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Kushinagar News: खान अधिकारी के इशारे पर काम करता था हाईवे पर गिरोह

Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 20 Jun 2026 01:33 AM IST
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The highway gang operated at the behest of the mining officer.
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नीलांबुज मिश्र कुशीनगर। मिट्टी और बालू खनन कराने के लगातार लग रहे आरोप से बच निकले खान अधिकारी अभिषेक सिंह बिहार से माेरंग लेकर आने वाले ट्रकों की कुशीनगर जिले के रास्ते यूपी में अवैध एंट्री कराने के खेल में फंस गए।

गाजीपुर पुलिस चौकी से गोरखपुर तक हाईवे पर सक्रिय एंट्री गिरोह को खान अधिकारी का सह था। मई महीने में इस खेल का भंडाफोड़ हुआ तो डीएम ने जांच बैठा दी। खुद के बचाव में एंट्री गिरोह के सदस्यों पर आनन-फानन में खान अधिकारी ने प्राथमिकी दर्ज कराई, इसमें खान अधिकारी की संलिप्तता और कार्रवाई लापरवाही की पुष्टि हुई।
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बिहार प्रांत से मोरंग बालू लेकर प्रत्येक दिन 300 से अधिक ट्रक अंतरराज्यीय पारगमन पास (आईएसटीपी) बिना बनवाए अवैध तरीके से कुशीनगर के रास्ते यूपी में प्रवेश कर पूर्वांचल के करीब 20 जिलों में मोरंग पहुंचते थे। इसके एवज में हाईवे पर सक्रिय एंट्री गिरोह के माध्यम से वसूली कराई जाती थी।
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हाईवे से एंट्री करने वाले मोरंग लदे ट्रक अपना नंबर प्लेट ढक लेते थे, या मिट्टी लगा देते थे, ताकि खनन विभाग की ओर से लगाए गए कैमरे में कैद न हो। इसके अलावा लोकल रूटों से ट्रकों की एंट्री करा दी जाती थी। डीएम महेंद्र सिंह तंवर तक यह पूरा मामला मई महीने के पहले सप्ताह में पहुंचा। डीएम ने गंभीरता से लेते हुए इसकी गोपनीय जांच शुरू कराई। इसकी भनक लगते ही खान अधिकारी
अभिषेक सिंह ने एंट्री गिरोह के 13 सदस्यों पर प्राथमिकी दर्ज कराई और तर्क दिए कि यह लोग अवैध तरीके से मोरंग लदे ट्रकों की एंट्री कराते थे, दूसरी बार छह लोगों पर प्राथमिकी दर्ज कराई। खान अधिकारी ने प्राथमिकी दर्ज करा अफसरों का ध्यान भटकाने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके पहले डीएम ने अवैध तरीके से मिट्टी और बालू का खनन कराने की लगातार शिकायतें पहुंच रही थी।
इसमें जेसीबी, ट्रैक्टर-ट्राॅली जब्त करने के बाद मामूली चालान जमा करा छोड़ देते थे। अवैध खनिज परिवहन के मामलों में जारी चालानों और नोटिसों को खान अधिकारी ने बिना किसी वैध आधार और पर्याप्त साक्ष्य के निरस्त कर देते थे।
जांच कराने के बाद डीएम ने इसकी रिपोर्ट मई माह में शासन को भेजी थी। इसके बाद खान अधिकारी को शासन से अटैच कर दिया गया और जांच कराई गई। जांच में दोषी मिलने पर इन्हें निलंबित कर दिया गया है।
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