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Lakhimpur Kheri News: चार महीने की मेहमाननवाजी के बाद परिंदों की विदाई
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Wed, 29 Apr 2026 12:18 AM IST
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दुधवा के जलाशयों से उड़ान भरते प्रवासी पक्षी। स्रोत : वन विभाग।
- फोटो : टूंडला के राजा का ताल में जन आक्रोश रैली निकालते भाजपाइ्र संगठन
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बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व की किशनपुर सेंक्चुरी के झादीताल और बफरजोन मैलानी रेंज की नगरिया झील में हजारों किलोमीटर की उड़ान भरकर आए प्रवासी परिंदे अब गर्मी बढ़ने के साथ अपने वतन लौटने लगे हैं। करीब चार माह के प्रवास के बाद उनकी वापसी शुरू हो गई है।
इस बार गर्मी देर से शुरू होने के कारण पक्षियों की वापसी अप्रैल के अंतिम सप्ताह से शुरू हुई है। बड़ी संख्या में झुंड उड़ान भर चुके हैं, जबकि शेष पक्षी वापसी की तैयारी में हैं।
प्रवासी पक्षी मध्य नवंबर से यहां आना शुरू करते हैं। दिसंबर से फरवरी तक दुधवा के जलाशय रंग-बिरंगे परिंदों से गुलजार रहते हैं। मार्च-अप्रैल तक मौसम बदलने पर ये पक्षी वापस लौट जाते हैं।
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ये पक्षी आते हैं
डीटीआर के जलाशयों में यूरोप, मध्य एशिया, पूर्वी साइबेरिया, चीन और लद्दाख से पक्षी आते हैं। इनमें अबलक गुर्चिया बत्तख, ब्राहमानी डक, कूट, मूरहेन, ग्रेलेग गूस, बार-हेडेड गूस और टफ्टेड डक समेत कई प्रजातियां शामिल हैं।
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गर्मी बढ़ने के साथ ठंडे देशों से आने वाले प्रवासी पक्षियों की वापसी शुरू हो गई है। बड़ी संख्या में पक्षी लौट चुके हैं, जबकि शेष वापसी की तैयारी में हैं।
-डॉ. एच. राजामोहन, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व
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इस बार गर्मी देर से शुरू होने के कारण पक्षियों की वापसी अप्रैल के अंतिम सप्ताह से शुरू हुई है। बड़ी संख्या में झुंड उड़ान भर चुके हैं, जबकि शेष पक्षी वापसी की तैयारी में हैं।
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प्रवासी पक्षी मध्य नवंबर से यहां आना शुरू करते हैं। दिसंबर से फरवरी तक दुधवा के जलाशय रंग-बिरंगे परिंदों से गुलजार रहते हैं। मार्च-अप्रैल तक मौसम बदलने पर ये पक्षी वापस लौट जाते हैं।
ये पक्षी आते हैं
डीटीआर के जलाशयों में यूरोप, मध्य एशिया, पूर्वी साइबेरिया, चीन और लद्दाख से पक्षी आते हैं। इनमें अबलक गुर्चिया बत्तख, ब्राहमानी डक, कूट, मूरहेन, ग्रेलेग गूस, बार-हेडेड गूस और टफ्टेड डक समेत कई प्रजातियां शामिल हैं।
गर्मी बढ़ने के साथ ठंडे देशों से आने वाले प्रवासी पक्षियों की वापसी शुरू हो गई है। बड़ी संख्या में पक्षी लौट चुके हैं, जबकि शेष वापसी की तैयारी में हैं।
-डॉ. एच. राजामोहन, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व
