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Kushinagar News: वीटीआर में अनुकूल माहौल से बढ़ रहा बाघों का कुनबा
Wed, 29 Jul 2026 01:46 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Wed, 29 Jul 2026 01:46 AM IST
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खड्डा(कुशीनगर)। खड्डा क्षेत्र की सीमा से सटे बिहार का वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) देश के सफल वन्यजीव संरक्षण मॉडलों में तेजी से उभर रहा है। विश्व बाघ दिवस पर जारी होने वाली नई बाघ गणना को लेकर उत्सुकता बढ़ी हुई है। वन अधिकारियों और विशेषज्ञों को उम्मीद है कि इस बार रिजर्व में बाघों की संख्या 70 के पार पहुंच सकती है। यदि ऐसा होता है, तो यह बिहार के साथ यूपी की तराई के लिए भी बड़ी उपलब्धि होगी।
खड्डा क्षेत्र के लोग गंडक और नारायणी नदी के उस पार फैले जंगलों से जुड़े हैं। कभी यही जंगल मानव-वन्यजीव संघर्ष और सीमित बाघों की मौजूदगी के लिए चर्चा में रहते थे लेकिन अब इन्हीं जंगलों से सकारात्मक तस्वीर सामने आ रही है। वर्ष 2010 में रिजर्व में केवल आठ बाघ दर्ज किए गए थे, वहीं 2018 में 31 और 2022 की गणना में 54 हो गई। हाल के ट्रैप कैमरों और फील्ड मॉनिटरिंग से संकेत मिल रहे हैं कि अब यह आंकड़ा 70 से ऊपर पहुंच सकता है।
इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ा कारण जंगल के भीतर विकसित किए गए घास के मैदान हैं। वर्ष 2018 तक 1400 हेक्टेयर घास के मैदान को बढ़ाकर करीब 4000 हेक्टेयर कर दिया गया है। इन मैदानों में चीतल, सांभर, हिरण, जंगली सूअर और अन्य शाकाहारी जीवों की संख्या बढ़ी है। पर्याप्त शिकार मिलने से बाघों के प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हुआ है। वन विभाग ने जल प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान दिया है। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है कि यह नेपाल के चितवन राष्ट्रीय उद्यान और यूपी के सोहगीबरवा वन्यजीव क्षेत्र से जुड़ा प्राकृतिक गलियारा (कॉरिडोर) बनाता है। इससे बाघों सहित अन्य वन्यजीवों का सुरक्षित आवागमन संभव होता है और उनकी आनुवंशिक विविधता बनी रहती है। यही वजह है कि बाघों की बढ़ती संख्या को पूरे जंगल के स्वस्थ होने का संकेत माना जा रहा है। संवाद
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इसलिए खास है वाल्मीकि टाइगर रिजर्व
- बिहार का एकमात्र टाइगर रिजर्व।
- कुशीनगर के खड्डा क्षेत्र से सटा तराई का प्रमुख वन क्षेत्र।
- नेपाल के चितवन राष्ट्रीय उद्यान से जुड़ा महत्वपूर्ण टाइगर कॉरिडोर।
- गंडक और नारायणी नदी तंत्र से समृद्ध जैव विविधता।
- घास के मैदान और जलस्रोतों का विकास।
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ऐसे हुई बाघों की वृद्धि
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2010 : आठ बाघ
2018 : 31 बाघ
2022 : 54 बाघ
2026 (संभावित) : 70 से अधिक बाघ
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छत्र प्रजाति है बाघ
बाघ जंगल की खाद्य शृंखला का शीर्ष शिकारी है। यह शाकाहारी जीवों की संख्या नियंत्रित रखता है, जिससे जंगल की वनस्पतियां सुरक्षित रहती हैं। बाघ का संरक्षण दरअसल पूरे जंगल, जलस्रोतों, घास के मैदानों और सैकड़ों अन्य जीवों के संरक्षण की गारंटी माना जाता है। इसी कारण इसे अम्ब्रेला स्पीशीज (छत्र प्रजाति) कहा जाता है।
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बाघों के बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। वास्तविक संख्या शीघ्र ही सामने आएगी। बाघ सहित अन्य जानवरों के विकास एवं सुरक्षा के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। ग्रास लैंड एरिया बढ़ाई गई है। -विकास अहलावत, डीएफओ, वीटीआर, वन प्रमंडल दो।
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खड्डा क्षेत्र के लोग गंडक और नारायणी नदी के उस पार फैले जंगलों से जुड़े हैं। कभी यही जंगल मानव-वन्यजीव संघर्ष और सीमित बाघों की मौजूदगी के लिए चर्चा में रहते थे लेकिन अब इन्हीं जंगलों से सकारात्मक तस्वीर सामने आ रही है। वर्ष 2010 में रिजर्व में केवल आठ बाघ दर्ज किए गए थे, वहीं 2018 में 31 और 2022 की गणना में 54 हो गई। हाल के ट्रैप कैमरों और फील्ड मॉनिटरिंग से संकेत मिल रहे हैं कि अब यह आंकड़ा 70 से ऊपर पहुंच सकता है।
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इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ा कारण जंगल के भीतर विकसित किए गए घास के मैदान हैं। वर्ष 2018 तक 1400 हेक्टेयर घास के मैदान को बढ़ाकर करीब 4000 हेक्टेयर कर दिया गया है। इन मैदानों में चीतल, सांभर, हिरण, जंगली सूअर और अन्य शाकाहारी जीवों की संख्या बढ़ी है। पर्याप्त शिकार मिलने से बाघों के प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हुआ है। वन विभाग ने जल प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान दिया है। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है कि यह नेपाल के चितवन राष्ट्रीय उद्यान और यूपी के सोहगीबरवा वन्यजीव क्षेत्र से जुड़ा प्राकृतिक गलियारा (कॉरिडोर) बनाता है। इससे बाघों सहित अन्य वन्यजीवों का सुरक्षित आवागमन संभव होता है और उनकी आनुवंशिक विविधता बनी रहती है। यही वजह है कि बाघों की बढ़ती संख्या को पूरे जंगल के स्वस्थ होने का संकेत माना जा रहा है। संवाद
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इसलिए खास है वाल्मीकि टाइगर रिजर्व
- बिहार का एकमात्र टाइगर रिजर्व।
- कुशीनगर के खड्डा क्षेत्र से सटा तराई का प्रमुख वन क्षेत्र।
- नेपाल के चितवन राष्ट्रीय उद्यान से जुड़ा महत्वपूर्ण टाइगर कॉरिडोर।
- गंडक और नारायणी नदी तंत्र से समृद्ध जैव विविधता।
- घास के मैदान और जलस्रोतों का विकास।
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ऐसे हुई बाघों की वृद्धि
2010 : आठ बाघ
2018 : 31 बाघ
2022 : 54 बाघ
2026 (संभावित) : 70 से अधिक बाघ
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छत्र प्रजाति है बाघ
बाघ जंगल की खाद्य शृंखला का शीर्ष शिकारी है। यह शाकाहारी जीवों की संख्या नियंत्रित रखता है, जिससे जंगल की वनस्पतियां सुरक्षित रहती हैं। बाघ का संरक्षण दरअसल पूरे जंगल, जलस्रोतों, घास के मैदानों और सैकड़ों अन्य जीवों के संरक्षण की गारंटी माना जाता है। इसी कारण इसे अम्ब्रेला स्पीशीज (छत्र प्रजाति) कहा जाता है।
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बाघों के बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। वास्तविक संख्या शीघ्र ही सामने आएगी। बाघ सहित अन्य जानवरों के विकास एवं सुरक्षा के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। ग्रास लैंड एरिया बढ़ाई गई है। -विकास अहलावत, डीएफओ, वीटीआर, वन प्रमंडल दो।