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DM की जांच में फंसे: मोरंग लाने वाले 300 से अधिक ट्रकों की बिना पास 'एंट्री', दोषी मिले खान अधिकारी- निलंबित

निलांबुज मिश्रा, कुशीनगर Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Sat, 20 Jun 2026 01:25 AM IST
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सार

हाईवे से एंट्री करने वाले मोरंग लदे ट्रक अपना नंबर प्लेट ढक लेते थे, या मिट्टी लगा देते थे, ताकि खनन विभाग की ओर से लगाए गए कैमरे में कैद न हो। इसके अलावा लोकल रूटों से ट्रकों की एंट्री करा दी जाती थी। डीएम महेंद्र सिंह तंवर तक यह पूरा मामला मई महीने के पहले सप्ताह में पहुंचा। उन्होंने इसकी गोपनीय जांच शुरू कराई। इसकी भनक लगते ही खान अधिकारी अभिषेक सिंह ने एंट्री गिरोह के 13 सदस्यों पर प्राथमिकी दर्ज कराई और तर्क दिए कि यह लोग अवैध तरीके से मोरंग लदे ट्रकों की एंट्री कराते थे, दूसरी बार छह लोगों पर प्राथमिकी दर्ज कराई।

government has suspended Kushinagar Mining Officer based on the report submitted by DM Mahendra Singh Tanwar
डीएम, महेंद्र सिंह तंवर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

अवैध खनिज परिवहन के खेल में शामिल कुशीनगर में तैनात रहे खान अधिकारी अभिषेक सिंह को शासन से अटैच करने के बाद शुक्रवार को निलंबित कर दिया गया। शासन में डीएम महेंद्र सिंह तंवर की ओर से भेजी गई रिपोर्ट के बाद विभागीय जांच में प्रथम दृष्टया दोषी मिले हैं। उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति भी की गई है।


कुशीनगर में तैनाती दौरान खान अधिकारी अभिषेक सिंह मिट्टी खनन, बालू खनन के अलावा बिहार से मोरंग लेकर आने वाली प्रति दिन ट्रकों की एंट्री यूपी में कुशीनगर के रास्ते बिना अंतरराज्यीय पारगमन पास (आईएसटीपी) के करा दी जाती थी। इससे करोड़ों रुपये महीने का राजस्व का नुकसान होता था। इस खेल में गोरखपुर और जिले के कुछ चुनिंदे लोग खान अधिकारी के लिए काम करते थे।
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राजस्व चोरी और अवैध वसूली का खेल उजागर होने के बाद डीएम मामले को गंभीरता से लिए और जांच कराई तो इस खेल में खान अधिकारी अभिषेक सिंह की संलिप्तता मिली। इसकी रिपोर्ट शासन को पिछले महीने डीएम ने भेज दी थी।

विभागीय पोर्टल की समीक्षा और डीएम कुशीनगर के साथ ज्येष्ठ खान अधिकारी एवं प्रभारी कमांड सेंटर मुख्यालय आशीष कुमार की ओर से कराई गई जांच में कई गंभीर खामियां सामने आईं। जांच में पाया गया कि अवैध खनिज परिवहन के मामलों में जारी चालानों और नोटिसों को खान अधिकारी ने बिना किसी वैध आधार और पर्याप्त साक्ष्य के निरस्त कर दिया था।

प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित अधिकारी अपने दायित्वों के निर्वहन में भी लापरवाह पाए गए। जांच रिपोर्ट के आधार पर अभिषेक सिंह को प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए निलंबित कर दिया गया है। वहीं डीएम कुशीनगर को राजस्व चोरी के धनराशि की नियमानुसार वसूली करने का निर्देश शासन की ओर से दिया गया है। विभागीय स्तर पर पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच शुरू हो गई है।

खान अधिकारी के इशारे पर काम करता था हाईवे पर गिरोह
मिट्टी और बालू खनन कराने के लगातार लग रहे आरोप से बच निकले खान अधिकारी अभिषेक सिंह बिहार से माेरंग लेकर आने वाले ट्रकों की कुशीनगर जिले के रास्ते यूपी में अवैध एंट्री कराने के खेल में फंस गए।
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गाजीपुर पुलिस चौकी से गोरखपुर तक हाईवे पर सक्रिय एंट्री गिरोह को खान अधिकारी का सह था। मई महीने में इस खेल का भंडाफोड़ हुआ तो डीएम ने जांच बैठा दी। खुद के बचाव में एंट्री गिरोह के सदस्यों पर आनन-फानन में खान अधिकारी ने प्राथमिकी दर्ज कराई, इसमें खान अधिकारी की संलिप्तता और कार्रवाई लापरवाही की पुष्टि हुई।

बिहार प्रांत से मोरंग बालू लेकर प्रत्येक दिन 300 से अधिक ट्रक अंतरराज्यीय पारगमन पास (आईएसटीपी) बिना बनवाए अवैध तरीके से कुशीनगर के रास्ते यूपी में प्रवेश कर पूर्वांचल के करीब 20 जिलों में मोरंग पहुंचते थे। इसके एवज में हाईवे पर सक्रिय एंट्री गिरोह के माध्यम से वसूली कराई जाती थी।

हाईवे से एंट्री करने वाले मोरंग लदे ट्रक अपना नंबर प्लेट ढक लेते थे, या मिट्टी लगा देते थे, ताकि खनन विभाग की ओर से लगाए गए कैमरे में कैद न हो। इसके अलावा लोकल रूटों से ट्रकों की एंट्री करा दी जाती थी। डीएम महेंद्र सिंह तंवर तक यह पूरा मामला मई महीने के पहले सप्ताह में पहुंचा।

डीएम ने गंभीरता से लेते हुए इसकी गोपनीय जांच शुरू कराई। इसकी भनक लगते ही खान अधिकारी अभिषेक सिंह ने एंट्री गिरोह के 13 सदस्यों पर प्राथमिकी दर्ज कराई और तर्क दिए कि यह लोग अवैध तरीके से मोरंग लदे ट्रकों की एंट्री कराते थे, दूसरी बार छह लोगों पर प्राथमिकी दर्ज कराई।

खान अधिकारी ने प्राथमिकी दर्ज करा अफसरों का ध्यान भटकाने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके पहले डीएम ने अवैध तरीके से मिट्टी और बालू का खनन कराने की लगातार शिकायतें पहुंच रही थी।

इसमें जेसीबी, ट्रैक्टर-ट्राॅली जब्त करने के बाद मामूली चालान जमा करा छोड़ देते थे। अवैध खनिज परिवहन के मामलों में जारी चालानों और नोटिसों को खान अधिकारी ने बिना किसी वैध आधार और पर्याप्त साक्ष्य के निरस्त कर देते थे।

जांच कराने के बाद डीएम ने इसकी रिपोर्ट मई माह में शासन को भेजी थी। इसके बाद खान अधिकारी को शासन से अटैच कर दिया गया और जांच कराई गई। जांच में दोषी मिलने पर इन्हें निलंबित कर दिया गया है।
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