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Kushinagar News: प्रधानाचार्यों के लिए अनिवार्य नहीं करें अंकेक्षण का कार्य
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Tue, 24 Mar 2026 01:26 AM IST
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पडरौना। प्रधानाचार्य परिषद के पदाधिकारियों ने सोमवार को माध्यमिक शिक्षा परिषद प्रयागराज के सचिव भगवती सिंह से मुलाकात की। प्रधानाचार्य के पद एवं दायित्वों को देखते हुए उनके लिए अंकेक्षण का कार्य अनिवार्य नहीं करने की मांग की।
प्रधानाचार्य परिषद के अध्यक्ष डॉ. मणि शंकर तिवारी ने कहा कि पूर्व में अंकेक्षण कार्य सामान्य रूप से शिक्षक एवं प्रधानाचार्य संपादित करते रहे हैं।
इस वर्ष केवल प्रधानाचार्यों को अनिवार्य रूप से इस कार्य में लगाया गया है। प्रधानाचार्यों ने कहा कि उनके ऊपर विद्यालय संचालन से संबंधित कई महत्वपूर्ण दायित्व होते हैं। अंकेक्षण कार्य में पूरा समय देना उनके लिए कठिन हो जाता है।
सचिव ने बताया कि पिछले वर्षों में मूल्यांकन कार्य में अनेक त्रुटियां पाई गई हैं। उन्हें दूर करने के लिए इस वर्ष से अंकेक्षण कार्य को गंभीरता से लेते हुए प्रधानाचार्यों को यह दायित्व सौंपा गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानाचार्यों के अनुभव से मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी। सचिव ने बताया कि परिषद की तरफ से अंकेक्षण कार्य के लिए पारिश्रमिक इस वर्ष बढ़ाकर 14 रुपये प्रति उत्तरपुस्तिका कर दिया गया है।
उन्होंने यह भी बताया कि अगले सत्र से उत्तर पुस्तिकाओं एवं प्रश्नपत्रों के विद्यालयों तक वितरण, परीक्षा के उपरांत मूल्यांकन केंद्रों तक उत्तर पुस्तिकाओं को पहुंचाने और उत्तर पुस्तिका को मूल्यांकन केंद्र से संकलन केंद्र तक पहुंचाने के दायित्व से विद्यालय को मुक्त कर एजेंसी को सौंपने की व्यवस्था और पारिश्रमिक दर में वृद्धि जैसे कई सुधारात्मक कदम प्रस्तावित किए गए हैं।
इस दौरान परिषद के संरक्षक श्रीनिवास शुक्ल, महामंत्री शैलेंद्र दत्त शुक्ल, राजेंद्र कुमार बाजपेयी, डॉ. रवींद्र त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
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प्रधानाचार्य परिषद के अध्यक्ष डॉ. मणि शंकर तिवारी ने कहा कि पूर्व में अंकेक्षण कार्य सामान्य रूप से शिक्षक एवं प्रधानाचार्य संपादित करते रहे हैं।
इस वर्ष केवल प्रधानाचार्यों को अनिवार्य रूप से इस कार्य में लगाया गया है। प्रधानाचार्यों ने कहा कि उनके ऊपर विद्यालय संचालन से संबंधित कई महत्वपूर्ण दायित्व होते हैं। अंकेक्षण कार्य में पूरा समय देना उनके लिए कठिन हो जाता है।
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सचिव ने बताया कि पिछले वर्षों में मूल्यांकन कार्य में अनेक त्रुटियां पाई गई हैं। उन्हें दूर करने के लिए इस वर्ष से अंकेक्षण कार्य को गंभीरता से लेते हुए प्रधानाचार्यों को यह दायित्व सौंपा गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानाचार्यों के अनुभव से मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी। सचिव ने बताया कि परिषद की तरफ से अंकेक्षण कार्य के लिए पारिश्रमिक इस वर्ष बढ़ाकर 14 रुपये प्रति उत्तरपुस्तिका कर दिया गया है।
उन्होंने यह भी बताया कि अगले सत्र से उत्तर पुस्तिकाओं एवं प्रश्नपत्रों के विद्यालयों तक वितरण, परीक्षा के उपरांत मूल्यांकन केंद्रों तक उत्तर पुस्तिकाओं को पहुंचाने और उत्तर पुस्तिका को मूल्यांकन केंद्र से संकलन केंद्र तक पहुंचाने के दायित्व से विद्यालय को मुक्त कर एजेंसी को सौंपने की व्यवस्था और पारिश्रमिक दर में वृद्धि जैसे कई सुधारात्मक कदम प्रस्तावित किए गए हैं।
इस दौरान परिषद के संरक्षक श्रीनिवास शुक्ल, महामंत्री शैलेंद्र दत्त शुक्ल, राजेंद्र कुमार बाजपेयी, डॉ. रवींद्र त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।