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Kushinagar News: आठ साल में सात बार सील हुआ अस्पताल...संचालन कभी नहीं रुका

संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Thu, 12 Mar 2026 03:03 AM IST
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The hospital was sealed seven times in eight years... operations never stopped.
खड्डा के क्षेत्र में नीतू की मौत के बाद घर पर शोकाकुल रिश्तेदार।स्रोत-सोशल मीडिया
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पडरौना। नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र का निजी हॉस्पिटल नियमों और प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। आठ साल में सात बार सील यह अस्पताल सील हो चुका है। लेकिन कभी दो-चार दिन से अधिक बंद नहीं रहा और दोबारा संचालित होने लगा। इसको लेकर लोग स्वास्थ्य विभाग पर सवाल खड़े कर रहे हैं। सोमवार देर रात जच्चा-बच्चा की मौत के बाद हंगामा होने पर फिर अस्पताल को सील करने के साथ ही संचालक पर गैरइरादतन हत्या की प्राथमिकी दर्ज हुई है। साथ ही सीएम ने तीन सदस्यीय जांच टीम गठित कर अस्पताल के पर्चे पर अंकित डाॅक्टरों को नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं।
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जिले में नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र के खुशी हॉस्पिटल में जच्चा-बच्चा की हुई मौत के मामले में जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग ने तीन सदस्यीय टीम गठित कर दी है। गठित जांच टीम में डिप्टी सीएमओ डाॅ. आरके गुप्ता नोडल, नेबुआ नौरंगिया सीएचसी के अधीक्षक डाॅ. रजनीश श्रीवास्तव के अलावा एक अन्य डाक्टर शामिल हैं। इसके अलावा हॉस्पिटल के पर्चे पर अंकित डाॅक्टरों को नोटिस जारी कर उनसे तीन दिन के अंदर कार्यालय पहुंचकर स्पष्टीकरण देने के लिए निर्देश दिए गए हैं।
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बता दें कि खड्डा थाना क्षेत्र के मठिया बुजुर्ग गांव निवासी दीनदयाल यादव की पत्नी नीतू यादव को सोमवार की रात में प्रसव पीड़ा होने पर इस हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। नीतू ने बच्ची को जन्म दिया। मंगलवार सुबह करीब चार बजे नीतू की हालत गंभीर बताते हुए हॉस्पिटल संचालक ने मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया और नवजात को आईसीयू में भर्ती होने की बात कही। परिजन प्रसूता को लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचे तो डाक्टर ने बताया कि प्रसूता की मौत हो चुकी है।
इसके बाद परिजन हॉस्पिटल पहुंचे तो संचालक व कर्मी ताला बंद कर भाग गए थे। मामले में पुलिस ने हास्पिटल संचालक के खिलाफ पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर अग्रिम कार्रवाई में जुटी हुई है। वहीं, घटना के बाद मंगलवार को एसडीएम राजबीर सिंह और डिप्टी सीएमओ ने हॉस्पिटल को सील कर दिया था।
इस मामले में सीएमओ डाॅ. चंद्रप्रकाश ने कहा कि मामले की गहराई से जांच करने के लिए तीन सदस्यीय जांच टीम का गठन कर दिया गया है। टीम जच्चा बच्चा की मौत की जांच कर रिपोर्ट सौंपेगी, ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके।
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खुशी हॉस्पिटल पर सील की कार्रवाई

वर्ष 2018 से 2025 के दौरान खुशी हॉस्पिटल को छह बार सील की कार्रवाई की गई। बार-बार उसे खोलने का खेल चलता रहा और लोगों की जान जाती रही। किसी जिम्मेदार को इसकी परवाह नहीं रही। क्षेत्र के लोगों का आरोप है कि सील करने के कुछ ही दिनों बाद फिर से संचालन शुरू हो जाता है।
इन तिथियों में पूर्व में कार्रवाई
- अक्टूबर 2018 : नवीनीकरण नहीं होने के मामले में डिप्टी सीएमओ डॉ. जेएन सिंह ने पैथोलॉजी सील कराई थी।
- 6 नवंबर 2020 : एसडीएम अरविंद कुमार ने जांच में बिना पंजीकृत डॉक्टर ऑपरेशन करते मिले थे, आठ मरीजों को जिला अस्पताल भेजकर हॉस्पिटल सील किया था।

- 7 अगस्त 2022 : एसडीएम भावना सिंह ने फायर सेफ्टी व्यवस्था और डॉक्टर की अनुपस्थिति पर ऑपरेशन थियेटर सील कराया था।
- 26 सितंबर 2022 : जांच में ऑपरेशन करने वाले डॉक्टरों की जानकारी नहीं मिल थी, तो अभिलेख जब्त किए गए थे।
- 4 अप्रैल 2023 : डिप्टी सीएमओ डॉ. आरडी कुशवाहा की जांच में बिना डॉक्टर ही हॉस्पिटल में मरीज भर्ती मिले थे, उन्होंने पुलिस की मौजूदगी में अस्पताल सील कराया था।

- 11 जून 2024 : शिकायत मिलने पर जांच में हुई पुष्टि के बाद डिप्टी सीएमओ डॉ. राकेश गुप्ता ने अस्पताल सील कराया था।

10 मार्च 2026 : जच्चा-बच्चा की मौत के बाद एक बार फिर अस्पताल सील।

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हास्पिटल संचालक का हुआ था वीडियो वायरल

खुशी हाॅस्पिटल के संचालक राजू राजू श्रीवास्तव का पूर्व में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था। 58 सेकंड के वायरल वीडियो में मरीज की आंख पर सफेद पट्टी बंधी हुई है। जिसमें मरीज से ..ठीक बानी न.. पूछा भी जा रहा है। इस वीडियो में ऑपरेशन के दौरान होने वाली व्यवस्थाओं की कमी सहज ही दिखाई दे रही है। इसके बावजूद धड़ल्ले से ऑपरेशन किया जा रहा है। वीडियो में चार लोग दिखाई दे रहे हैं। उनमें दो लोग ऑपरेशन के दौरान शल्य उपकरणों का प्रयोग कर रहे हैं, जबकि एक व्यक्ति मरीज के सिर की तरफ खड़ा है व एक व्यक्ति ऑपरेशन करने वाले दोनों लोगों के बगल में खड़ा है। हालांकि, वायरल वीडियो की संवाद न्यूज एजेंसी पुष्टि नहीं करती है।
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गत्ते में मिला था नवजात का शव
हास्पिटल संचालक ने प्रसूता को मेडिकल कॉलेज रेफर करते समय बताया था कि आईसीयू में भर्ती है नवजात। लेकिन पत्नी की मौत के बाद जब पति दीनदयाल खुशी हास्पिटल पहुंचा तो वह बंद मिला। सूचना के बाद आई पुलिस व स्वास्थ्य विभाग की टीम ने हास्पिटल का ताला तोड़वाया। करीब दो घंटे बाद पता चला कि अंदर कोई नहीं है और बाहर रखे कार्टन में नवजात का शव बंद डिब्बे में मिला।



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जांच के लिए डीवीआर भी कब्जे में
जच्चा-बच्चा की मौत के बाद पुलिस ने डीवीआर को कब्जे में ले लिया है, इससे फुटेज के आधार पर जांच में कर रही है।मामले में पुलिस आपरेशन के दौरान मौजूद डॉक्टर और स्टाफ की जानकारी भी जुटा रही है। मृतिका के परिजनों की तरफ से लगाए जा रहे आरोपों की भी जांच गहनता से करने में जुटी हुई है।

खड्डा के क्षेत्र में नीतू की मौत के बाद घर पर शोकाकुल रिश्तेदार।स्रोत-सोशल मीडिया

खड्डा के क्षेत्र में नीतू की मौत के बाद घर पर शोकाकुल रिश्तेदार।स्रोत-सोशल मीडिया

खड्डा के क्षेत्र में नीतू की मौत के बाद घर पर शोकाकुल रिश्तेदार।स्रोत-सोशल मीडिया

खड्डा के क्षेत्र में नीतू की मौत के बाद घर पर शोकाकुल रिश्तेदार।स्रोत-सोशल मीडिया

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