना है कि अगर डीएसी कोड मिल गया तो गैस एजेंसी पर लाइन में लगकर सप्लाई पर्ची लेनी पड़ रही है।
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उपभोक्ता बोले:-
पहले सिलिंडर खत्म होने पर एजेंसी जाते थे और मिल जाता था। अब मोबाइल पर ओटीपी का चक्कर है। कभी नेटवर्क नहीं रहता, तो कभी ओटीपी ही नहीं आता। ऊपर से ई-केवाईसी के लिए एजेंसी का चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन हर बार सर्वर डाउन बताकर लौटा दिया जाता है। -रमजान अली, कप्तानगंज, कस्बावासी
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गैस लेने के लिए ई-केवाईसी जरूरी है। ऐसे में एजेंसियों पर लग रही भीड़ के बीच ई-केवाईसी के लिए पहुंचने पर लिंक फैल होने की बात सामने आ रही है। दो बार ई-केवाईसी के लिए एजेंसी पर गया था, लेकिन अभी हो नहीं पाया है। इसके चलते गैस नहीं मिल पा रही है। -प्रमोद श्रीवास्तव, कप्तानगंज,कस्बावासी
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डीएसी कोड और ई-केवाईसी के नाम पर घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। गैस एजेंसी और गोदाम के बीच कोई तालमेल नहीं है। एजेंसी से पर्ची कटती है और गोदाम पर जाने पर वहां गैस की उपलब्धता खत्म होने के चलते खाली सिलिंडर लेकर लौटना पड़ रहा है। -रामचंद्र सिंह, देवरिया बाबू
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होम डिलीवरी शुरू होना चाहिए, ताकि ग्रामीण इलाकों के उपभोक्ताओं को दूर एजेंसी तक न जाना पड़े। वहीं, जो भी तकनीकी समस्या है, उसे उपभोक्ताओं से जानकारी लेकर पूरी कर लेने की जरूरत है, ताकि उन्हें आ रही दिक्कत दूर हो जाए। -रोहित सिंह, भड़सर खास
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नहीं पहुंची गाड़ी, बिना गैस ही लौट गए उपभोक्ता
पटहेरवा। करीब एक महीने से चल रही रसोई गैस की किल्लत के बीच शनिवार को पटहेरिया में होम डिलीवरी की गाड़ी का दोपहर तक उपभोक्ता इंतजार करते रहे, लेकिन गाड़ी नहीं आई। मायूस होकर बिना गैस के ही उन्हें लौटना पड़ा। गैस के लिए लाइन में लगे ब्रजेश राव, राजकुमार गुप्ता, कन्हैया लाल, यूनुस खान, संतोष गुप्ता ने कहा कि लगातार पांच दिनों से होम डिलीवरी की गाड़ी आने की उम्मीद में पटहेरिया पहुंच रहे हैं। गाड़ी नहीं आने पर दोपहर बाद लौटना पड़ रहा है।
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गैस की गाड़ी पहुंची तो जुटी भीड़
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कतार लगवाकर गैस का हुआ वितरण
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वर्जन:-
ई-केवाईसी और डीएसी की प्रक्रिया सरकार के निर्देश के अनुसार अनिवार्य है। गैस वितरण में आ रही तकनीकी समस्याओं और सर्वर की सुस्ती का मामला संज्ञान में है। गैस एजेंसी संचालकों व हॉकरों की तरफ से अगर कोई गड़बड़ी का मामले सामने आएगा तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उपभोक्ता इसकी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं। -कृष्ण गोपाल पांडेय, डीएसओ,कुशीनगर

सेवरही के जीरो बांध पर गैस वितरण में जुटी प्रशासन व लोगों की भीड़।संवाद

सेवरही के जीरो बांध पर गैस वितरण में जुटी प्रशासन व लोगों की भीड़।संवाद

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