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Kushinagar News: जश्न पर खुफिया एजेंसियों की पैनी नजर... बॉर्डर पर बढ़ी चौकसी
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Mon, 09 Mar 2026 02:42 AM IST
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सिद्धार्थनगर। ईद और नेपाल में हुए चुनाव के बाद नई सरकार बनने वाली है। ऐसे में सीमावर्ती इलाके में सुरक्षा एजेंसियों का मूवमेंट तेज हो गया है। त्योहार और नई सरकार बनने के जश्न में युवाओं के उल्लास के बीच कोई माहौल को खराब न करे और अशांति की स्थिति न बने, इसे देखते हुए दोनों देशों की जांच एजेंसियां सक्रिय हो गईं हैं। वहीं, चुनाव और त्योहार को देखते हुए सीमावर्ती थानों की पुलिस ने भी गश्त और निगरानी तेज कर दी है।
जिले की 68 किलोमीटर सीमा नेपाल बॉर्डर से लगती है। इसमें ककरहवा, अलीगढ़हवा, खुनुवां और बढ़नी बॉर्डर मुख्य केंद्र है। यहां से वाहनों की आवाजाही होती है। इसके अलावा अन्य रास्तों के अलावा पगडंडी से भी लोग आते-जाते हैं। नेपाल में चुनाव को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने और किसी भी तरह की गड़बड़ी की आशंका को देखते हुए दो से पांच मार्च की मध्यरात्रि तक भारत-नेपाल सीमा को पूरी तरह सील कर दिया गया था। इस दौरान सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा बलों ने कड़ी चौकसी बरती और किसी को भी सीमा पार करने की अनुमति नहीं दी गई। तीन दिन तक सीमा बंद रहने के बाद 6 मार्च से पाबंदी हटा दी गई है, जिसके बाद अब दोनों देशों के बीच सामान्य आवाजाही शुरू हो गई है। हालांकि, सीमा खुलने के बाद भी सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं।
सूत्रों के अनुसार चुनाव परिणाम में नई और बालेंद्र शाह की सरकार बनने की उम्मीद के बीच नेपाल की सुरक्षा एजेंसी और सक्रिय हो गईं हैं। नेपाल के सुरक्षा से जुड़े जानकारों का मनाना है कि जेन-जी आंदोलन की आग में बाद नेपाल में सरकार गिर गई। इसे गिराने वाले युवा ही थे। विरोध में हुई कार्रवाई और युवाओं के मौत और भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाया गया है। नेपाल में जो परिवार सामने आ रहे हैं, इस बदलाव केंद्र में युवा वर्ग ही शामिल हैं। ऐसे में उनकी चुनी हुई सरकार के सत्ता में आने के उम्मीद के बीच जश्न, उल्लास और जुलूस निकाला जाना स्वाभाविक है। ऐसे में युवाओं के बीच उत्पात या तनाव न उत्पन्न करा दें, इसलिए सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
सूत्रों का कहना है कि नेपाल की एजेंसियों का मानना है कि भड़की हिंसा को हवा देने में कुछ बाहरी देशों के संदिग्धों का हाथ है। वे नेपाल में जमे हुए थे और हिंसा भड़का कर निकल गए। इसलिए की सुरक्षा और खुफिया एजेंसी बाॅर्डर इलाके में विशेष नजर बनाए हुए है। वहीं, सीमा पर लगातार गश्त और निगरानी की जा रही है। इसके साथ ही नेपाल में चुनाव की शुरुआत होने और सीमा सील होने के बाद चुनाव संपन्न होने तक एसएसबी और सीमावर्ती थानों की पुलिस लगी रही। त्योहार को देखते हुए एक बार फिर सीमावर्ती थानों की पुलिस और सुरक्षा एजेंसी अलर्ट मोड में हैं। सीमा के खुलने के बाद लगातार पुलिस गश्त कर रही है। संदिग्धों से पूछताछ और बैग झोला बोरी की जांच की जा रही है।
इस संबंध में एएसपी प्रशांत कुमार प्रसाद ने बताया कि सीमा पर नियमित जांच और गश्त की जा रही है। त्योहार को देखते हुए जांच और निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।
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सीमा खुली इसलिए जांच
भारत-नेपाल की खुली सीमा होने के कारण सामान्य दिनों में भी दोनों देशों के लोगों का आवागमन काफी रहता है। सीमावर्ती बाजारों में व्यापारिक गतिविधियां भी लगातार चलती रहती हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों के सामने चुनौती यह रहती है कि सामान्य आवाजाही को प्रभावित किए बिना संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जाए। इसी वजह से बड़े आयोजन जैसे त्योहार, चुनाव या फिर देश के किसी हिस्से में आतंकी हमला, किसी प्रकार की घुसपैठ की सूचना मिलती है तो बाॅर्डर पर अलर्ट हो जाता है। सुरक्षा एजेंसी और पुलिस टीम नियमित जांच और निगरानी करती हैं।
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जिले की 68 किलोमीटर सीमा नेपाल बॉर्डर से लगती है। इसमें ककरहवा, अलीगढ़हवा, खुनुवां और बढ़नी बॉर्डर मुख्य केंद्र है। यहां से वाहनों की आवाजाही होती है। इसके अलावा अन्य रास्तों के अलावा पगडंडी से भी लोग आते-जाते हैं। नेपाल में चुनाव को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने और किसी भी तरह की गड़बड़ी की आशंका को देखते हुए दो से पांच मार्च की मध्यरात्रि तक भारत-नेपाल सीमा को पूरी तरह सील कर दिया गया था। इस दौरान सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा बलों ने कड़ी चौकसी बरती और किसी को भी सीमा पार करने की अनुमति नहीं दी गई। तीन दिन तक सीमा बंद रहने के बाद 6 मार्च से पाबंदी हटा दी गई है, जिसके बाद अब दोनों देशों के बीच सामान्य आवाजाही शुरू हो गई है। हालांकि, सीमा खुलने के बाद भी सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं।
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सूत्रों के अनुसार चुनाव परिणाम में नई और बालेंद्र शाह की सरकार बनने की उम्मीद के बीच नेपाल की सुरक्षा एजेंसी और सक्रिय हो गईं हैं। नेपाल के सुरक्षा से जुड़े जानकारों का मनाना है कि जेन-जी आंदोलन की आग में बाद नेपाल में सरकार गिर गई। इसे गिराने वाले युवा ही थे। विरोध में हुई कार्रवाई और युवाओं के मौत और भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाया गया है। नेपाल में जो परिवार सामने आ रहे हैं, इस बदलाव केंद्र में युवा वर्ग ही शामिल हैं। ऐसे में उनकी चुनी हुई सरकार के सत्ता में आने के उम्मीद के बीच जश्न, उल्लास और जुलूस निकाला जाना स्वाभाविक है। ऐसे में युवाओं के बीच उत्पात या तनाव न उत्पन्न करा दें, इसलिए सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
सूत्रों का कहना है कि नेपाल की एजेंसियों का मानना है कि भड़की हिंसा को हवा देने में कुछ बाहरी देशों के संदिग्धों का हाथ है। वे नेपाल में जमे हुए थे और हिंसा भड़का कर निकल गए। इसलिए की सुरक्षा और खुफिया एजेंसी बाॅर्डर इलाके में विशेष नजर बनाए हुए है। वहीं, सीमा पर लगातार गश्त और निगरानी की जा रही है। इसके साथ ही नेपाल में चुनाव की शुरुआत होने और सीमा सील होने के बाद चुनाव संपन्न होने तक एसएसबी और सीमावर्ती थानों की पुलिस लगी रही। त्योहार को देखते हुए एक बार फिर सीमावर्ती थानों की पुलिस और सुरक्षा एजेंसी अलर्ट मोड में हैं। सीमा के खुलने के बाद लगातार पुलिस गश्त कर रही है। संदिग्धों से पूछताछ और बैग झोला बोरी की जांच की जा रही है।
इस संबंध में एएसपी प्रशांत कुमार प्रसाद ने बताया कि सीमा पर नियमित जांच और गश्त की जा रही है। त्योहार को देखते हुए जांच और निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।
सीमा खुली इसलिए जांच
भारत-नेपाल की खुली सीमा होने के कारण सामान्य दिनों में भी दोनों देशों के लोगों का आवागमन काफी रहता है। सीमावर्ती बाजारों में व्यापारिक गतिविधियां भी लगातार चलती रहती हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों के सामने चुनौती यह रहती है कि सामान्य आवाजाही को प्रभावित किए बिना संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जाए। इसी वजह से बड़े आयोजन जैसे त्योहार, चुनाव या फिर देश के किसी हिस्से में आतंकी हमला, किसी प्रकार की घुसपैठ की सूचना मिलती है तो बाॅर्डर पर अलर्ट हो जाता है। सुरक्षा एजेंसी और पुलिस टीम नियमित जांच और निगरानी करती हैं।
