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Lakhimpur Kheri News: केसरबाग, देहरादून, पिथौरागढ़ समेत कई डिपो की बसें नहीं आ रहीं अड्डे पर
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 21 Mar 2026 11:04 PM IST
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लखीमपुर खीरी। लखीमपुर डिपो पर 30 से अधिक रोडवेज बसों का समय निर्धारित है, लेकिन इनमें से 10 से अधिक बसें डिपो तक पहुंचती ही नहीं। ये बसें हाईवे या डिपो से पहले पड़ने वाले चौराहों पर ही सवारियां उतारकर लौट जाती हैं।
शनिवार को पड़ताल में अन्य डिपो की आठ से 10 बसें डिपो नहीं पहुंचीं। सबसे ज्यादा मनमानी केसरबाग डिपो की बसों में सामने आई, जिनकी सात-आठ बसें रोजाना गोंविद चौक से ही लौट जाती हैं। सवारियों के अनुरोध के बावजूद चालक-परिचालक डिपो तक नहीं जाते।
गोला डिपो की बंडा-बिलसंडा से बरेली जाने वाली बस भी कई बार हाईवे से ही निकल जाती है। रूपैडिया की दोपहर 12 बजे वाली बस, ऐरा-धौरहरा की तीन-चार बसें, देहरादून (शाम 5:30) और पिथौरागढ़ (रात 8:30) डिपो की बसें भी अक्सर डिपो तक नहीं आतीं।
एआरएम गीता सिंह ने बताया कि डिपो पर जगह कम होने से दिक्कत है। नया बस अड्डा बनने के बाद समस्या खत्म होने की उम्मीद है।
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चालक-परिचालकों ने जाम को बताया वजह
चालकों के मुताबिक लखीमपुर डिपो का बस अड्डा छोटा है और बस खड़ी करने की पर्याप्त जगह नहीं मिलती। जगह मिलने पर भी बसें जाम में फंस जाती हैं। रोडवेज तक जाने वाली सड़क संकरी होने से परेशानी बढ़ती है, इसी कारण कई बसें चौराहे से ही लौट जाती हैं।
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शनिवार को पड़ताल में अन्य डिपो की आठ से 10 बसें डिपो नहीं पहुंचीं। सबसे ज्यादा मनमानी केसरबाग डिपो की बसों में सामने आई, जिनकी सात-आठ बसें रोजाना गोंविद चौक से ही लौट जाती हैं। सवारियों के अनुरोध के बावजूद चालक-परिचालक डिपो तक नहीं जाते।
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गोला डिपो की बंडा-बिलसंडा से बरेली जाने वाली बस भी कई बार हाईवे से ही निकल जाती है। रूपैडिया की दोपहर 12 बजे वाली बस, ऐरा-धौरहरा की तीन-चार बसें, देहरादून (शाम 5:30) और पिथौरागढ़ (रात 8:30) डिपो की बसें भी अक्सर डिपो तक नहीं आतीं।
एआरएम गीता सिंह ने बताया कि डिपो पर जगह कम होने से दिक्कत है। नया बस अड्डा बनने के बाद समस्या खत्म होने की उम्मीद है।
चालक-परिचालकों ने जाम को बताया वजह
चालकों के मुताबिक लखीमपुर डिपो का बस अड्डा छोटा है और बस खड़ी करने की पर्याप्त जगह नहीं मिलती। जगह मिलने पर भी बसें जाम में फंस जाती हैं। रोडवेज तक जाने वाली सड़क संकरी होने से परेशानी बढ़ती है, इसी कारण कई बसें चौराहे से ही लौट जाती हैं।