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Kushinagar News: कालाबाजारी व घटतौली पर राशन की दुकान निरस्त, जमानत राशि जब्त
Sat, 15 Aug 2026 01:57 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sat, 15 Aug 2026 01:57 AM IST
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पडरौना। तहसील क्षेत्र के माघी विशुनपुरा में सरकारी राशन वितरण में धांधली, अनाज की कालाबाजारी और घटतौली का मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। डीएसओ ने जिलाधिकारी के अनुमोदन के बाद माघी विशुनपुरा के निलंबित उचित दर विक्रेता वीरेंद्र प्रसाद की दुकान का अनुबंध तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। साथ ही विक्रेता की जमानत राशि भी जब्त कर ली गई है।
मामले की शुरुआत जून 2026 में हुई, जब दुकानदार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। नौ जून 2026 को पूर्ति निरीक्षक ने दुकान का निरीक्षण किया। जांच के दौरान कोटेदार मौके पर नहीं मिले। उसका भतीजा सोनू ई-पॉस मशीन संचालित करते पाया गया। ई-पॉस मशीन के आंकड़ों और मौके पर मौजूद स्टॉक के मिलान में गड़बड़ी सामने आई थी। मशीन में दर्ज स्टॉक के सापेक्ष मौके पर 17.03 क्विंटल चावल कम पाया गया, जबकि 2.79 क्विंटल गेहूं अधिक मिला। गेहूं अधिक मिलने से कार्डधारकों को कम राशन देने की पुष्टि हुई।
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि कार्रवाई से बचने के लिए निलंबित कोटेदार ने निलंबन के लगभग 14 महीने बाद जुलाई 2026 में कहीं बाहर से अवैध रूप से चावल खरीदकर पुरानी बोरियों में भरकर संबद्ध कोटेदार को सौंपने का प्रयास किया। हालांकि, जांच में यह भी पकड़ में आ गई। इसके अलावा, स्टॉक व वितरण रजिस्टर पर सक्षम अधिकारियों ग्राम सचिव/बीडीओ की जगह लेखपाल से फर्जी हस्ताक्षर कराने और ऑनलाइन आंकड़ों से अलग गलत रिपोर्ट प्रस्तुत करने की बात भी साबित हुई। मामले में कोटेदार के साथ सांठगांठ कर गलत पर्यवेक्षणीय रिपोर्ट तैयार करने वाले जिम्मेदार कर्मचारियों को भी चिह्नित कर लिया गया है। डीएसओ ने बीडीओ पडरौना और बीईओ पडरौना को पत्र जारी कर दोषी कर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
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कोट:-
माघी विशुनपुरा के कोटेदार वीरेंद्र प्रसाद का जवाब असंतोषजनक पाया गया। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत गरीबों के मुफ्त राशन की कालाबाजारी, घटतौली और नियमों के उल्लंघन के गंभीर आरोपों की पुष्टि होने पर जिलाधिकारी के अनुमोदन के बाद दुकान का अनुबंध निरस्त कर जमानत राशि जब्त कर ली गई है। -कृष्ण गोपाल पांडेय,डीएसओ कुशीनगर
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मामले की शुरुआत जून 2026 में हुई, जब दुकानदार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। नौ जून 2026 को पूर्ति निरीक्षक ने दुकान का निरीक्षण किया। जांच के दौरान कोटेदार मौके पर नहीं मिले। उसका भतीजा सोनू ई-पॉस मशीन संचालित करते पाया गया। ई-पॉस मशीन के आंकड़ों और मौके पर मौजूद स्टॉक के मिलान में गड़बड़ी सामने आई थी। मशीन में दर्ज स्टॉक के सापेक्ष मौके पर 17.03 क्विंटल चावल कम पाया गया, जबकि 2.79 क्विंटल गेहूं अधिक मिला। गेहूं अधिक मिलने से कार्डधारकों को कम राशन देने की पुष्टि हुई।
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जांच में यह भी खुलासा हुआ कि कार्रवाई से बचने के लिए निलंबित कोटेदार ने निलंबन के लगभग 14 महीने बाद जुलाई 2026 में कहीं बाहर से अवैध रूप से चावल खरीदकर पुरानी बोरियों में भरकर संबद्ध कोटेदार को सौंपने का प्रयास किया। हालांकि, जांच में यह भी पकड़ में आ गई। इसके अलावा, स्टॉक व वितरण रजिस्टर पर सक्षम अधिकारियों ग्राम सचिव/बीडीओ की जगह लेखपाल से फर्जी हस्ताक्षर कराने और ऑनलाइन आंकड़ों से अलग गलत रिपोर्ट प्रस्तुत करने की बात भी साबित हुई। मामले में कोटेदार के साथ सांठगांठ कर गलत पर्यवेक्षणीय रिपोर्ट तैयार करने वाले जिम्मेदार कर्मचारियों को भी चिह्नित कर लिया गया है। डीएसओ ने बीडीओ पडरौना और बीईओ पडरौना को पत्र जारी कर दोषी कर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
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कोट:-
माघी विशुनपुरा के कोटेदार वीरेंद्र प्रसाद का जवाब असंतोषजनक पाया गया। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत गरीबों के मुफ्त राशन की कालाबाजारी, घटतौली और नियमों के उल्लंघन के गंभीर आरोपों की पुष्टि होने पर जिलाधिकारी के अनुमोदन के बाद दुकान का अनुबंध निरस्त कर जमानत राशि जब्त कर ली गई है। -कृष्ण गोपाल पांडेय,डीएसओ कुशीनगर