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Kushinagar News: असम से कुशीनगर तक गांजा तस्करों का जाल, पुलिस खंगाल रही नेटवर्क
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Fri, 17 Apr 2026 03:03 AM IST
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पडरौना। जिले में गांजा तस्करी के संगठित नेटवर्क की परतें खुलीं तो इसमें खाकी की संलिप्तता मिली। इस मामले में तस्करों समेत दो सिपाही जेल भेजे जा चुके हैं। पूछताछ में कई अहम जानकारियां पुलिस के हाथ लगी हैं। एसपी के निर्देश पर असम से कुशीनगर तक सक्रिय गिरोह पर शिकंजा कसने के लिए पुलिस नेटवर्क को खंगाल रही है। तस्करी में पुलिसकर्मियों की मिलीभगत सामने आने के बाद जांच तेज कर दी गई है। इसमें शामिल चार आरोपी अभी पुलिस की पकड़ से दूर हैं। पुलिस की जांच में गिरोह से जुड़े कई और तस्करों का नाम सामने आ सकते हैं।
जिले में अक्सर गांजा तस्करी की खेप के साथ तस्कर पकड़े जाते हैं। कुछ समय पहले गांजा तस्करी के मामले में सिपाहियों की संलिप्तता उजागर होने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया था। गांजा तस्करी के मामले में रामकोला पुलिस की कार्रवाई में चार सिपाहियों के शामिल होने की पुष्टि हुई। इस आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर दो आरोपी सिपाहियों को तस्करों के साथ पुलिस ने जेल भिजवा दिया था। अब इस पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने के लिए पुलिस ने व्यापक जांच शुरू कर दी है और फरार आरोपियों की तलाश जारी है।
पुलिस की शुरुआती जांच में स्पष्ट हुआ है कि गांजा तस्करी का यह कोई सामान्य मामला नहीं, बल्कि संगठित अंतरराज्यीय नेटवर्क है। असम से निकलने वाली गांजा की खेप पूर्वांचल के रास्ते कुशीनगर लाई जाती थी। यहां से इसे बिहार समेत अन्य इलाकों में खपा दी जाती थी। इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू पुलिसकर्मियों की संलिप्तता रही। जांच में सामने आया कि कुछ सिपाही तस्करों को सेफ पैसेज दिलाने, चेकिंग से बचाने और सूचना लीक करने में मदद कर रहे थे।
मामला सामने आते ही एसपी ने सख्त रुख अपनाते हुए विभागीय जांच कराई और दोषी पाए गए सिपाहियों को निलंबित कर दिया। बाद में साक्ष्य मिलने पर दो सिपाहियों को गिरफ्तार कर जेल भिजवा दिया गया। हालांकि, इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपी अभी भी फरार हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है। भले ही सिपाहियों के इस मामले में संलिप्त पाए जाने के बाद मामला तूल पकड़ा हो, लेकिन कुशीनगर की सीमा, रास्ते और भौगोलिक परिस्थिति मुख्य रूप से गांजा तस्करी के लिए मुफीद भी हैं। पूर्व में पकड़े गए कई खेप में इस बात का खुलासा भी हुआ था। गांजा की छोटी-छोटी खेप कुशीनगर के ग्रामीण इलाकों में पान-गुटका की दुकानों और गुमटियों तक पहुंचती है। अब एसपी के सख्त होने के बाद सीमावर्ती इलाकों और प्रमुख मार्गों पर चेकिंग अभियान भी तेज कर दिया गया है।
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ट्रांजिट कॉरिडोर के रूप उभर रहा कुशीनगर
कुशीनगर का भूगोल इसे यूपी-बिहार-नेपाल के बीच एक अहम ट्रांजिट नोड बना देता है। तस्करी के लिए यह क्षेत्र मुफीद साबित हो रहा है। कुशीनगर के ठीक उत्तर में नेपाल की खुली सीमा से आवाजाही अपेक्षाकृत आसान है। कारण कि कई छोटे अनौपचारिक रास्ते (कच्चे मार्ग) मौजूद हैं। यह सीमा पार नेटवर्क को जोड़ने का प्राकृतिक माध्यम बनती है। दूसरी ओर, पूर्व दिशा में पश्चिम चंपारण और दक्षिण-पूर्व में गोपालगंज जैसे जिले हैं, जो पहले से ही अंतरराज्यीय आवाजाही के महत्वपूर्ण गलियारे रहे हैं। इन इलाकों की ग्रामीण सड़कें और सीमावर्ती संपर्क मार्ग बड़े वाहनों के बजाय छोटे, तेज और कम निगरानी वाले परिवहन के लिए उपयुक्त माने जाते हैं। इसी भूगोल के बीच से गुजरते हैं प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग (जैसे एनएच-28, एनएच-27 और अन्य लिंक रोड), जो गोरखपुर को बिहार और आगे पूर्वोत्तर भारत से जोड़ते हैं। यही हाईवे नेटवर्क तस्करों को लॉन्ग रूट कवरेज देता है अर्थात असम से आने वाली खेप को बिना ज्यादा रुकावट के पूर्वांचल तक लाया जा सकता है।
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...इस तरह बनता है तस्करी का कॉरिडोर
असम और पूर्वोत्तर के इलाकों से गांजा की सप्लाई संगठित तरीके से होती है। एनएच के जरिए लंबी दूरी तय करते हुए पूर्वांचल में पहुंचती है। इस रूट में कुशीनगर महत्वपूर्ण ट्रांजिट प्वाइंट के रूप में उभरा है। यहां तस्कर अक्सर बड़ी खेप को छोटे-छोटे हिस्सों में (दुकानों, फुटकर विक्रेताओं) को बांट देते हैं ताकि जोखिम कम हो सके। इसके बाद खेप को अलग-अलग रास्तों से आगे भेजा जाता है। कुछ खेप नेपाल सीमा पार करा दी जाती है। बाकी पश्चिम चंपारण और गोपालगंज के रास्ते बिहार में पहुंचा दी जाती है। स्थानीय स्तर पर ग्रामीण सड़कों, कम निगरानी वाले मार्गों का इस्तेमाल किया जाता है।
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गांजा तस्करों का नेटवर्क तोड़ने के लिए पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। इसमें शामिल आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है। असम से कुशीनगर तक गांजा की खेप पहुंचाने वाले गिरोह में शामिल गुर्गों की पहचान करने में पुलिस जुटी है। - केशव कुमार, एसपी कुशीनगर
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जिले में अक्सर गांजा तस्करी की खेप के साथ तस्कर पकड़े जाते हैं। कुछ समय पहले गांजा तस्करी के मामले में सिपाहियों की संलिप्तता उजागर होने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया था। गांजा तस्करी के मामले में रामकोला पुलिस की कार्रवाई में चार सिपाहियों के शामिल होने की पुष्टि हुई। इस आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर दो आरोपी सिपाहियों को तस्करों के साथ पुलिस ने जेल भिजवा दिया था। अब इस पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने के लिए पुलिस ने व्यापक जांच शुरू कर दी है और फरार आरोपियों की तलाश जारी है।
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पुलिस की शुरुआती जांच में स्पष्ट हुआ है कि गांजा तस्करी का यह कोई सामान्य मामला नहीं, बल्कि संगठित अंतरराज्यीय नेटवर्क है। असम से निकलने वाली गांजा की खेप पूर्वांचल के रास्ते कुशीनगर लाई जाती थी। यहां से इसे बिहार समेत अन्य इलाकों में खपा दी जाती थी। इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू पुलिसकर्मियों की संलिप्तता रही। जांच में सामने आया कि कुछ सिपाही तस्करों को सेफ पैसेज दिलाने, चेकिंग से बचाने और सूचना लीक करने में मदद कर रहे थे।
मामला सामने आते ही एसपी ने सख्त रुख अपनाते हुए विभागीय जांच कराई और दोषी पाए गए सिपाहियों को निलंबित कर दिया। बाद में साक्ष्य मिलने पर दो सिपाहियों को गिरफ्तार कर जेल भिजवा दिया गया। हालांकि, इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपी अभी भी फरार हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है। भले ही सिपाहियों के इस मामले में संलिप्त पाए जाने के बाद मामला तूल पकड़ा हो, लेकिन कुशीनगर की सीमा, रास्ते और भौगोलिक परिस्थिति मुख्य रूप से गांजा तस्करी के लिए मुफीद भी हैं। पूर्व में पकड़े गए कई खेप में इस बात का खुलासा भी हुआ था। गांजा की छोटी-छोटी खेप कुशीनगर के ग्रामीण इलाकों में पान-गुटका की दुकानों और गुमटियों तक पहुंचती है। अब एसपी के सख्त होने के बाद सीमावर्ती इलाकों और प्रमुख मार्गों पर चेकिंग अभियान भी तेज कर दिया गया है।
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ट्रांजिट कॉरिडोर के रूप उभर रहा कुशीनगर
कुशीनगर का भूगोल इसे यूपी-बिहार-नेपाल के बीच एक अहम ट्रांजिट नोड बना देता है। तस्करी के लिए यह क्षेत्र मुफीद साबित हो रहा है। कुशीनगर के ठीक उत्तर में नेपाल की खुली सीमा से आवाजाही अपेक्षाकृत आसान है। कारण कि कई छोटे अनौपचारिक रास्ते (कच्चे मार्ग) मौजूद हैं। यह सीमा पार नेटवर्क को जोड़ने का प्राकृतिक माध्यम बनती है। दूसरी ओर, पूर्व दिशा में पश्चिम चंपारण और दक्षिण-पूर्व में गोपालगंज जैसे जिले हैं, जो पहले से ही अंतरराज्यीय आवाजाही के महत्वपूर्ण गलियारे रहे हैं। इन इलाकों की ग्रामीण सड़कें और सीमावर्ती संपर्क मार्ग बड़े वाहनों के बजाय छोटे, तेज और कम निगरानी वाले परिवहन के लिए उपयुक्त माने जाते हैं। इसी भूगोल के बीच से गुजरते हैं प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग (जैसे एनएच-28, एनएच-27 और अन्य लिंक रोड), जो गोरखपुर को बिहार और आगे पूर्वोत्तर भारत से जोड़ते हैं। यही हाईवे नेटवर्क तस्करों को लॉन्ग रूट कवरेज देता है अर्थात असम से आने वाली खेप को बिना ज्यादा रुकावट के पूर्वांचल तक लाया जा सकता है।
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...इस तरह बनता है तस्करी का कॉरिडोर
असम और पूर्वोत्तर के इलाकों से गांजा की सप्लाई संगठित तरीके से होती है। एनएच के जरिए लंबी दूरी तय करते हुए पूर्वांचल में पहुंचती है। इस रूट में कुशीनगर महत्वपूर्ण ट्रांजिट प्वाइंट के रूप में उभरा है। यहां तस्कर अक्सर बड़ी खेप को छोटे-छोटे हिस्सों में (दुकानों, फुटकर विक्रेताओं) को बांट देते हैं ताकि जोखिम कम हो सके। इसके बाद खेप को अलग-अलग रास्तों से आगे भेजा जाता है। कुछ खेप नेपाल सीमा पार करा दी जाती है। बाकी पश्चिम चंपारण और गोपालगंज के रास्ते बिहार में पहुंचा दी जाती है। स्थानीय स्तर पर ग्रामीण सड़कों, कम निगरानी वाले मार्गों का इस्तेमाल किया जाता है।
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गांजा तस्करों का नेटवर्क तोड़ने के लिए पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। इसमें शामिल आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है। असम से कुशीनगर तक गांजा की खेप पहुंचाने वाले गिरोह में शामिल गुर्गों की पहचान करने में पुलिस जुटी है। - केशव कुमार, एसपी कुशीनगर
