UP News: दुधवा की धरती पर उगा चमकीला मशरूम, रात में निकलती है रोशनी, जीव विज्ञानियों ने खोजी प्रजाति
दुधवा टाइगर रिजर्व में जीव विज्ञानियों ने मशरूम की 58 प्रजातियां की खोज की है। इनमें एक प्रजाति सबसे अलग है। इस प्रजाति का मशरूम रात में चमकता है। उससे रोशनी निकलती है।
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प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता से समृद्ध दुधवा टाइगर रिजर्व (डीटीआर) में जीव विज्ञानियों ने मशरूम की 58 प्रजातियों की खोज की है। इनमें सलूकापुर समेत अन्य स्थानों पर अंधेरे में चमकने वाले फिलोबोलेटस मैनिपुलारिस मशरूम की भी पहचान की गई है। वैज्ञानिक अध्ययन में खोजी गई 58 प्रजातियों में सिर्फ चार को खाने योग्य बताया गया है।
दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डॉ. एच राजामोहन ने बताया कि पार्क के जीव विज्ञानी विपिन सैनी, अपूर्व गुप्ता और डिप्टी रेंजर सुरेंद्र कुमार बारिश के दिनों में जंगल में प्राकृतिक रूप से उगने वाले मशरूम की खोज कर रहे थे। इस दौरान सलूकापुर समेत अन्य स्थानों पर अंधेरे में चमकने वाला मशरूम दिखाई दिया। कई दिनों तक गहराई से छानबीन करने पर इसकी पहचान फिलोबोलेटस मैनिपुलारिस मशरूम प्रजाति के रूप में की गई।
शाकाहारी वन्यजीवों का है भोजन
इनकी कोशिकाओं में होने वाली रासायनिक प्रतिक्रिया के कारण यह प्रजाति रात में चमकती है। फील्ड डायरेक्टर ने बताया कि अधिकतर चमकने वाले मशरूम जहरीले होते हैं। जंगल में प्राकृतिक रूप से निकलने वाले मशरूम के वैज्ञानिक अध्ययन में सामने आया कि जीव विज्ञानियों की खोज में मिली 58 प्रजातियों में सिर्फ चार खाने योग्य हैं। यही कारण है कि जंगल में स्वच्छंद विचरण करने वाले शाकाहारी वन्यजीव केवल गैर-जहरीले मशरूम खोजकर उन्हें बड़े चाव से खाते हैं।
छोटी बिल्ली प्रजातियों के संरक्षण व मानव-वन्यजीव संघर्ष पर मंथन
दुधवा टाइगर रिजर्व में जैव विविधता संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने की पहल के तहत बृहस्पतिवार को दुधवा पर्यटन परिसर में स्थानीय समुदाय के साथ परिचर्चा हुई। इसमें फिशिंग कैट, लेपर्ड कैट, जंगल कैट और रस्टी स्पॉटेड कैट के संरक्षण के साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने की रणनीतियों पर मंथन किया गया। अधिकारियों ने कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसे संवेदनशील मुद्दे का प्रभावी समाधान स्थानीय समुदाय के सक्रिय सहयोग के बिना संभव नहीं है।
बैठक में ग्रामीणों को इन प्रजातियों के महत्व के प्रति जागरूक किया गया और उनसे सुझाव लिए गए, ताकि भविष्य में जैव विविधता को सुरक्षित रखते हुए संघर्ष को न्यूनतम किया जा सके। यह पहल पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से यूएनडीपी और ग्लोबल टाइगर फोरम के सहयोग से संचालित जीईएफ-7 परियोजना का हिस्सा है।