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Kushinagar News: पुलिस की माैजूदगी में गुजरी गांव वालों की रात, सन्नाटे और सवालों के बीच बीता दिन
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Wed, 10 Jun 2026 02:32 AM IST
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तमकुहीरोड। पिपराघाट के देवनारायण टोला में सोमवार की रात शायद ही किसी को नींद आई हो। जिस गांव में रोज शाम ढलते आसपास बैठ कर लोग आपस में बातें करते थे। बच्चों की चहल-पहल सुनाई देती थी, वहां मंगलवार को सन्नाटा पसरा रहा। दो सगी बहनों की हत्या की खबर ने पूरे गांव को झकझोर दिया है। घटना के बाद रातभर पुलिस की गाड़ियां गांव में दौड़ती रहीं और लोगों के घरों पर दस्तक देती रहीं। सुबह पुलिस ने आरोपी राम प्रसाद के घर के आसपास के लोगों का बयान दर्ज किया। उसके रिश्तेदारों को भी पुलिस ने सूचना दी, लेकिन दोपहर तक कोई नहीं आया था। पोस्टमार्टम हाउस पर गांव के हंसराज यादव, सगी बहनों के बाबा पुनदेव निषाद आए थे।
गांव में मंगलवार सुबह जब लोग घरों से निकले तो हर चौखट पर सगी बहनों की हत्या की ही चर्चा थी। हालांकि, पुलिस कार्रवाई और जांच के चलते अधिकांश ग्रामीण खुलकर कुछ भी कहने से बचते रहे। जिन लोगों ने दोनों बहनों को बचपन से देखा था, उनके चेहरों पर अविश्वास साफ झलक रहा था। गांव के बुजुर्ग हों या महिलाएं, हर कोई घटना को लेकर स्तब्ध दिखा। गांव वालों का कहना है कि सोमवार दोपहर जो कुछ हुआ, उसकी भनक आसपास के लोगों को भी नहीं लगी। देर शाम पुलिस के पहुंचने और घर से शव निकलने के बाद ही अधिकतर लोगों को जानकारी हुई। रात होते-होते गांव पुलिस छावनी में तब्दील हो गया। भागे आरोपियों की तलाश में पुलिस लगातार दबिश देती रही।
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समझाने से नहीं बदलीं परिस्थितियां, तनाव के बोझ तले दबा था पूरा परिवार
-गांव में चर्चा है कि दोनों बहनों के प्रेम संबंधों को लेकर परिवार लंबे समय से सामाजिक और मानसिक दबाव झेल रहा था। ग्रामीण बताते हैं कि दोनों बहनें तीन-बार घर छोड़कर चली गई थीं। हर बार परिजन, रिश्तेदार और गांव के लोग उन्हें समझा-बुझाकर वापस लाए। पंचायतें भी हुईं, मान-मनौव्वल भी हुआ, लेकिन हालात सामान्य नहीं हो सके। एक ग्रामीण ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि परिवार पिछले कई महीनों से तनाव में था। पिता अक्सर बेटियों को समझाने का प्रयास करते थे, लेकिन बात नहीं बन पा रही थी। गांव में यह भी चर्चा है कि इसी तनाव ने आखिरकार एक भयावह रूप ले लिया।
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सूना पड़ा आंगन, जहां गूंजती थी बहनों की हंसी
मंगलवार को जिस घर के बाहर पुलिस पहरा दे रही थी, वहां कुछ दिन पहले तक दो बेटियों की हंसी गूंजती थी। घर का आंगन वीरान था, दरवाजे बंद थे और आसपास खड़े लोग खामोशी से उस घर की ओर देख रहे थे। गांव की महिलाओं की आंखों में घटना को लेकर दर्द साफ दिखाई दे रहा था। एक बुजुर्ग महिला ने कहा, बेटियां चाहे जैसी हों, मां-बाप का दिल आखिर मां-बाप का ही होता है। किसी ने नहीं सोचा था कि बात यहां तक पहुंच जाएगी। गांव के लोग घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं, लेकिन कोई भी खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। सभी की निगाहें अब पुलिस जांच पर टिकी हैं।
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भाइयों के कबूलनामे की चर्चा, गांव में चुप्पी
-पुलिस की जांच के दौरान नाबालिग भाइयों की ओर से बहनों को लाठी से पीटने की बात स्वीकार किए जाने की चर्चा पूरे गांव में है। हालांकि, इस मामले में कोई भी ग्रामीण खुलकर कुछ भी कहने को तैयार नहीं है। लोगों का कहना है कि मामला बेहद संवेदनशील है और सच क्या है, यह जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल देवनारायण टोला की गलियां खामोश हैं। हर दरवाजे पर घटना की चर्चा है, हर चेहरे पर बेचैनी है और हर मन में यही सवाल कि आखिर दो बेटियों की जिंदगी इतनी दर्दनाक तरीके से क्यों खत्म हुई। गांव की इस खामोशी में कई अनकहे सवाल और अधूरी कहानियां दफन नजर आ रही हैं।
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पुलिस के रिकाॅर्ड में तीन बार, गांव में कई बार हो चुकी है पंचायत
-सेवरही थाना क्षेत्र के देवनारायण टोला निवासी राम प्रसाद मल्लाह तीन पुत्रियों व दो पुत्रों के पिता हैं। उन्होंने अपनी बड़ी बेटी की शादी कर दी है, जबकि 20 वर्षीय लाली कुमारी इंटर तक और 18 वर्षीय शीला कुमारी दसवीं तक पढ़ाई की थी। पहली बार दोनों गांव के ही सजातीय दो युवकों के साथ भाग गई थीं, उसके बाद से ही माता-पिता ने उनकी पढ़ाई छुड़वा दी थी। दोनों नाबालिग भाई प्राइमरी स्कूल में पढ़ते हैं। पढ़ाई छूट जाने के बाद भी दोनों बहनें प्रेम जाल में फंसी रहीं। पुलिस रिकाॅर्ड में वे वह तीन बार घर से भाग चुकी हैं। कई बार गांव वालों की मौजूदगी में पंचायत के जरिए मामला सुलझाया गया। यहां तक कि दोनों परिवार के लोगों पर भी गंभीर आरोप लगा चुकी हैं। गांव वालों के मुताबिक, दोनों बहनों की वजह से घर में हमेशा कलह की स्थिति बनी रहती थी। इसी कलह से आजिज आकर उनकी मां ने आठ माह पहले जहर खाकर जान दे दी थी, लेकिन दोनों बहनों के व्यवहार में कोई परिवर्तन नहीं आया। घर की मान मर्यादा को ताक पर रख कर गांव के दो स्वजातीय युवकों के प्रेम जाल में फंसी रहीं।
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पुलिस ने दर्ज किया इनका बयान
-इस नृशंस हत्या के बाद पुलिस की टीम रात में गांव में ही डटी रही। सुबह एसएचओ गांव में पहुंचे तो कुछ हलचल दिखाई देने लगी। ग्राम प्रधान श्रीराम निषाद, वीरेंद्र निषाद, राजेंद्र निषाद, चंदन सिंह, हंसराज यादव, अजय चौबे, बृजेश यादव आदि आगे आए और अपनी गवाही दर्ज कराई। जबकि कुछ लोग झुंड में एकत्र होकर दबी जुबान से घटना की चर्चा करते दिखे। जबकि गांव में अन्य जगहों पर सन्नाटा पसरा रहा।
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-गिरफ्तार किशोरों को बाल सुधार गृह भेजा गया है। पुलिस ने घटना में प्रयुक्त ठंडा बरामद कर लिया है। आरोपी पिता की तलाश के लिए पुलिस दबिश दे रही है। गांव का माहौल सामान्य है। गांव में पुलिस तैनात है। -सिद्धार्थ वर्मा, एएसपी कुशीनगर
गांव में मंगलवार सुबह जब लोग घरों से निकले तो हर चौखट पर सगी बहनों की हत्या की ही चर्चा थी। हालांकि, पुलिस कार्रवाई और जांच के चलते अधिकांश ग्रामीण खुलकर कुछ भी कहने से बचते रहे। जिन लोगों ने दोनों बहनों को बचपन से देखा था, उनके चेहरों पर अविश्वास साफ झलक रहा था। गांव के बुजुर्ग हों या महिलाएं, हर कोई घटना को लेकर स्तब्ध दिखा। गांव वालों का कहना है कि सोमवार दोपहर जो कुछ हुआ, उसकी भनक आसपास के लोगों को भी नहीं लगी। देर शाम पुलिस के पहुंचने और घर से शव निकलने के बाद ही अधिकतर लोगों को जानकारी हुई। रात होते-होते गांव पुलिस छावनी में तब्दील हो गया। भागे आरोपियों की तलाश में पुलिस लगातार दबिश देती रही।
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समझाने से नहीं बदलीं परिस्थितियां, तनाव के बोझ तले दबा था पूरा परिवार
-गांव में चर्चा है कि दोनों बहनों के प्रेम संबंधों को लेकर परिवार लंबे समय से सामाजिक और मानसिक दबाव झेल रहा था। ग्रामीण बताते हैं कि दोनों बहनें तीन-बार घर छोड़कर चली गई थीं। हर बार परिजन, रिश्तेदार और गांव के लोग उन्हें समझा-बुझाकर वापस लाए। पंचायतें भी हुईं, मान-मनौव्वल भी हुआ, लेकिन हालात सामान्य नहीं हो सके। एक ग्रामीण ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि परिवार पिछले कई महीनों से तनाव में था। पिता अक्सर बेटियों को समझाने का प्रयास करते थे, लेकिन बात नहीं बन पा रही थी। गांव में यह भी चर्चा है कि इसी तनाव ने आखिरकार एक भयावह रूप ले लिया।
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सूना पड़ा आंगन, जहां गूंजती थी बहनों की हंसी
मंगलवार को जिस घर के बाहर पुलिस पहरा दे रही थी, वहां कुछ दिन पहले तक दो बेटियों की हंसी गूंजती थी। घर का आंगन वीरान था, दरवाजे बंद थे और आसपास खड़े लोग खामोशी से उस घर की ओर देख रहे थे। गांव की महिलाओं की आंखों में घटना को लेकर दर्द साफ दिखाई दे रहा था। एक बुजुर्ग महिला ने कहा, बेटियां चाहे जैसी हों, मां-बाप का दिल आखिर मां-बाप का ही होता है। किसी ने नहीं सोचा था कि बात यहां तक पहुंच जाएगी। गांव के लोग घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं, लेकिन कोई भी खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। सभी की निगाहें अब पुलिस जांच पर टिकी हैं।
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भाइयों के कबूलनामे की चर्चा, गांव में चुप्पी
-पुलिस की जांच के दौरान नाबालिग भाइयों की ओर से बहनों को लाठी से पीटने की बात स्वीकार किए जाने की चर्चा पूरे गांव में है। हालांकि, इस मामले में कोई भी ग्रामीण खुलकर कुछ भी कहने को तैयार नहीं है। लोगों का कहना है कि मामला बेहद संवेदनशील है और सच क्या है, यह जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल देवनारायण टोला की गलियां खामोश हैं। हर दरवाजे पर घटना की चर्चा है, हर चेहरे पर बेचैनी है और हर मन में यही सवाल कि आखिर दो बेटियों की जिंदगी इतनी दर्दनाक तरीके से क्यों खत्म हुई। गांव की इस खामोशी में कई अनकहे सवाल और अधूरी कहानियां दफन नजर आ रही हैं।
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पुलिस के रिकाॅर्ड में तीन बार, गांव में कई बार हो चुकी है पंचायत
-सेवरही थाना क्षेत्र के देवनारायण टोला निवासी राम प्रसाद मल्लाह तीन पुत्रियों व दो पुत्रों के पिता हैं। उन्होंने अपनी बड़ी बेटी की शादी कर दी है, जबकि 20 वर्षीय लाली कुमारी इंटर तक और 18 वर्षीय शीला कुमारी दसवीं तक पढ़ाई की थी। पहली बार दोनों गांव के ही सजातीय दो युवकों के साथ भाग गई थीं, उसके बाद से ही माता-पिता ने उनकी पढ़ाई छुड़वा दी थी। दोनों नाबालिग भाई प्राइमरी स्कूल में पढ़ते हैं। पढ़ाई छूट जाने के बाद भी दोनों बहनें प्रेम जाल में फंसी रहीं। पुलिस रिकाॅर्ड में वे वह तीन बार घर से भाग चुकी हैं। कई बार गांव वालों की मौजूदगी में पंचायत के जरिए मामला सुलझाया गया। यहां तक कि दोनों परिवार के लोगों पर भी गंभीर आरोप लगा चुकी हैं। गांव वालों के मुताबिक, दोनों बहनों की वजह से घर में हमेशा कलह की स्थिति बनी रहती थी। इसी कलह से आजिज आकर उनकी मां ने आठ माह पहले जहर खाकर जान दे दी थी, लेकिन दोनों बहनों के व्यवहार में कोई परिवर्तन नहीं आया। घर की मान मर्यादा को ताक पर रख कर गांव के दो स्वजातीय युवकों के प्रेम जाल में फंसी रहीं।
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पुलिस ने दर्ज किया इनका बयान
-इस नृशंस हत्या के बाद पुलिस की टीम रात में गांव में ही डटी रही। सुबह एसएचओ गांव में पहुंचे तो कुछ हलचल दिखाई देने लगी। ग्राम प्रधान श्रीराम निषाद, वीरेंद्र निषाद, राजेंद्र निषाद, चंदन सिंह, हंसराज यादव, अजय चौबे, बृजेश यादव आदि आगे आए और अपनी गवाही दर्ज कराई। जबकि कुछ लोग झुंड में एकत्र होकर दबी जुबान से घटना की चर्चा करते दिखे। जबकि गांव में अन्य जगहों पर सन्नाटा पसरा रहा।
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-गिरफ्तार किशोरों को बाल सुधार गृह भेजा गया है। पुलिस ने घटना में प्रयुक्त ठंडा बरामद कर लिया है। आरोपी पिता की तलाश के लिए पुलिस दबिश दे रही है। गांव का माहौल सामान्य है। गांव में पुलिस तैनात है। -सिद्धार्थ वर्मा, एएसपी कुशीनगर