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Lakhimpur Kheri News: गंगा-जमुनी संस्कृति की मिसाल है चैती मेला, 25 से हो सकता है शुरू

संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Updated Fri, 20 Mar 2026 11:14 PM IST
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Chaiti Mela is an example of Ganga-Jamuni culture, it may start from 25th
गोला में चैती मेला मैदान को खाली कराने के लिए विचार विमर्श करते अधिकारी कर्मचारी। संवाद
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गोला गोकर्णनाथ। नगर का ऐतिहासिक चैती मेला करीब 121 वर्षों से गंगा-जमुनी संस्कृति को संजोए हुए है। इस वर्ष मेले की तैयारियां तेज कर दी गई हैं और 25 मार्च से इसके शुभारंभ का प्रयास किया जा रहा है।
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बताया जाता है कि वर्ष 1905 में नगर समिति के गठन के साथ ही चैती मेले की परंपरा शुरू हुई थी। इससे पहले सन 1789 में राय मंसाराम ने शहर को बसाया था। वर्ष 1936 में गोला को टाउन एरिया और 1946 में नगर पालिका परिषद का दर्जा मिलने के बाद से मेला और भव्य रूप में आयोजित होने लगा।
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पुराने लोग बताते हैं कि पहले गांवों से लोग लाहडुआ (लकड़ी के पहियों वाली बैलगाड़ी), हाथी, घोड़े और साइकिलों से मेला देखने आते थे। श्रद्धालु रातभर रुककर पौराणिक शिव मंदिर में दर्शन करते और मेले का आनंद लेते थे। समय के साथ मेले की अवधि भले ही घटकर करीब 20 दिन रह गई हो, लेकिन इसकी परंपराएं आज भी जीवंत हैं।
चैती मेला स्थानीय प्रतिभाओं के लिए भी बड़ा मंच माना जाता है। मेले के सांस्कृतिक मंच पर हर शाम विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें स्थानीय कलाकार अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं।
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मेला मैदान खाली न होने से उद्घाटन में देरी
नगर पालिका परिषद अध्यक्ष विजय शुक्ला रिंकू ने बताया कि इस बार मेले को और आकर्षक बनाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। डीएम के सहयोग से पर्यटन विभाग, उत्तर प्रदेश शासन से पहली बार 40 लाख रुपये की स्वीकृति मिली है, जिससे मेले की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाया जाएगा। हालांकि मेला मैदान पूरी तरह खाली न हो पाने के कारण उद्घाटन में देरी हो रही है। शुक्रवार को पालिका अध्यक्ष, एसडीएम प्रतीक्षा त्रिपाठी और प्रभारी ईओ आईएएस मनीषा धार्वे ने मेला मैदान का निरीक्षण कर दुकानदारों को जल्द दुकानें हटाने के निर्देश दिए। ईद के चलते दुकानें न हट पाने को देरी का प्रमुख कारण बताया जा रहा है।
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