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Kushinagar News: विदेश में नाैकरी के नाम पर मानव तस्करी का खेल
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पडरौना । विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर मानव तस्करी की जा रही है। इसका पूरा नेटवर्क काम कर रहा है, जो जिले से लेकर विदेश तक फैला है। अभी हाल ही में जिन चार युवकों अहिरौली थाना क्षेत्र के चिलुवा गांव निवासी जितेंद्र सिंह, सुनील कुमार गौड़, खजुरिया गांव निवासी रामानंद, मोतिचक गांव निवासी अमित कुमार के कजाकिस्तान के अलमाटी में फंसे होने का मामला सामने आया है उनके वीजा, टिकट और हालात का विश्लेषण करने पर स्पष्ट हो जाता है कि यह सिर्फ सामान्य धोखाधड़ी नहीं बल्कि संगठित मानव तस्करी का मामला है। इसमें स्थानीय एजेंट शामिल हैं, जो लोगाें की मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं।
फ्लाइट से ही शुरू हुआ धोखे का सफर
पीड़ितों के दस्तावेजों और यात्रा विवरण के मुताबिक चारों युवक दो बार में (17 सितंबर और 19 सितंबर 2025 को ) इंडिगो एयरलाइन के विमान से कजाकिस्तान की राजधानी अलमाटी भेजे गए। उन्हें किर्गिस्तान में नौकरी का वीजा दिया गया था। उन्हें बताया गया कि अलमाटी से किर्गिस्तान भेजा जाएगा लेकिन किर्गिस्तान की किसी कनेक्टिंग फ्लाइट का टिकट नहीं दिया गया। यानी सभी युवकों को जानबूझकर गलत देश में उतारा गया। यह कोई तकनीकी चूक नहीं, बल्कि पूर्व नियोजित रणनीति थी।
कागज में किर्गिस्तान, ज़मीन पर कजाकिस्तान
युवकों को किर्गिस्तान में नौकरी दिलाने की बात कही गई थी। उन्हें वर्किंग वीजा भी दिया गया पर सिर्फ 59 दिन का। सभी वीजा एक ही कंपनी (Nur-Kat Stroy) के थे। खास बात यह कि उन्हें अलमाटी भी भेजा गया तो वीजा अवधि एक महीने खत्म होने के बाद। अलमाटी पहुंचने के बाद युवकों को पहले एक होटल फिर फ्लैट में ठहराया गया। कहा गया कि ‘कुछ दिन में बिश्केक (किर्गिस्तान की राजधानी) भेज देंगे’ पर अलमाटी में ही वीज़ा की शेष अवधि भी निकल गई। एजेंट और उसके संपर्क गायब हो गए। दो युवकों के पासपोर्ट भी एजेंट के विदेशी नेटवर्क ने अपने कब्जे में ले लिए। कजाकिस्तान का वीजा नहीं होने के बावजूद उन्हें गलत तरीके से वहां काम कराया गया और उनके लिए ओवरस्टे जैसे हालात बनाए गए।
एक ही कंपनी, एक ही पैटर्न महज संयोग नहीं
जांच में यह भी सामने आया कि सभी युवकों का वीज़ा एक ही कंपनी के नाम पर, वीज़ा की वैधता और शर्तें एक जैसी, यात्रा की तारीख और रूट भी एक ही। इससे साफ है कि युवकों को बैच में भेजा गया, जो संगठित नेटवर्क के बिना संभव नहीं। संभव है और भी लड़के इनके जाल में फंस हों।
पुलिस पर केस दर्ज नहीं करने का आरोप
अहिरौली थाना क्षेत्र के चिलुवा गांव निवासी जितेंद्र सिंह व सुनील कुमार गौड़, खजुरिया गांव निवासी रामानंद और मोतिचक गांव निवासी अमित कुमार अलमाटी में करीब चार महीने से फंसे हैं। यहां उनके परिजन हर पल किसी अनहोनी आशंका में जी रहे हैं।
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फ्लाइट से ही शुरू हुआ धोखे का सफर
पीड़ितों के दस्तावेजों और यात्रा विवरण के मुताबिक चारों युवक दो बार में (17 सितंबर और 19 सितंबर 2025 को ) इंडिगो एयरलाइन के विमान से कजाकिस्तान की राजधानी अलमाटी भेजे गए। उन्हें किर्गिस्तान में नौकरी का वीजा दिया गया था। उन्हें बताया गया कि अलमाटी से किर्गिस्तान भेजा जाएगा लेकिन किर्गिस्तान की किसी कनेक्टिंग फ्लाइट का टिकट नहीं दिया गया। यानी सभी युवकों को जानबूझकर गलत देश में उतारा गया। यह कोई तकनीकी चूक नहीं, बल्कि पूर्व नियोजित रणनीति थी।
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कागज में किर्गिस्तान, ज़मीन पर कजाकिस्तान
युवकों को किर्गिस्तान में नौकरी दिलाने की बात कही गई थी। उन्हें वर्किंग वीजा भी दिया गया पर सिर्फ 59 दिन का। सभी वीजा एक ही कंपनी (Nur-Kat Stroy) के थे। खास बात यह कि उन्हें अलमाटी भी भेजा गया तो वीजा अवधि एक महीने खत्म होने के बाद। अलमाटी पहुंचने के बाद युवकों को पहले एक होटल फिर फ्लैट में ठहराया गया। कहा गया कि ‘कुछ दिन में बिश्केक (किर्गिस्तान की राजधानी) भेज देंगे’ पर अलमाटी में ही वीज़ा की शेष अवधि भी निकल गई। एजेंट और उसके संपर्क गायब हो गए। दो युवकों के पासपोर्ट भी एजेंट के विदेशी नेटवर्क ने अपने कब्जे में ले लिए। कजाकिस्तान का वीजा नहीं होने के बावजूद उन्हें गलत तरीके से वहां काम कराया गया और उनके लिए ओवरस्टे जैसे हालात बनाए गए।
एक ही कंपनी, एक ही पैटर्न महज संयोग नहीं
जांच में यह भी सामने आया कि सभी युवकों का वीज़ा एक ही कंपनी के नाम पर, वीज़ा की वैधता और शर्तें एक जैसी, यात्रा की तारीख और रूट भी एक ही। इससे साफ है कि युवकों को बैच में भेजा गया, जो संगठित नेटवर्क के बिना संभव नहीं। संभव है और भी लड़के इनके जाल में फंस हों।
पुलिस पर केस दर्ज नहीं करने का आरोप
अहिरौली थाना क्षेत्र के चिलुवा गांव निवासी जितेंद्र सिंह व सुनील कुमार गौड़, खजुरिया गांव निवासी रामानंद और मोतिचक गांव निवासी अमित कुमार अलमाटी में करीब चार महीने से फंसे हैं। यहां उनके परिजन हर पल किसी अनहोनी आशंका में जी रहे हैं।
